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Balrampur News: दुष्कर्मी को 14 साल की सजा
Mon, 17 Apr 2023 11:25 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Mon, 17 Apr 2023 11:25 PM IST
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बलरामपुर। जिला सत्र न्यायाधीश लल्लू सिंह ने दुष्कर्म के एक आरोपी को दोषी करार देते हुए 14 साल की सजा सुनाई है। जिला जज ने उस पर ढाई लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड में से एक लाख रुपये पीड़िता को दिए जाएंगे।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी कुलदीप सिंह ने बताया कि नगर कोतवाली क्षेत्र की निवासी महिला ने तहरीर दी थी, जिसमें कहा था कि 29 नवंबर 2018 को मेरी लड़की शौच के लिए गई थी। रास्ते में बैठे गांव के ही जगतराम यादव ने लड़की के साथ दुष्कर्म किया। कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज न होने पर पीड़िता ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर जगतराम व उनके तीन सहयोगियों के खिलाफ नगर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने विवेचना के बाद जगतराम के खिलाफ दुष्कर्म तथा अमरपाल, परशुराम व मझिला के खिलाफ गाली-गलौज एवं जान से मारने की धमकी देने का प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने सात गवाहों को न्यायालय में पेश किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद जिलाजज ने जगतराम को दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए 14 वर्ष की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने साक्ष्यों के अभाव में अमरपाल, परशुराम व मझिला को दोष मुक्त कर दिया।
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जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी कुलदीप सिंह ने बताया कि नगर कोतवाली क्षेत्र की निवासी महिला ने तहरीर दी थी, जिसमें कहा था कि 29 नवंबर 2018 को मेरी लड़की शौच के लिए गई थी। रास्ते में बैठे गांव के ही जगतराम यादव ने लड़की के साथ दुष्कर्म किया। कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज न होने पर पीड़िता ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर जगतराम व उनके तीन सहयोगियों के खिलाफ नगर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने विवेचना के बाद जगतराम के खिलाफ दुष्कर्म तथा अमरपाल, परशुराम व मझिला के खिलाफ गाली-गलौज एवं जान से मारने की धमकी देने का प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
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सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने सात गवाहों को न्यायालय में पेश किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद जिलाजज ने जगतराम को दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए 14 वर्ष की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने साक्ष्यों के अभाव में अमरपाल, परशुराम व मझिला को दोष मुक्त कर दिया।
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