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Balrampur News: एसडीएम सदर का हलफनामा खारिज, हाईकोर्ट ने 11 को किया तलब
Fri, 01 May 2026 11:03 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Fri, 01 May 2026 11:03 PM IST
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बलरामपुर। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बलरामपुर के उप जिलाधिकारी (एसडीएम) हेमंत कुमार गुप्ता की ओर से दाखिल अनुपालन हलफनामे को अस्वीकार कर दिया है। न्यायालय ने हलफनामे को अपूर्ण और अस्पष्ट मानते हुए खारिज किया तथा अवमानना कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए एसडीएम को 11 मई को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की एकल पीठ ने राम धीरज त्रिपाठी बनाम हेमंत कुमार गुप्ता, उप जिलाधिकारी बलरामपुर की अवमानना याचिका में सुनवाई के दौरान पारित किया।
याचिकाकर्ता राम धीरज त्रिपाठी ने अदालत में अवमानना याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि न्यायालय के पूर्व आदेशों का समुचित अनुपालन नहीं किया गया। मामले में पूर्व में भी अदालत ने सख्त रुख अपनाया था। सुनवाई के दौरान विपक्षी पक्ष की ओर से न्यायालय में अनुपालन शपथ पत्र दाखिल किया गया। न्यायालय ने जब हलफनामे का परीक्षण किया तो पाया कि भूमि अधिग्रहण से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों और आवश्यक अधिसूचना का स्पष्ट उल्लेख अभिलेखों में नहीं किया गया है। 29 अप्रैल को हुई सुनवाई में न्यायालय ने कहा कि दाखिल अनुपालन हलफनामा यह स्पष्ट नहीं करता कि याचिकाकर्ता की भूमि का अधिग्रहण हुआ था या नहीं। ऐसे में यह हलफनामा स्वीकार करने योग्य नहीं है और इसे निरस्त किया जाता है। न्यायालय ने आगे कहा कि मामले में अवमानना की कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी और संबंधित अधिकारी अगली तिथि पर न्यायालय में उपस्थित रहें, जहां आरोप निर्धारण सहित आगे की कार्यवाही की जाएगी। पूर्व सुनवाई में न्यायालय ने एसडीएम पर 2000 रुपये की लागत भी लगाई थी, जिसे एसडीएम के अधिवक्ता ने याचिकाकर्ता पक्ष को डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से अदा किया गया। हाईकोर्ट ने मामले को 11 मई 2026 को सूचीबद्ध करते हुए शीर्ष 30 मामलों में सुनवाई के लिए लगाने का निर्देश दिया है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की एकल पीठ ने राम धीरज त्रिपाठी बनाम हेमंत कुमार गुप्ता, उप जिलाधिकारी बलरामपुर की अवमानना याचिका में सुनवाई के दौरान पारित किया।
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याचिकाकर्ता राम धीरज त्रिपाठी ने अदालत में अवमानना याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि न्यायालय के पूर्व आदेशों का समुचित अनुपालन नहीं किया गया। मामले में पूर्व में भी अदालत ने सख्त रुख अपनाया था। सुनवाई के दौरान विपक्षी पक्ष की ओर से न्यायालय में अनुपालन शपथ पत्र दाखिल किया गया। न्यायालय ने जब हलफनामे का परीक्षण किया तो पाया कि भूमि अधिग्रहण से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों और आवश्यक अधिसूचना का स्पष्ट उल्लेख अभिलेखों में नहीं किया गया है। 29 अप्रैल को हुई सुनवाई में न्यायालय ने कहा कि दाखिल अनुपालन हलफनामा यह स्पष्ट नहीं करता कि याचिकाकर्ता की भूमि का अधिग्रहण हुआ था या नहीं। ऐसे में यह हलफनामा स्वीकार करने योग्य नहीं है और इसे निरस्त किया जाता है। न्यायालय ने आगे कहा कि मामले में अवमानना की कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी और संबंधित अधिकारी अगली तिथि पर न्यायालय में उपस्थित रहें, जहां आरोप निर्धारण सहित आगे की कार्यवाही की जाएगी। पूर्व सुनवाई में न्यायालय ने एसडीएम पर 2000 रुपये की लागत भी लगाई थी, जिसे एसडीएम के अधिवक्ता ने याचिकाकर्ता पक्ष को डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से अदा किया गया। हाईकोर्ट ने मामले को 11 मई 2026 को सूचीबद्ध करते हुए शीर्ष 30 मामलों में सुनवाई के लिए लगाने का निर्देश दिया है।
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