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Balrampur News: जीवन संस्कारों का महत्वपूर्ण केंद्र है शक्तिपीठ देवीपाटन
Mon, 19 Jan 2026 11:15 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Mon, 19 Jan 2026 11:15 PM IST
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शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु ।-संवाद
तुलसीपुर। शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर जीवन के महत्वपूर्ण संस्कारों का प्रमुख केंद्र भी है। मुंडन संस्कार, अन्नप्राशन, गृहप्रवेश से पूर्व पूजन, शिक्षा आरंभ (विद्यारंभ) और विवाह से पहले मां का आशीर्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिवार अपने बच्चों और परिजनों के साथ देवीपाटन मंदिर पहुंचे। बच्चों के संस्कार कराए और मां का पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद लिया।
लखनऊ से आए श्रद्धालु गिरिराज ने बताया कि उनके परिवार में परंपरा है, बच्चों का पहला मुंडन देवीपाटन में ही कराया जाता है। कहा कि माता के आशीर्वाद से बच्चे का भविष्य सुरक्षित रहता है। गोरखपुर से आए श्रद्धालु राकेश का कहना है कि देवीपाटन केवल मंदिर नहीं, बल्कि आस्था का केंद्र है। उन्होंने बताया कि यहां आकर लगता है कि माता खुद बच्चों पर कृपा कर रही हैं। संस्कार के साथ दर्शन हो जाए तो बड़ा संतोष मिलता है।
मां के चरणों में हुए संस्कार होते हैं शुभ फलदायी
मंदिर के पुजारी योगी वशिष्ठ नाथ बताते हैं कि देवीपाटन 51 शक्तिपीठों में से एक है और यहां किए गए संस्कार को विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि माता के चरणों में किया गया पहला संस्कार बच्चे के जीवन को शुभ, सुरक्षित और सफल बनाता है। इसी विश्वास के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी लोग यहां संस्कार कराते चले आ रहे हैं। राजघराने और संत-महात्मा भी अपने परिवार के बच्चों के संस्कार देवीपाटन में ही कराते थे। धीरे-धीरे यह परंपरा आम जनमानस में सांस्कृतिक परंपरा का रूप ले चुकी है।
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देवीपाटन में संस्कारों के लिए सभी सुविधाएं
मंदिर प्रशासन के अनुसार, नवरात्र, सोमवार और विशेष तिथियों पर संस्कार कराने वालों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। देवीपाटन में संस्कार कराने के लिए विशेष पंडाल क्षेत्र, पुरोहितों की व्यवस्था, सामग्री की दुकानों, बच्चों और महिलाओं के लिए सुविधा केंद्र भी विकसित हो चुके हैं। बाहर से आने वाले श्रद्धालु परिवारों को सारी सुविधाएं एक जगह मिल जाती हैं। धार्मिक जानकारों का मानना है कि जब किसी स्थान से आस्था, परंपरा और सुविधा तीनों जुड़ जाती हैं, तो वह केवल तीर्थ नहीं, बल्कि संस्कारों का केंद्र बन जाता है। देवीपाटन मंदिर इसी तरह का एक केंद्र है।
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लखनऊ से आए श्रद्धालु गिरिराज ने बताया कि उनके परिवार में परंपरा है, बच्चों का पहला मुंडन देवीपाटन में ही कराया जाता है। कहा कि माता के आशीर्वाद से बच्चे का भविष्य सुरक्षित रहता है। गोरखपुर से आए श्रद्धालु राकेश का कहना है कि देवीपाटन केवल मंदिर नहीं, बल्कि आस्था का केंद्र है। उन्होंने बताया कि यहां आकर लगता है कि माता खुद बच्चों पर कृपा कर रही हैं। संस्कार के साथ दर्शन हो जाए तो बड़ा संतोष मिलता है।
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मां के चरणों में हुए संस्कार होते हैं शुभ फलदायी
मंदिर के पुजारी योगी वशिष्ठ नाथ बताते हैं कि देवीपाटन 51 शक्तिपीठों में से एक है और यहां किए गए संस्कार को विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि माता के चरणों में किया गया पहला संस्कार बच्चे के जीवन को शुभ, सुरक्षित और सफल बनाता है। इसी विश्वास के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी लोग यहां संस्कार कराते चले आ रहे हैं। राजघराने और संत-महात्मा भी अपने परिवार के बच्चों के संस्कार देवीपाटन में ही कराते थे। धीरे-धीरे यह परंपरा आम जनमानस में सांस्कृतिक परंपरा का रूप ले चुकी है।
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देवीपाटन में संस्कारों के लिए सभी सुविधाएं
मंदिर प्रशासन के अनुसार, नवरात्र, सोमवार और विशेष तिथियों पर संस्कार कराने वालों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। देवीपाटन में संस्कार कराने के लिए विशेष पंडाल क्षेत्र, पुरोहितों की व्यवस्था, सामग्री की दुकानों, बच्चों और महिलाओं के लिए सुविधा केंद्र भी विकसित हो चुके हैं। बाहर से आने वाले श्रद्धालु परिवारों को सारी सुविधाएं एक जगह मिल जाती हैं। धार्मिक जानकारों का मानना है कि जब किसी स्थान से आस्था, परंपरा और सुविधा तीनों जुड़ जाती हैं, तो वह केवल तीर्थ नहीं, बल्कि संस्कारों का केंद्र बन जाता है। देवीपाटन मंदिर इसी तरह का एक केंद्र है।