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नेपाल के पानी का दिखा असर, राप्ती लाल निशान पार
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बलरामपुर। बीते कई दिनों से भारी बारिश व नेपाल से छोड़े गए पानी का जिले में असर दिखना शुरू हो गया है। राप्ती नदी खतरे के निशान को पार कर गई है। पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी बढ़ रहा है। तटवर्ती इलाकों में बाढ़ की तबाही से लोगों को बचाने के लिए प्रशासन की तरफ से प्रयास शुरू कर दिए गए है। पहाड़ी नालों के बाढ़ से 40 से अधिक गांवों में तबाही का मंजर दिख रहा है।
पहाड़ी नाले के बाढ़ में कहीं घर गिर गए तो कहीं सड़क धंस गई है। दूसरे दिन शनिवार को भी पहाड़ी नालों के बाढ़ से आवागमन बहाल नहीं हो सका है। खरझार पहाड़ी नाले के तेज बहाव ने धारा ही बदल दी है। बाढ़ पीड़ितों के लिए नावों आदि का इंतजाम न होने पर डीएम ने संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी है।
बीते कई दिनों से जिले में भारी बारिश हो रही है। उधर नेपाल से भी पानी छोड़ा गया है। जिसका असर अब जिले में दिखना शुरू हो गया है। सिसई घाट पुल के स्किल वर्क असिस्टेंट मेराज ने बताया कि शनिवार की शाम चार बजे तक राप्ती नदी का जलस्तर 104.770 मीटर हो गया है जो खतरे के निशान 104.620 मीटर की तुलना में 15 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। राप्ती नदी का जलस्तर करीब पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
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उधर मौसम विभाग ने भी 12 जुलाई तक भारी बारिश की संभावना जताई है। बरसात व नेपाल से छोड़े गए पानी के चलते राप्ती नदी में भारी बाढ़ आने की संभावना जताई जा रही है। तटवर्ती इलाकों के बसे 150 गांवों में राप्ती नदी के बाढ़ का कहर टूट सकता है।
सदर व उतरौला तहसीलों के तटवर्ती गांव चौकाकला, लालपुर फगुईया, गोसाईपुरवा, पाठकपुरवा, गुलामपुरवा, रामपुर, कुडऊ, घोसियार, बेलहा, लालाजोत, रामनगर, गौरा, महादेव, सहदेईया, चरनगहिया, रसूलाबाद, दुल्हापुर, बल्लीपुर, डकही सहित 150 गांवों में बाढ़ का पानी भरने से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। दोनों तहसीलों के लोगों ने शासन प्रशासन से बाढ़ से बचाने का इंतजाम कराने की मांग की है। प्रशासन की तरफ से जिले में 36 बाढ़ चौकियों का संचालन शुरू कराने का दावा किया जा रहा है। जहां से बाढ़ पीड़ितों को मदद पहुंचाई जाएगी।
कोविड-19 के साथ साथ बाढ़ से भी प्रशासन को निपटने के लिए चुनौती है। उधर जिले के 17 पहाड़ी नालों ने भी बाढ़ से क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है। पहाड़ी नालों का जलस्तर तो घटा है लेकिन लोगों की दुश्वारियां अभी तक कम नहीं हुई है। महराजगंज तराई संवादसूत्र के अनुसार खरझार पहाड़ी नाले के तेज बहाव में धारा बदल गई है। रामगढ़ मैटहवा व शांतिनगर गांव के बीच से खरझार पहाड़ी नाले का पानी बहना शुरू हो गया है जिससे दोनों गांवों पर तबाही का खतरा मंडराने लगा है।
दोनों गांवों के लोगों ने शासन प्रशासन से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। मदद में देरी होने पर यहां के लोगों को भारी संकटों का सामना कराना पड़ सकता है। क्षेत्र के कुछ मार्गों पर आवागमन बहाल हो गया है लेकिन अभी भी कई मार्ग बाढ़ के पानी से डूबे है। महराजगंज से ललिया मार्ग पर अभी भी आवागमन ठप है। हरैया सतघरवा संवादसूत्र के अनुसार हरैया सतघरवा ब्लॉक के केरवनिया गांव के मजरा झांगीडीह के चकिया नाले के बाढ़ से संजय कुमार का घर बह गया। गृहस्थी का सारा सामान पहाड़ी नाले की बाढ़ में समा गया।
