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राप्ती लाल निशान पार, बाढ़ के पानी से घिरे सौ गांव
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बलरामपुर के गौरा चौराहा क्षेत्र में बाढ़ के पानी से होकर गुजरते लोग।-संवाद
- फोटो : BALRAMPUR
बलरामपुर। बारिश थमने के बावजूद राप्ती का उफान अभी नहीं थम रहा है। नदी खतरे के निशान से 21 सेमी ऊपर पहुंच गई है। करीब सौ गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। कई मार्गों पर बाढ़ का पानी आने से आवागमन बाधित हो गया है। नदी का जलस्तर दो घंटे प्रति सेमी. की रफ्तार से बढ़ रहा है। प्रशासन ने राहत व बचाव कार्य तेज कर दिया है। सभी बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं।
विदित हो कि नेपाल में हो रही बारिश के कारण राप्ती नदी ने इस वर्ष पहली बार खतरे के निशान को पार कर लिया है। सोमवार शाम चार बजे नदी का जलस्तर खतरे के निशान 104.620 मीटर से 21 सेमी ऊपर 104.830 मीटर पर पहुंच गया। नदी का जलस्तर बढ़ने से गौरा चौराहा-तुलसीपुर, हरिहरगंज-ललिया तथा कोड़री से मथुरा बाजार सहित अन्य ग्रामीण मार्गों पर बाढ़ का पानी भर जाने से आवागमन बाधित हो गया है। बाढ़ के कारण सदर तहसील क्षेत्र के टेढ़वा, लालपुर, फगुइया, लौकहवा, वोदरहिया, बनघुसरी सहित करीब 15 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं।
तुलसीपुर तहसील के बनकटवा, विजईडीह, साखीरेत, किठुरा, अमरहवा, पटोहाकोट, बेला, सहबीनिया, लहेरी, जगरामपुरवा, रामस्वरूप पुरवा, सुगानगर व चंदनजोत सहित 20 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। गौरा चौराहा थाना क्षेत्र के बेलहसा, हरनहवा, सुस्ता, बेनीनगर, धोबहा, त्रिलोकपुर, थरूआ, थरूनिया, कोल्हुईया, जंबूदीप व अंबरनगर आदि गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। कई मार्गों पर आवागमन ठप है। उतरौला तहसील में फत्तेपुर, रुस्तमनगर, बभनपुरवा, कटरा, मझारी बाछिल, अमारेभरिया, बरायल सहित करीब 30 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। पूरे जिले में बाढ़ के चलते करीब 100 गांवों की करीब 50 हजार आबादी प्रभावित है। कई स्कूलों तथा पंचायत भवनों में भी पानी भर जाने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मवेशियों के समक्ष चारे का संकट
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बाढ़ से घिरे गांवों में पशुपालकों को मवेशियों के चारे-पानी का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ के पानी में सैकड़ों हेक्टेअर फसल के साथ-साथ हरे चारे की फसल भी डूब गई है। पशुपालकों को दूर से पशुओं के लिए हरा चारा बाढ़ के पानी से गुजरकर लेकर आना पड़ रहा है।
बाढ़ चौकियां सक्रिय
राप्ती नदी में आई बाढ़ को देखते हुए सभी बाढ़ राहत चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। राहत व बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। सभी एसडीएम अपने अपने तहसील में कड़ी निगरानी कर रहे हैं। -राम अभिलाष, एडीएम/आपदा अधिकारी बलरामपुर
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विदित हो कि नेपाल में हो रही बारिश के कारण राप्ती नदी ने इस वर्ष पहली बार खतरे के निशान को पार कर लिया है। सोमवार शाम चार बजे नदी का जलस्तर खतरे के निशान 104.620 मीटर से 21 सेमी ऊपर 104.830 मीटर पर पहुंच गया। नदी का जलस्तर बढ़ने से गौरा चौराहा-तुलसीपुर, हरिहरगंज-ललिया तथा कोड़री से मथुरा बाजार सहित अन्य ग्रामीण मार्गों पर बाढ़ का पानी भर जाने से आवागमन बाधित हो गया है। बाढ़ के कारण सदर तहसील क्षेत्र के टेढ़वा, लालपुर, फगुइया, लौकहवा, वोदरहिया, बनघुसरी सहित करीब 15 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं।
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तुलसीपुर तहसील के बनकटवा, विजईडीह, साखीरेत, किठुरा, अमरहवा, पटोहाकोट, बेला, सहबीनिया, लहेरी, जगरामपुरवा, रामस्वरूप पुरवा, सुगानगर व चंदनजोत सहित 20 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। गौरा चौराहा थाना क्षेत्र के बेलहसा, हरनहवा, सुस्ता, बेनीनगर, धोबहा, त्रिलोकपुर, थरूआ, थरूनिया, कोल्हुईया, जंबूदीप व अंबरनगर आदि गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। कई मार्गों पर आवागमन ठप है। उतरौला तहसील में फत्तेपुर, रुस्तमनगर, बभनपुरवा, कटरा, मझारी बाछिल, अमारेभरिया, बरायल सहित करीब 30 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। पूरे जिले में बाढ़ के चलते करीब 100 गांवों की करीब 50 हजार आबादी प्रभावित है। कई स्कूलों तथा पंचायत भवनों में भी पानी भर जाने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मवेशियों के समक्ष चारे का संकट
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बाढ़ से घिरे गांवों में पशुपालकों को मवेशियों के चारे-पानी का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ के पानी में सैकड़ों हेक्टेअर फसल के साथ-साथ हरे चारे की फसल भी डूब गई है। पशुपालकों को दूर से पशुओं के लिए हरा चारा बाढ़ के पानी से गुजरकर लेकर आना पड़ रहा है।
बाढ़ चौकियां सक्रिय
राप्ती नदी में आई बाढ़ को देखते हुए सभी बाढ़ राहत चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। राहत व बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। सभी एसडीएम अपने अपने तहसील में कड़ी निगरानी कर रहे हैं। -राम अभिलाष, एडीएम/आपदा अधिकारी बलरामपुर