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Balrampur News: अब छह बार होगी गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच
Sun, 17 May 2026 11:00 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 17 May 2026 11:00 PM IST
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फोटो-1-बलरामपुर के जिला महिला अस्पताल में जुटी महिलाओं की भीड़ ।-संवाद
बलरामपुर। जच्चा-बच्चा की सुरक्षा व मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से नई पहल शुरू की गई है। अब सभी गर्भवती महिलाओं की प्रसव से पूर्व कम से कम छह बार जांच (एएनसी) अनिवार्य रूप से की जाएगी। गर्भवती की प्रसव पूर्व जांच कराने व योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए सभी चिकित्साधिकारी व अधीक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके लिए ग्राम पंचायतों में जागरूकता शिविर भी लगाए जाएंगे।
जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए गर्भावस्था के दौरान गुणवत्तापूर्ण एएनसी जांच बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। अब तक गर्भवती महिला के लिए कम से कम चार एएनसी जांचों का प्रावधान था। इसके लिए ग्राम पंचायतों में विशेष लगाए जाते हैं। प्रसव के दौरान आने वाली जटिलताओं को कम करने के लिए अब शासन स्तर से छह प्रसव पूर्व जांच कराने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए समय निर्धारित भी किया गया है।
यह होगी प्रक्रिया
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से गर्भावस्था की जानकारी मिलने पर प्रथम तिमाही में महिला के पंजीकरण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जाएगा। पंजीकरण के समय मातृ-शिशु सुरक्षा (एमसीपी) कार्ड जारी किया जाएगा, जिसमें प्रसव पूर्व देखभाल से संबंधित सभी जांचों का विवरण दर्ज होगा। विभाग ने एएनसी जांच की समयसीमा भी तय की है। पहली जांच 12 सप्ताह तक, दूसरी जांच 16 से 20 सप्ताह, तीसरी 24 से 28 सप्ताह, चौथी 28 से 32 सप्ताह, पांचवीं 32 से 36 सप्ताह और छठी 36 से 40 सप्ताह के बीच कराई जाएगी। जांच के दौरान गर्भवती के हीमोग्लोबिन, शुगर व ब्लड प्रेशर लेवल के साथ वजन में वृद्धि भी देखा जाएगा। ताकि गर्भस्थ शिशु के विकास का अनुमान लगाया जा सके।
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सीएचसी अधीक्षकों को दी गई जिम्मेदारी
एसीएमओ डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में करीब एक लाख गर्भवती महिलाएं चिह्नित हैं। इनमें से जिनकी प्रसव तिथि 31 जुलाई से पूर्व है, उन सभी की अब छह एएनसी जांचें प्राथमिकता के आधार पर पूरी कराई जाएंगी। इसके लिए सभी सीएचसी अधीक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए गर्भावस्था के दौरान गुणवत्तापूर्ण एएनसी जांच बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। अब तक गर्भवती महिला के लिए कम से कम चार एएनसी जांचों का प्रावधान था। इसके लिए ग्राम पंचायतों में विशेष लगाए जाते हैं। प्रसव के दौरान आने वाली जटिलताओं को कम करने के लिए अब शासन स्तर से छह प्रसव पूर्व जांच कराने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए समय निर्धारित भी किया गया है।
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यह होगी प्रक्रिया
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से गर्भावस्था की जानकारी मिलने पर प्रथम तिमाही में महिला के पंजीकरण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जाएगा। पंजीकरण के समय मातृ-शिशु सुरक्षा (एमसीपी) कार्ड जारी किया जाएगा, जिसमें प्रसव पूर्व देखभाल से संबंधित सभी जांचों का विवरण दर्ज होगा। विभाग ने एएनसी जांच की समयसीमा भी तय की है। पहली जांच 12 सप्ताह तक, दूसरी जांच 16 से 20 सप्ताह, तीसरी 24 से 28 सप्ताह, चौथी 28 से 32 सप्ताह, पांचवीं 32 से 36 सप्ताह और छठी 36 से 40 सप्ताह के बीच कराई जाएगी। जांच के दौरान गर्भवती के हीमोग्लोबिन, शुगर व ब्लड प्रेशर लेवल के साथ वजन में वृद्धि भी देखा जाएगा। ताकि गर्भस्थ शिशु के विकास का अनुमान लगाया जा सके।
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सीएचसी अधीक्षकों को दी गई जिम्मेदारी
एसीएमओ डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में करीब एक लाख गर्भवती महिलाएं चिह्नित हैं। इनमें से जिनकी प्रसव तिथि 31 जुलाई से पूर्व है, उन सभी की अब छह एएनसी जांचें प्राथमिकता के आधार पर पूरी कराई जाएंगी। इसके लिए सभी सीएचसी अधीक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।