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Balrampur News: चार महीने बाद भी पंचायत भवन नहीं लौटा आठ लाख का बरामद सामान

Fri, 26 Jun 2026 10:50 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Fri, 26 Jun 2026 10:50 PM IST
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Recovered goods worth eight lakh rupees not returned to Panchayat Bhawan even after four months
फोटो-2-बलरामपुर के गंगापुर बांकी में बंद पड़ा पंचायत सचिवालय ।-स्रोत: ग्रामीण
बलरामपुर। ग्राम पंचायत गंगापुर बांकी के पंचायत भवन से चोरी हुआ करीब आठ लाख रुपये का सामान पुलिस ने घटना के छह दिन बाद ही बरामद कर लिया था। लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी सामान पंचायत भवन तक नहीं पहुंच सका है। वजह यह है कि सामान की सुपुर्दगी के लिए जरूरी बिल, वाउचर और खरीद संबंधी अभिलेख अब तक न्यायालय में पेश नहीं किए जा सके हैं।
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इस देरी से पंचायत भवन में शुरू होने वाली डिजिटल और जनसेवा सुविधाएं ठप पड़ी हैं। वहीं, खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि खरीद नियमों के अनुसार हुई थी तो जरूरी दस्तावेज न्यायालय में जमा कराने में इतनी देरी क्यों हो रही है।
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गंगापुर बांकी पंचायत भवन में छह मार्च की रात चोर चार कंप्यूटर सिस्टम, मॉनीटर, प्रिंटर, वाई-फाई उपकरण, एलसीडी, सीसीटीवी कैमरे, इन्वर्टर, बैटरियां और साउंड सिस्टम समेत करीब आठ लाख रुपये का सामान चोरी कर ले गए थे। पुलिस ने 12 मार्च को मामले का खुलासा करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी का अधिकांश सामान बरामद कर लिया था। उस समय माना जा रहा था कि जल्द ही पंचायत भवन की सेवाएं बहाल हो जाएंगी, लेकिन मामला न्यायालय में पहुंचने के बाद कागजी प्रक्रिया में उलझ गया।
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मामले के विवेचक एवं चकवा चौकी प्रभारी प्रशांत मिश्रा ने बताया कि बरामद सामान न्यायालय के आदेश के बाद ही संबंधित विभाग को सौंपा जा सकता है। इसके लिए विभाग को खरीद संबंधी आवश्यक अभिलेख न्यायालय में प्रस्तुत करने होंगे। वहीं ग्राम पंचायत सचिव सुशील यादव ने बताया कि बिल-वाउचर तैयार कर लिए गए हैं। एक-दो दिन में उन्हें न्यायालय में जमा करा दिया जाएगा। इसके बाद सामान वापस लेने की प्रक्रिया पूरी होगी।
बिल-वाउचर बने सबसे बड़ी अड़चन
बरामद सामान वापस लेने के लिए संबंधित विभाग को न्यायालय में यह साबित करना होता है कि सामान उसी का है। इसके लिए खरीद के बिल, वाउचर, स्टॉक रजिस्टर और अन्य अभिलेख प्रस्तुत करना जरूरी होता है। चार महीने बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। सूत्रों के अनुसार, खरीद से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने में हो रही देरी से कई सवाल उठ रहे हैं। पंचायत स्तर पर चर्चा है कि अभिलेखों में दर्ज कीमत और बरामद सामान की वास्तविक स्थिति में अंतर हो सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दस्तावेज जमा करने में हो रही लगातार देरी संदेह बढ़ा रही है।

ग्रामीणों की सुविधाएं अब भी ठप
कागजी प्रक्रिया पूरी न होने का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। पंचायत भवन में प्रस्तावित आधार सेवा केंद्र अब तक शुरू नहीं हो सका है। आधार पंजीकरण और संशोधन का काम बंद है। आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र, ऑनलाइन आवेदन, पेंशन सहित कई जनसेवा संबंधी कार्य भी प्रभावित हैं। ग्रामीण कल्लू, पिंटू, राजेश समेत अन्य लोगों का कहना है कि जिन सुविधाओं का लाभ गांव में मिलना था, उनके लिए अब तहसील और जिला मुख्यालय जाना पड़ रहा है। इससे सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और छात्रों को हो रही है।
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