सदर तहसील के तहसीलदार शेख आलमगीर ने बताया कि हल्का लेखपाल को मौके पर भेजा गया है। लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर पीड़ित की तत्काल मदद कराई जाएगी। इसी ब्लॉक के परसपुर धौरीकला मार्ग पहाड़ी नाले के बाढ़ से कट गया है। मार्ग कट जाने से गनेशपुर, धौरीकला व मजगवां सहित 12 से अधिक गांवों के लोगों का संपर्क टूट गया है। करीब 10 हजार लोग प्रभावित हुए है। शिवपुरा रामनगर मार्ग का मुख्य मार्ग से संपर्क कटने से 18 से अधिक गांवों का संपर्क टूट चुका है। यहां 15 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
चौधरीडीह हरैया मार्ग पर धोबेनिया नाला का एप्रोच भी पहाड़ी नाले के बाढ़ में बह गया है। सड़क को बचाने के लिए प्रशासन की तरफ से बोरियां लगाकर इंतजाम किया जा रहा है। देवीपाटन संवादसूत्र के अनुसार तुलसीपुर तहसील के 24 से अधिक गांवों में पहाड़ी नालों के बाढ़ का मंजर है। 24 से अधिक गांवों के चारों तरफ बाढ़ का पानी भरा हुआ है। खेतों में पानी भर जाने से फसलें भी तबाह हुई है। ललिया संवादसूत्र के अनुसार पहाड़ी नाले में आई बाढ़ से कई रास्तों का संपर्क मार्ग टूट चुका है। ललिया कोडरी मार्ग पर लौकहवा गांव के पास सड़क पर आवागमन ठप हो गया है। सिकटिहवा मथुरा मार्ग पर सिकटिहवा पुल बाढ़ के पानी में बह गया है। क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। लौकहवा, वदरभिहया, काशीपुर, बजरडीह व मुरिहवा सहित डेढ़ दर्जन गांवों में बाढ़ का मंजर है और फसलें डूब गई है।
लापरवाही बरतने वालों पर होगी कार्रवाई
जिले में राप्ती का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सभी अफसरों व कर्मियों को राहत व बचाव कार्य का निर्देश दिया गया है। लापरवाही पाए जाने और बाढ़ पीड़ितों के लिए नाव का इंतजाम न होने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एडीएम वित्त एवं राजस्व व जिला आपदा प्रभारी अरुण कुमार शुक्ल को निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बाढ़ प्रभावित तीनों तहसीलों के एसडीएम को नुकसान का आंकलन कराकर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है।
- कृष्णा करुणेश, डीएम
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पहाड़ी नाले के बाढ़ में कहीं घर गिर गए तो कहीं सड़क धंस गई है। दूसरे दिन शनिवार को भी पहाड़ी नालों के बाढ़ से आवागमन बहाल नहीं हो सका है। खरझार पहाड़ी नाले के तेज बहाव ने धारा ही बदल दी है। बाढ़ पीड़ितों के लिए नावों आदि का इंतजाम न होने पर डीएम ने संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी है।
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बीते कई दिनों से जिले में भारी बारिश हो रही है। उधर नेपाल से भी पानी छोड़ा गया है। जिसका असर अब जिले में दिखना शुरू हो गया है। सिसई घाट पुल के स्किल वर्क असिस्टेंट मेराज ने बताया कि शनिवार की शाम चार बजे तक राप्ती नदी का जलस्तर 104.770 मीटर हो गया है जो खतरे के निशान 104.620 मीटर की तुलना में 15 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। राप्ती नदी का जलस्तर करीब पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
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उधर मौसम विभाग ने भी 12 जुलाई तक भारी बारिश की संभावना जताई है। बरसात व नेपाल से छोड़े गए पानी के चलते राप्ती नदी में भारी बाढ़ आने की संभावना जताई जा रही है। तटवर्ती इलाकों के बसे 150 गांवों में राप्ती नदी के बाढ़ का कहर टूट सकता है।
