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Balrampur News: नेपाल में बारिश से राप्ती के तेवर तल्ख, 150 गांवों में दहशत

Tue, 18 Aug 2026 11:06 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Tue, 18 Aug 2026 11:06 PM IST
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Rapti turns turbulent due to rains in Nepal; panic grips 150 villages
फोटो-6-बलरामपुर में राप्ती नदी के सिसई घाट पर बढ़ रहा जलस्तर ।-संवाद
बलरामपुर। नेपाल की पहाड़ियों में हो रही बारिश का पानी राप्ती की धारा को उफान की ओर धकेल रहा है। मंगलवार को सिसईघाट पर नदी का जलस्तर 103.560 मीटर पहुंच गया। चेतावनी बिंदु 103.620 मीटर है। यानी बाढ़ की चेतावनी देने वाले निशान से नदी महज छह सेंटीमीटर नीचे रह गई है। पानी बढ़ने की रफ्तार ने राप्ती के किनारे बसे करीब 150 गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार को जिले में बारिश थमी रही, इसके बाद भी नेपाली नदी से राप्ती का जलस्तर बढ़ रहा है।
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नदी अभी चेतावनी बिंदु से नीचे है, लेकिन ग्रामीणों के लिए छह सेंटीमीटर का यह फासला बेहद अहम है। पहाड़ों में बारिश जारी रही और पानी का दबाव इसी तरह बढ़ता रहा तो राप्ती जल्द चेतावनी बिंदु पार कर सकती है। बीते वर्षों में राप्ती के उफान का असर देख चुके तटवर्ती गांवों में लोग आसमान और नदी दोनों पर नजर लगाए हुए हैं। सदर और उतरौला तहसील क्षेत्र के निचले इलाकों को फिलहाल सबसे अधिक संवेदनशील माना जा रहा है। लालपुर फगुइया, गोसाईं पुरवा, पाठक पुरवा, गुलाम पुरवा, बेलहा, चरनगहिया, रामपुर बौढ़िहार, कुडऊ, घोसियारपुर और वजीरगंज समेत कई गांवों में जलस्तर बढ़ने के साथ खतरा बढ़ सकता है। राप्ती के किनारे बसे गांवों में नदी का बढ़ता पानी सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी पर मंडराता खतरा है। ग्रामीण संतोष ने बताया कि नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है। गांव के लोग नदी की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। प्रमोद के अनुसार पानी बढ़ने की यही रफ्तार बनी रही तो निचले इलाकों में मुश्किल बढ़ सकती है। राजू ने कहा कि अभी ग्रामीण सतर्क हैं और प्रशासन की ओर से जारी होने वाली सूचनाओं का इंतजार कर रहे हैं। शकील ने बताया कि बाढ़ आने पर सबसे बड़ी परेशानी आवागमन की होती है। खेतों में जाने और जरूरी सामान लाने-ले जाने तक में दिक्कत होने लगती है। रमेश का कहना है कि संवेदनशील गांवों में बाढ़ आने का इंतजार करने के बजाय पहले से जरूरी इंतजाम होने चाहिए। मोहित ने भी प्रशासन से गांवों में निगरानी बढ़ाने की मांग की।
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पहले भी राप्ती दिखा चुकी है रौद्र रूप



राप्ती के उफान का खतरा नया नहीं है। पिछले वर्षों में चेतावनी बिंदु पार करने के बाद नदी के पानी ने तटवर्ती गांवों में मुश्किलें बढ़ाई हैं। सितंबर 2025 में भी राप्ती चेतावनी बिंदु से ऊपर पहुंच गई थी और पहाड़ी नालों के उफान ने कई गांवों की स्थिति बिगाड़ दी थी। उस दौरान प्रशासन को बाढ़ राहत केंद्र और चौकियां सक्रिय करनी पड़ी थीं। यही पुराना अनुभव इस बार ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रहा है। फिलहाल स्थिति चेतावनी बिंदु से नीचे है, लेकिन नदी का तेजी से बढ़ता जलस्तर प्रशासन और ग्रामीणों दोनों के लिए सतर्क रहने का संकेत है।
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19 बाढ़ शरणालय और 32 चौकियां तैयार



जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने बताया कि जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। राजस्व, सिंचाई, स्वास्थ्य, पशुपालन और पंचायती राज समेत सभी संबंधित विभागों को नदी के जलस्तर और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए जिले में 19 बाढ़ शरणालय और 32 बाढ़ चौकियां तैयार की गई हैं। स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति के लिए 32 मेडिकल टीमें और पशुधन की सुरक्षा व उपचार के लिए 32 पशु चिकित्सा टीमें तैयार रखी गई हैं। प्रशासन की नजर खासतौर पर नदी किनारे और निचले इलाकों पर है।




बीमारी और सर्पदंश से निपटने की भी तैयारी



-- बाढ़ के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों में सर्पदंश और कुत्ते के काटने की घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने बताया कि जिला अस्पताल समेत जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सर्पदंश और कुत्ते के काटने के जरूरी इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। आपात स्थिति में तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

फोटो-6-बलरामपुर में राप्ती नदी के सिसई घाट पर बढ़ रहा जलस्तर ।-संवाद

फोटो-6-बलरामपुर में राप्ती नदी के सिसई घाट पर बढ़ रहा जलस्तर ।-संवाद

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