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राप्ती ने तोड़े बाढ़ के रिकॉर्ड
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बलरामपुर। नेपाल से आए पानी के कारण इस साल राप्ती नदी ने बाढ़ के सभी पुराने रिकार्ड ध्वस्त कर दिए। पहली बार अक्तूबर माह में आई बाढ़ ने हाहाकार मचा दिया है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान 104.620 मीटर से 105 सेंटीमीटर ऊपर 105.720 मीटर पर पहुंच गया है। इसमें तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोत्तरी हो रही है।
राप्ती नदी का सर्वाधिक जलस्तर इससे पहले वर्ष 2017 में 105.540 मीटर व वर्ष 2014 में 105.510 मीटर दर्ज किया गया था। 2017 में बाढ़ ने नगर में भारी तबाही मचाई थी। करीब चार दिन तक नगर की बिजली गुल थी। जिले में प्रत्येक वर्ष 10 से 20 अगस्त के बीच बाढ़ की आशंका जताई जाती है। मगर इस बार अक्तूबर माह में आई बाढ़ ने लोगों को चौका दिया है।
राप्ती की बाढ़ के चलते जिले की तीनों तहसीलों की करीब 70 हजार हेक्टेअर धान व गन्ने आदि की फसल तबाह हो गई है। बाढ़ में बहकर आई रेत फसलों पर जमा हो गई है। किसानों का कहना है कि सूखे से बची फसल अब बाढ़ की भेंट चढ़ गई। परिवार के समक्ष रोटी का संकट उत्पन्न हो सकता है।
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किसान कृष्ण गोपाल सिंह, अशफाक, फारूख, इलियास, शिवकुमार, रामतेज यादव, अशोक मिश्र ने बताया कि बाढ़ के कारण तैयार फसल बर्बाद हो गई है। इन लोगों ने डीएम से क्षतिग्रस्त फसलों का आंकलन कराकर यथोचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
जिले की तीनों तहसीलों के करीब 405 परिषदीय विद्यालयों में बाढ़ का पानी भर गया है। इससे इन स्कूलों में पठन-पाठन ठप हो गया है। आशंका जताई जा रही है कि आगामी दिनों में और स्कूल बाढ़ की जद में आ सकते हैं। जिला प्रशासन ने शनिवार को कक्षा एक से 12 तक के स्कूल बंद करा दिए थे। रविवार को अवकाश है। एडीएम राम अभिलाष ने बताया कि रविवार शाम बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सोमवार को स्कूलों के बंद रखने या खोलने पर निर्णय लिया जाएगा।
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राप्ती नदी का सर्वाधिक जलस्तर इससे पहले वर्ष 2017 में 105.540 मीटर व वर्ष 2014 में 105.510 मीटर दर्ज किया गया था। 2017 में बाढ़ ने नगर में भारी तबाही मचाई थी। करीब चार दिन तक नगर की बिजली गुल थी। जिले में प्रत्येक वर्ष 10 से 20 अगस्त के बीच बाढ़ की आशंका जताई जाती है। मगर इस बार अक्तूबर माह में आई बाढ़ ने लोगों को चौका दिया है।
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राप्ती की बाढ़ के चलते जिले की तीनों तहसीलों की करीब 70 हजार हेक्टेअर धान व गन्ने आदि की फसल तबाह हो गई है। बाढ़ में बहकर आई रेत फसलों पर जमा हो गई है। किसानों का कहना है कि सूखे से बची फसल अब बाढ़ की भेंट चढ़ गई। परिवार के समक्ष रोटी का संकट उत्पन्न हो सकता है।
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किसान कृष्ण गोपाल सिंह, अशफाक, फारूख, इलियास, शिवकुमार, रामतेज यादव, अशोक मिश्र ने बताया कि बाढ़ के कारण तैयार फसल बर्बाद हो गई है। इन लोगों ने डीएम से क्षतिग्रस्त फसलों का आंकलन कराकर यथोचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
जिले की तीनों तहसीलों के करीब 405 परिषदीय विद्यालयों में बाढ़ का पानी भर गया है। इससे इन स्कूलों में पठन-पाठन ठप हो गया है। आशंका जताई जा रही है कि आगामी दिनों में और स्कूल बाढ़ की जद में आ सकते हैं। जिला प्रशासन ने शनिवार को कक्षा एक से 12 तक के स्कूल बंद करा दिए थे। रविवार को अवकाश है। एडीएम राम अभिलाष ने बताया कि रविवार शाम बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सोमवार को स्कूलों के बंद रखने या खोलने पर निर्णय लिया जाएगा।