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Balrampur News: उपडाकपाल ने हड़प लिए 1.60 करोड़
Mon, 16 Jun 2025 12:19 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Mon, 16 Jun 2025 12:19 AM IST
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उतरौला स्थित उप डाकघर। - संवाद
बलरामपुर। उप डाकघर उतरौला के उपडाकपाल नरेंद्र प्रताप ने बैंक में जमा दिखाकर 1.60 करोड़ रुपये का गबन कर लिया। बलरामपुर डाकघर के सहायक अधीक्षक अशोक कुमार की जांच में गबन का खुलासा हुआ है। उपडाकपाल ने भारतीय स्टेट बैंक में धनराशि को जमा करना दिखाया लेकिन बैंक में रकम जमा नहीं की।
उपडाकपाल ने डाक विभाग की बेवसाइट पर धनराशि को जमा दर्ज करने के लिए अपनी यूजर आईडी का प्रयोग किया। इसी से मामला पकड़ में आया और बैंक में जानकारी करने पर स्पष्ट हुआ कि धनराशि जमा नहीं हुई है। इस पूरे मामले में वह अपनी स्थिति भी स्पष्ट नहीं कर सके।
सहायक अधीक्षक ने एसपी को मामले की रिपाेर्ट भेजी जिसमें वर्ष 2024 में बड़े पैमाने गबन की पुष्टि की और मुकदमा दर्ज कराने की मांग भी की। रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद एसपी विकास कुमार ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
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प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज सिंह ने बताया कि मामला वर्ष 2024 का होने के कारण उपडाकपाल नरेंद्र प्रताप के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मुकदमा केंद्रीय अधिकारी से संबंधित होने के कारण विवेचना पुलिस उपाधीक्षक ललिया जितेंद्र कुमार करेंगे।
अलग-अलग तिथियों में निकाली रकम
उपडाकपाल ने अलग-अलग तिथियों में रकम का गबन किया। पूरा खेल अप्रैल से जुलाई के बीच किया। 02 अप्रैल को ही दो बार में 10-10 लाख करके 20 लाख, 30 अप्रैल को 10 लाख, दूसरे ही दिन पहली मई को दो बार में 10-10 लाख करके 20 लाख, 02 मई, 11 मई, 27 मई, 28 मई को 10-10 लाख, पहली जून को 10 लाख तथा 09 जुलाई को 60 हजार 249 रुपये बैंक में जमा किया जाना दिखाया। यह रकम बैंक में जमा ही नहीं की गई।
खाताधारकों ने जमा की थी धनराशि
डाकघर में जिस धनराशि का गबन किया गया, वह खाताधारकों और डाकघर के एजेंटों ने जमा की थी। नियमों के तहत डाकघर में जमा होने वाली रकम को ऑनलाइन दर्ज करके बैंक में जमा करना था। सहायक अधीक्षक अशोक कुमार की जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि उपडाकपाल ने जमा करने की प्रक्रिया पूरी करके धनराशि का गबन किया जिससे पकड़ में न आ सके।
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उपडाकपाल ने डाक विभाग की बेवसाइट पर धनराशि को जमा दर्ज करने के लिए अपनी यूजर आईडी का प्रयोग किया। इसी से मामला पकड़ में आया और बैंक में जानकारी करने पर स्पष्ट हुआ कि धनराशि जमा नहीं हुई है। इस पूरे मामले में वह अपनी स्थिति भी स्पष्ट नहीं कर सके।
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सहायक अधीक्षक ने एसपी को मामले की रिपाेर्ट भेजी जिसमें वर्ष 2024 में बड़े पैमाने गबन की पुष्टि की और मुकदमा दर्ज कराने की मांग भी की। रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद एसपी विकास कुमार ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
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प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज सिंह ने बताया कि मामला वर्ष 2024 का होने के कारण उपडाकपाल नरेंद्र प्रताप के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मुकदमा केंद्रीय अधिकारी से संबंधित होने के कारण विवेचना पुलिस उपाधीक्षक ललिया जितेंद्र कुमार करेंगे।
अलग-अलग तिथियों में निकाली रकम
उपडाकपाल ने अलग-अलग तिथियों में रकम का गबन किया। पूरा खेल अप्रैल से जुलाई के बीच किया। 02 अप्रैल को ही दो बार में 10-10 लाख करके 20 लाख, 30 अप्रैल को 10 लाख, दूसरे ही दिन पहली मई को दो बार में 10-10 लाख करके 20 लाख, 02 मई, 11 मई, 27 मई, 28 मई को 10-10 लाख, पहली जून को 10 लाख तथा 09 जुलाई को 60 हजार 249 रुपये बैंक में जमा किया जाना दिखाया। यह रकम बैंक में जमा ही नहीं की गई।
खाताधारकों ने जमा की थी धनराशि
डाकघर में जिस धनराशि का गबन किया गया, वह खाताधारकों और डाकघर के एजेंटों ने जमा की थी। नियमों के तहत डाकघर में जमा होने वाली रकम को ऑनलाइन दर्ज करके बैंक में जमा करना था। सहायक अधीक्षक अशोक कुमार की जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि उपडाकपाल ने जमा करने की प्रक्रिया पूरी करके धनराशि का गबन किया जिससे पकड़ में न आ सके।