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रिश्तों मे तल्खी ,बहनें भाईयों को नहीं बांध पाई राखी
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मनीषा चौधरी
- फोटो : BALRAMPUR
बलरामपुर। चीन की साजिश के चलते तल्ख हुए भारत-नेपाल के रिश्तों तथा कोरोना महामारी की वजह से इस बार रक्षाबंधन पर भारतीय तथा नेपाली भाई-बहनों का रिश्ता भी अधूरा रहा। सीमा पर एसएसबी तथा नेपाल प्रहरी की कड़ी चौकसी के चलते भाई अपनी बहनों से तथा बहनें अपने भाइयों से नहीं मिल सकीं। पगडंडी रास्तों से नेपाल जा रही बहनें मायूस होकर सीमा से घर लौट आईं। इसी तरह नेपाल से भारत आकर बहनों से राखी बंधवाने वाले भाई भी सीमा पार नहीं कर सके।
विदित हो कि भारत और नेपाल के बीच सदियों से रोटी बेटी का संबंध है। दोनों तरफ की तमाम बेटियां एक दूसरे देश में ब्याही गई हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों का एक दूसरे देश में राखी बांधने के लिए बेरोकटोक आना जाना होता था। इसी तरह भाई भी एक-दूसरे देश में जाकर बहनों से राखी बंधवाते थे और उनके रक्षा का वचन देते थे। पिछले कुछ महीनों से चीन के बहकावे में आकर नेपाल के प्रधानमंत्री ने रिश्तों में कड़वाहट पैदा कर दी है। सोमवार को भाई को राखी बांधने के लिए मझगवां चौकी के पास पगडंडी रास्ते से होकर नेपाल जा रही मनीषा चौधरी, वंदना, लक्ष्मी तथा शर्मीला ने बताया कि हर साल हम लोग रक्षाबंधन नेपाल जाकर भाइयों को राखी बांधते थे और इसी बहाने मां-बाप तथा अन्य परिजनों से भी मिलजुल कर हाल चाल लेते थे।
बीते दिनों कोरोना महामारी के चलते सीमा पर हुए लॉकडाउन के कारण आना-जाना पहले से ही रुक गया था केवल फोन से ही परिजनों से बात हो पाती है। रक्षाबंधन के दिन यह उम्मीद जगी थी कि दोनों देशों का प्रशासन पूर्व की भांति हमें एक दूसरे देश में आने जाने की छूट मिलेगी । कोरोना महामारी व रिश्तों में कड़वाहट के कारण इस बार हम लोग एक दूसरे के देश की सीमा में प्रवेश नहीं कर सके। सीमा से ही हम लोगों को आपस घर लौटा दिया गया।
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इन लोगों का यह भी कहना था कि जिस तरह से दोनों देशों के बीच रिश्तो की कड़वाहट बढ़ रही है वह किसी के लिए भी ठीक नहीं है। बातचीत के दौरान बहनों के चेहरे पर भाइयों तथा परिजनों से न मिल पाने की कसक साफ दिख रही थी। कई बहनें इस उम्मीद में काफी देर तक सीमा पर खड़ी रही कि हो सकता है देर शाम तक उन्हें एक दूसरे की सीमा में जाने का मौका मिल जाए। लेकिन ऐसा हुआ नहीं मायूस होकर लोग अपने अपने घरों को लौट गए।
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विदित हो कि भारत और नेपाल के बीच सदियों से रोटी बेटी का संबंध है। दोनों तरफ की तमाम बेटियां एक दूसरे देश में ब्याही गई हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों का एक दूसरे देश में राखी बांधने के लिए बेरोकटोक आना जाना होता था। इसी तरह भाई भी एक-दूसरे देश में जाकर बहनों से राखी बंधवाते थे और उनके रक्षा का वचन देते थे। पिछले कुछ महीनों से चीन के बहकावे में आकर नेपाल के प्रधानमंत्री ने रिश्तों में कड़वाहट पैदा कर दी है। सोमवार को भाई को राखी बांधने के लिए मझगवां चौकी के पास पगडंडी रास्ते से होकर नेपाल जा रही मनीषा चौधरी, वंदना, लक्ष्मी तथा शर्मीला ने बताया कि हर साल हम लोग रक्षाबंधन नेपाल जाकर भाइयों को राखी बांधते थे और इसी बहाने मां-बाप तथा अन्य परिजनों से भी मिलजुल कर हाल चाल लेते थे।
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बीते दिनों कोरोना महामारी के चलते सीमा पर हुए लॉकडाउन के कारण आना-जाना पहले से ही रुक गया था केवल फोन से ही परिजनों से बात हो पाती है। रक्षाबंधन के दिन यह उम्मीद जगी थी कि दोनों देशों का प्रशासन पूर्व की भांति हमें एक दूसरे देश में आने जाने की छूट मिलेगी । कोरोना महामारी व रिश्तों में कड़वाहट के कारण इस बार हम लोग एक दूसरे के देश की सीमा में प्रवेश नहीं कर सके। सीमा से ही हम लोगों को आपस घर लौटा दिया गया।
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इन लोगों का यह भी कहना था कि जिस तरह से दोनों देशों के बीच रिश्तो की कड़वाहट बढ़ रही है वह किसी के लिए भी ठीक नहीं है। बातचीत के दौरान बहनों के चेहरे पर भाइयों तथा परिजनों से न मिल पाने की कसक साफ दिख रही थी। कई बहनें इस उम्मीद में काफी देर तक सीमा पर खड़ी रही कि हो सकता है देर शाम तक उन्हें एक दूसरे की सीमा में जाने का मौका मिल जाए। लेकिन ऐसा हुआ नहीं मायूस होकर लोग अपने अपने घरों को लौट गए।

वंदना देवी- फोटो : BALRAMPUR

शर्मिला देवी- फोटो : BALRAMPUR

लक्ष्मी देवी- फोटो : BALRAMPUR

बलरामपुर के पचपेड़वा क्षेत्र में नेपाल सीमा के पास एसएसबी द्वारा प्रवेश न दिए जाने से खड़ी बहनें- फोटो : BALRAMPUR