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Balrampur News: दो गांव के पास पहुंची राप्ती, कटान तेज
Sun, 09 Aug 2026 10:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 09 Aug 2026 10:45 PM IST
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फोटो-24,25-बलरामपुर के लालनगर बिरदा गांव के पास खेतों में कटान कर रही राप्ती नदी ।-संवाद
उतरौला। क्षेत्र के लालनगर बिरदा और मिलौली बाघाजोत गांव में राप्ती नदी का कटान एक बार फिर तेज हो गया है। नदी गांव के मुहाने पर पहुंच गई है। अब तक 300 बीघे से अधिक कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। खेतों में खड़ी गन्ने की फसल भी कटान के साथ नदी में जा रही है। पहले ही खेत और मकान गंवा चुके परिवारों की चिंता बढ़ गई है। उनके सामने अब रोजी-रोटी और आवास का संकट खड़ा हो गया है। कई परिवार सुरक्षित स्थान पर बसने के लिए अपने मकान खुद तोड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
लालनगर बिरदा निवासी शादाब खान, अंसार, अशफाक खान, अतीक खान, शकीला बानो, तुफैल अहमद, बुधराम, अशोक कुमार, रामकुमार और दशरथ समेत कई ग्रामीणों की जमीन पहले ही नदी में समा चुकी है। शादाब खान का मकान भी कटान की भेंट चढ़ चुका है। वह अब उतरौला में रहने लगे हैं। अशफाक खान का मकान भी कटान की जद में है।
इस बार शांति, पीर मोहम्मद, सीताराम और इतवारी समेत कई किसानों के खेत नदी के निशाने पर हैं। किसानों का कहना है कि गन्ने की फसल तैयार होने के बावजूद जमीन लगातार कट रही है। इससे फसल के साथ उनकी मेहनत और आय का सहारा भी नदी में समा रहा है।
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पिछले साल के बांस कैरेट अब भी पड़े
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष कटान रोकने के लिए बांस के कैरेट और मिट्टी डालकर अस्थायी बचाव कार्य कराया गया था। पिछले साल लगाए गए बांस के कैरेट अब भी मौके पर पड़े हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस बार कटान शुरू होने के बावजूद प्रशासनिक कर्मचारी स्थिति का जायजा लेने तक नहीं पहुंचे। प्रभावी बचाव कार्य नहीं होने से लोगों में भय बढ़ता जा रहा है।
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लालनगर बिरदा निवासी शादाब खान, अंसार, अशफाक खान, अतीक खान, शकीला बानो, तुफैल अहमद, बुधराम, अशोक कुमार, रामकुमार और दशरथ समेत कई ग्रामीणों की जमीन पहले ही नदी में समा चुकी है। शादाब खान का मकान भी कटान की भेंट चढ़ चुका है। वह अब उतरौला में रहने लगे हैं। अशफाक खान का मकान भी कटान की जद में है।
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इस बार शांति, पीर मोहम्मद, सीताराम और इतवारी समेत कई किसानों के खेत नदी के निशाने पर हैं। किसानों का कहना है कि गन्ने की फसल तैयार होने के बावजूद जमीन लगातार कट रही है। इससे फसल के साथ उनकी मेहनत और आय का सहारा भी नदी में समा रहा है।
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पिछले साल के बांस कैरेट अब भी पड़े
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष कटान रोकने के लिए बांस के कैरेट और मिट्टी डालकर अस्थायी बचाव कार्य कराया गया था। पिछले साल लगाए गए बांस के कैरेट अब भी मौके पर पड़े हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस बार कटान शुरू होने के बावजूद प्रशासनिक कर्मचारी स्थिति का जायजा लेने तक नहीं पहुंचे। प्रभावी बचाव कार्य नहीं होने से लोगों में भय बढ़ता जा रहा है।

फोटो-24,25-बलरामपुर के लालनगर बिरदा गांव के पास खेतों में कटान कर रही राप्ती नदी ।-संवाद