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बिचौलियों के हाथों धान बेचने को मजबूर अन्नदाता
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बलरामपुर। जिले में धान खरीद काफी सुस्त चल रही है। अन्नदाता बिचौलियों के हाथ धान बेचने को मजबूर हैं। उपज का भरपूर लाभ दिलाने के लिए प्रशासन का फरमान भी कागजी है। जिले के कई धान क्रय केंद्रों पर अभी तक बोहनी भी नहीं हुई है। धान खरीद का भुगतान भी अन्नदाताओं को समय से नहीं मिल रहा है। दो क्रय एजेंसियों को निर्धारित समय में 12 हजार एमटी धान खरीद का लक्ष्य मिला है। दोनों क्रय एजेंसियों को 29 केंद्रों पर धान खरीदने का निर्देश दिया गया है।
जिले में 16 दिनों बाद भी अभी तक सरकारी धान खरीद रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। दो क्रय एजेंसियों ने अभी तक जिले में मात्र 86 किसानों से 4.11 प्रतिशत के साथ 492.64 एमटी धान खरीदा है। खरीफ क्रय वर्ष 2020-21 में 15 अक्तूबर से धान खरीद शुरू कर दी गई। खाद्य विभाग ने अब तक छह क्रय केंद्रों पर 13 किसानों से 3.37 प्रतिशत के साथ 84.22 एमटी धान खरीदा है जबकि खाद्य विभाग को 2500 एमटी धान खरीदना है।
खाद्य विभाग के दो क्रय केंद्र भी अभी तक संचालित नहीं हो सके हैं। पीसीएफ को 34 केद्रों पर 9500 एमटी धान खरीदने का लक्ष्य मिला है, जिसकी तुलना में 73 किसानों से 4.3 प्रतिशत की दर से 408.42 एमटी धान की खरीद की गई है। पीसीएफ के भी 10 क्रय केंद्र अभी तक संचालित नहीं हो सके हैं। भुगतान के मामले में भी क्रय एजेंसियां फिसड्डी दिख रही हैं। धान खरीद का क्रय एजेंसियों को 92.03 लाख रुपये का भुगतान करना है जिसकी तुलना में अभी तक 27.73 लाख रुपये का ही भुगतान हो सका है।
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जिले में 29 अक्तूबर तक 64.29 लाख रुपये का भुगतान नहीं हो सका है। खाद्य विभाग ने सभी 13 किसानों को 15.73 लाख की तुलना में शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है जबकि पीसीएफ ने 73 किसानों से 76.29 लाख रुपये का धान खरीदा और 12 लाख का भुगतान कर दिया है। पीसीएफ अभी तक 64.29 लाख रुपये के धान का मूल्य दबाए बैठी है।
किसानों का आरोप है कि क्रय एजेंसियों की मनमानी के चलते उन्हें बिचौलियों के हाथ औने पौने दामों में अपना धान बेचना पड़ रहा है। डिप्टी आरएमओ नरेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि धान खरीद में तेजी लाने के लिए दोनों क्रय एजेंसियों को सभी केंद्रों का संचालन शुरू कराने और किसानों को 72 घंटे के अंदर बेचे गए धान का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।
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जिले में 16 दिनों बाद भी अभी तक सरकारी धान खरीद रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। दो क्रय एजेंसियों ने अभी तक जिले में मात्र 86 किसानों से 4.11 प्रतिशत के साथ 492.64 एमटी धान खरीदा है। खरीफ क्रय वर्ष 2020-21 में 15 अक्तूबर से धान खरीद शुरू कर दी गई। खाद्य विभाग ने अब तक छह क्रय केंद्रों पर 13 किसानों से 3.37 प्रतिशत के साथ 84.22 एमटी धान खरीदा है जबकि खाद्य विभाग को 2500 एमटी धान खरीदना है।
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खाद्य विभाग के दो क्रय केंद्र भी अभी तक संचालित नहीं हो सके हैं। पीसीएफ को 34 केद्रों पर 9500 एमटी धान खरीदने का लक्ष्य मिला है, जिसकी तुलना में 73 किसानों से 4.3 प्रतिशत की दर से 408.42 एमटी धान की खरीद की गई है। पीसीएफ के भी 10 क्रय केंद्र अभी तक संचालित नहीं हो सके हैं। भुगतान के मामले में भी क्रय एजेंसियां फिसड्डी दिख रही हैं। धान खरीद का क्रय एजेंसियों को 92.03 लाख रुपये का भुगतान करना है जिसकी तुलना में अभी तक 27.73 लाख रुपये का ही भुगतान हो सका है।
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जिले में 29 अक्तूबर तक 64.29 लाख रुपये का भुगतान नहीं हो सका है। खाद्य विभाग ने सभी 13 किसानों को 15.73 लाख की तुलना में शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है जबकि पीसीएफ ने 73 किसानों से 76.29 लाख रुपये का धान खरीदा और 12 लाख का भुगतान कर दिया है। पीसीएफ अभी तक 64.29 लाख रुपये के धान का मूल्य दबाए बैठी है।
किसानों का आरोप है कि क्रय एजेंसियों की मनमानी के चलते उन्हें बिचौलियों के हाथ औने पौने दामों में अपना धान बेचना पड़ रहा है। डिप्टी आरएमओ नरेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि धान खरीद में तेजी लाने के लिए दोनों क्रय एजेंसियों को सभी केंद्रों का संचालन शुरू कराने और किसानों को 72 घंटे के अंदर बेचे गए धान का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।