सदर व उतरौला तहसीलों के तटवर्ती गांव चौकाकला, लालपुर फगुईया, गोसाईपुरवा, पाठकपुरवा, गुलामपुरवा, रामपुर, कुडऊ, घोसियार, बेलहा, लालाजोत, रामनगर, गौरा, महादेव, सहदेईया, चरनगहिया, रसूलाबाद, दुल्हापुर, बल्लीपुर, डकही सहित 150 गांवों में बाढ़ का पानी भरने से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। दोनों तहसीलों के लोगों ने शासन प्रशासन से बाढ़ से बचाने का इंतजाम कराने की मांग की है। प्रशासन की तरफ से जिले में 36 बाढ़ चौकियों का संचालन शुरू कराने का दावा किया जा रहा है। जहां से बाढ़ पीड़ितों को मदद पहुंचाई जाएगी।
कोविड-19 के साथ साथ बाढ़ से भी प्रशासन को निपटने के लिए चुनौती है। उधर जिले के 17 पहाड़ी नालों ने भी बाढ़ से क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है। पहाड़ी नालों का जलस्तर तो घटा है लेकिन लोगों की दुश्वारियां अभी तक कम नहीं हुई है। महराजगंज तराई संवादसूत्र के अनुसार खरझार पहाड़ी नाले के तेज बहाव में धारा बदल गई है। रामगढ़ मैटहवा व शांतिनगर गांव के बीच से खरझार पहाड़ी नाले का पानी बहना शुरू हो गया है जिससे दोनों गांवों पर तबाही का खतरा मंडराने लगा है।
दोनों गांवों के लोगों ने शासन प्रशासन से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। मदद में देरी होने पर यहां के लोगों को भारी संकटों का सामना कराना पड़ सकता है। क्षेत्र के कुछ मार्गों पर आवागमन बहाल हो गया है लेकिन अभी भी कई मार्ग बाढ़ के पानी से डूबे है। महराजगंज से ललिया मार्ग पर अभी भी आवागमन ठप है। हरैया सतघरवा संवादसूत्र के अनुसार हरैया सतघरवा ब्लॉक के केरवनिया गांव के मजरा झांगीडीह के चकिया नाले के बाढ़ से संजय कुमार का घर बह गया। गृहस्थी का सारा सामान पहाड़ी नाले की बाढ़ में समा गया।
सदर तहसील के तहसीलदार शेख आलमगीर ने बताया कि हल्का लेखपाल को मौके पर भेजा गया है। लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर पीड़ित की तत्काल मदद कराई जाएगी। इसी ब्लॉक के परसपुर धौरीकला मार्ग पहाड़ी नाले के बाढ़ से कट गया है। मार्ग कट जाने से गनेशपुर, धौरीकला व मजगवां सहित 12 से अधिक गांवों के लोगों का संपर्क टूट गया है। करीब 10 हजार लोग प्रभावित हुए है। शिवपुरा रामनगर मार्ग का मुख्य मार्ग से संपर्क कटने से 18 से अधिक गांवों का संपर्क टूट चुका है। यहां 15 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
चौधरीडीह हरैया मार्ग पर धोबेनिया नाला का एप्रोच भी पहाड़ी नाले के बाढ़ में बह गया है। सड़क को बचाने के लिए प्रशासन की तरफ से बोरियां लगाकर इंतजाम किया जा रहा है। देवीपाटन संवादसूत्र के अनुसार तुलसीपुर तहसील के 24 से अधिक गांवों में पहाड़ी नालों के बाढ़ का मंजर है। 24 से अधिक गांवों के चारों तरफ बाढ़ का पानी भरा हुआ है। खेतों में पानी भर जाने से फसलें भी तबाह हुई है। ललिया संवादसूत्र के अनुसार पहाड़ी नाले में आई बाढ़ से कई रास्तों का संपर्क मार्ग टूट चुका है। ललिया कोडरी मार्ग पर लौकहवा गांव के पास सड़क पर आवागमन ठप हो गया है। सिकटिहवा मथुरा मार्ग पर सिकटिहवा पुल बाढ़ के पानी में बह गया है। क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। लौकहवा, वदरभिहया, काशीपुर, बजरडीह व मुरिहवा सहित डेढ़ दर्जन गांवों में बाढ़ का मंजर है और फसलें डूब गई है।
लापरवाही बरतने वालों पर होगी कार्रवाई
जिले में राप्ती का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सभी अफसरों व कर्मियों को राहत व बचाव कार्य का निर्देश दिया गया है। लापरवाही पाए जाने और बाढ़ पीड़ितों के लिए नाव का इंतजाम न होने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एडीएम वित्त एवं राजस्व व जिला आपदा प्रभारी अरुण कुमार शुक्ल को निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बाढ़ प्रभावित तीनों तहसीलों के एसडीएम को नुकसान का आंकलन कराकर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है।
- कृष्णा करुणेश, डीएम