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बाढ़ के बीच बारिश ने बिगाड़े हालात

Tue, 11 Oct 2022 10:51 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 11 Oct 2022 10:51 PM IST
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Rain spoiled the situation amid floods
बलरामपुर। चार दिन में बाढ़ ने जिले में ऐसी त्रासदी मचाई कि चारों तरफ बर्बादी का ही मंजर दिख रहा है। इसी बीच मंगलवार को दिनभर हुई तेज बारिश से हालात बिगड़ गए हैं। वहीं, बाढ़ में फंसे लोग भोजन, पानी तथा इलाज न मिलने से बेहाल हैं। जान जोखिम में डालकर लोग घरों से निकलकर सुरक्षित स्थान पर जा रहे हैं। शहर में भी गोंडा-गोरखपुर रेल लाइन का ट्रैक बाढ़ के तेज बहाव से धंस गया। रेलकर्मी ट्रैक बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। सरकारी दफ्तरों में भी बाढ़ का पानी भरा है। जनपद न्यायालय में भी पानी भरा है। मंगलवार को जिला जज बाढ़ के पानी में उतरकर हालात का जायजा लिया।
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राप्ती नदी के जलस्तर में बीते 20 घंटे के दौरान मात्र 11 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई है। मंगलवार सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक नदी का जलस्तर खतरे के निशान 104.620 मीटर से 134 सेंटीमीटर ऊपर 105.960 मीटर पर स्थिर रहा। वहीं, मंगलवार को भी दिनभर तेज बारिश हुई। ऐसे में छत तथा सड़कों पर शरण लिए बाढ़ पीड़ितों की मुसीबत बढ़ गई। भीगने के कारण लोग सर्दी, जुकाम व बुखार की चपेट में आ रहे हैं।
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बाढ़ पीड़ित अली हसन, राजू, ननके, मेहताब, मीरा देवी, सिमरन, सुनीता आदि ने बताया कि बाढ़ के बीच बारिश होने से जिंदगी आफत में पड़ गई है। छत पर सिर ढकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। बारिश से भीगकर बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। दवा लेने के लिए जाने का कोई रास्ता नहीं है। ऐसे में हमें ये नहीं सूझ रहा कि क्या करें।
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शहर के बीच से बहने वाले सुआंव पहाड़ी नाले में मंगलवार सुबह अचानक तेज उफान आ गया। इससे सिविल लाइंस, नौशहरा, निबकौनी, अंधियारी बाग, गोविंदबाग, चौक सहित तमाम मोहल्ले बाढ़ की चपेट में आ गए। पानी का बहाव इतना तेज था कि सिविल लाइंस में कई घरों का गृहस्थी का काफी सामान बह गया।
तेज बहाव में किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। ऐसे में लोगों ने घर की ऊपरी मंजिल या अन्य सुरक्षित स्थान पर जाकर जान बचाई। सिविल लाइंस में सड़क पर खड़े दोपहिया वाहन बहते नजर आए। कई लोगों को तो पानी के तेज बहाव में अपनी कार छोड़कर भागना पड़ा। सुआंव नाले की बाढ़ से सबसे ज्यादा पीड़ित खमौहा गांव के लोग हुए। इन लोगों को मोटरबोट से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
सिविल लाइंस में बाढ़ के चलते बीएसए दफ्तर के निकट गोंडा-गोरखपुर रेल ट्रैक पानी के तेज बहाव में अचानक धंसने लगा। आरपीएफ जवान व रेलकर्मी ट्रैक को बचाने की जद्दोजहद में जुटे रहे। विदित हो कि सोमवार को गैंजहवा और कौवापुर रेलवे स्टेशन के बीच पुल संख्या 149 के निकट रेल ट्रैक पर पानी आ जाने से ट्रेनों का आवागमन पहले ही बंद किया जा चुका है।
बलरामपुर स्टेशन अधीक्षक पुरुषोत्तम सोमवंशी ने बताया कि गोंडा-गोरखपुर रेल लाइन पर ट्रेनों का आवागमन अग्रिम आदेश तक बंद कर दिया गया है। ट्रैक की मरम्मत के बाद ट्रेनों का संचालन शुरू होगा। राप्ती की बाढ़ के चलते कोड़री घाट पुल तथा सिंगारजोत घाट पुल का एप्रोच पानी के तेज बहाव से कट गया। इससे दोनों पुलों पर आवागमन बाधित हो गया है। तुलसीपुर विधायक कैलाश नाथ शुक्ल ने कोड़री घाट तथा उतरौला विधायक राम प्रताप वर्मा ने सिंगारजोत घाट पुल का निरीक्षण किया। दोनों विधायकों ने लोक निर्माण विभाग से पुल के एप्रोच की मरम्मत कराने के साथ ही कटान रोकने के लिए हर संभव उपाय करने को कहा है।
बाढ़ से टापू बने दुर्गापुर गांव में सोमवार रात मनिराम पांडेय (60) तथा केशव चौरसिया (35) की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रदीप मिश्र ने बताया कि सुबह आठ बजे जिला प्रशासन तथा सदर विधायक को सूचना दी गई। गांव के चारों तरफ बाढ़ का पानी भरा होने के चलते मृतकों के शव अंतिम संस्कार के लिए राप्ती तट तक नहीं ले जाए जा सके। दोपहर दो बजे तक कोई मदद न मिलने पर परिजनों ने गांव के निकट ही मनिराम व केशव का अंतिम संस्कार कर दिया।
महराजगंज तराई थाना क्षेत्र के लौकहवा गांव निवासी धर्मराज (13) को सोमवार रात सोते समय जहरीले जंतु ने काट लिया। धर्मराज के पिता नंदराम ने बताया कि गांव के चारों तरफ बाढ़ का पानी होने के कारण वह बेटे को किसी डॉक्टर के पास या अस्पताल नहीं पहुंचा सके। इलाज के अभाव में धर्मराज की मौत हो गई।
गैसड़ी से जैतापुर जाने वाले मार्ग पर बखरकोटवा गांव के पास भांभर पहाड़ी नाले की तेज बाढ़ में सड़क कटकर बह गई। करीब 20 फीट सड़क बाढ़ के पानी में समा गई। इससे इस मार्ग पर वाहनों का आवागमन बंद हो गया है।

जनपद न्यायालय परिसर में भी बाढ़ का पानी भरा है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश लल्लू सिंह ने मंगलवार को परिसर में भरे बाढ़ के पानी में उतरकर हालात का जायजा लिया। कलेक्ट्रेट, विकास भवन, सदर तहसील, एसपी ऑफिस व सदर ब्लॉक समेत अन्य सरकारी कार्यालयों में भी बाढ़ का पानी भरा है।
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