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Balrampur News: 308 पहियों वाले ट्रेलर को रास्ता देने के लिए 11 घंटे बिजली आपूर्ति रोकी
Fri, 16 Oct 2026 11:01 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Fri, 16 Oct 2026 11:01 PM IST
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फोटो-23-बलरामपुर के उतरौला चौराहे पर मौजूद 308 पहियों वाला ट्रेलर।-संवाद
उतरौला। सड़क पर एक-दो नहीं, बल्कि 308 पहियों वाला विशाल ट्रेलर। उस पर लदी भारी मशीन और उसे खींचने के लिए जुड़ीं 20 विशेष ट्रॉलियां। शुक्रवार को यह नजारा लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गया। बेल्जियम से बलरामपुर चीनी मिल के लिए भारी मशीन लेकर जा रहे इस विशाल हाइड्रोलिक मल्टी-एक्सल ट्रेलर को उतरौला चौराहे से निकालने के लिए पुलिस को यातायात नियंत्रित करना पड़ा। रास्ता साफ करने के लिए बिजली विभाग ने 12 विद्युत पोल हटवाए, जबकि वन विभाग ने सड़क किनारे के तीन पेड़ों की कटाई कराई। ट्रेलर को सुरक्षित निकालने के दौरान सड़क पर लोगों की भीड़ और वाहनों की आवाजाही के बीच यातायात व्यवस्था संभालना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण रहा।
ट्रेलर को रास्ता देने के लिए शुक्रवार सुबह छह बजे से कस्बे की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। शाम पांच बजे आपूर्ति बहाल होने पर लोगों ने राहत की सांस ली। करीब 11 घंटे बिजली गुल रहने से रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित हुए। कस्बे के नसीम ने बताया कि बिजली कटौती से दैनिक कामकाज में परेशानी हुई। शिक्षक राजेंद्र ने कहा कि सुबह पानी की काफी दिक्कत हुई। वहीं, व्यापारी अवधेश ने बताया कि बिजली न होने के कारण जनरेटर चलाना पड़ा। इसके अलावा भी लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा।
बिजली विभाग के जेई रविंद्र कुमार ने बताया कि जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सतर्कता बरती गई। सीओ डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि ट्रेलर को पूरी सुरक्षा के साथ चौराहे से पार करा दिया गया।
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बेल्जियम से समुद्री मार्ग के जरिए पहुंचा पारादीप
विशाल हाइड्रॉलिक मल्टी-एक्सल ट्रेलर को देखने के लिए सड़क किनारे लोगों की भीड़ जुटी रही। ट्रेलर बेल्जियम से रवाना हुआ था। समुद्री मार्ग से इसे ओडिशा के एक बंदरगाह तक लाया गया। इसके बाद सड़क मार्ग से झारखंड और बिहार होते हुए यह उतरौला पहुंचा।
ट्रेलर के साथ चल रहे आरके सिंह ने बताया कि विशाल आकार और भारी वजन के कारण इसकी रफ्तार काफी कम रहती है। इसे एक दिन में महज 10 से 20 किलोमीटर तक ही आगे बढ़ाया जा सकता है। सुरक्षा और संचालन संबंधी कारणों से रात में इसे रोक दिया जाता है। ट्रेलर में 400 लीटर क्षमता का डीजल टैंक भी लगा है। इतने बड़े वाहन को सड़क से गुजारने के दौरान रास्ते की चौड़ाई, बिजली के तारों और पेड़ों जैसी बाधाओं का विशेष ध्यान रखना पड़ता है।
इनसेट
लखीमपुर की कुंभी चीनी मिल में बायोपॉलिमर प्लांट में लगेगा विशाल रिएक्टर
बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड की लखीमपुर खीरी स्थित कुंभी इकाई में स्थापित हो रहे बायोपॉलिमर (बायोप्लास्टिक) प्लांट के लिए बेल्जियम से 200 टन वजनी विशाल औद्योगिक रिएक्टर (बेसल) लाया गया है। समुद्री मार्ग से ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचने के बाद इस उपकरण को विशेष हाइड्रोलिक मल्टी-एक्सल ट्रेलर पर लादकर सड़क मार्ग से कुंभी लाया जा रहा है।
इस प्लांट की उत्पादन क्षमता सालाना 80 हजार टन होगी। करीब 3,080 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रही यह परियोजना चीनी उद्योग में बड़े बदलाव की शुरुआत मानी जा रही है। अभी तक चीनी मिलों में गन्ने से चीनी, शीरा और एथनॉल जैसे उत्पाद तैयार किए जाते रहे हैं। कुंभी में नई इकाई स्थापित होने के बाद गन्ने से प्राप्त कच्चे माल का इस्तेमाल पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) बनाने में भी किया जाएगा। पीएलए एक जैव-आधारित पदार्थ है, जिसका उपयोग पारंपरिक प्लास्टिक के विकल्प के रूप में किया जा सकता है। इससे कप, प्लेट, बोतल, कटलरी, थैले और पैकेजिंग सामग्री जैसे उत्पाद बनाए जा सकते हैं। यह पदार्थ उपयुक्त परिस्थितियों में जैविक रूप से विघटित हो सकता है। मिल के मानव संसाधन प्रबंधक डीके सिंह ने बताया कि कुंभी में बलरामपुर चीनी मिल की पुरानी इकाई पहले से संचालित है, लेकिन बायोपॉलिमर प्लांट एक नई परियोजना है। कंपनी इसे मौजूदा चीनी मिल के बगल में अलग औद्योगिक इकाई के रूप में विकसित कर रही है।
280 करोड़ के बेसल को कुंभी पहुंचाने में खर्च होंगे 25 करोड़ रुपये
बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड की लखीमपुर खीरी स्थित कुंभी इकाई में स्थापित हो रहे बायोपॉलिमर प्लांट के लिए 280 करोड़ रुपये की बेसल मशीन को पहुंचाने में करीब 25 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें से अब तक 11 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। मशीन को ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से 15 मई को विशेष हाइड्रोलिक मल्टी-एक्सल ट्रेलर पर लादकर कुंभी के लिए रवाना किया गया था। झारखंड और बिहार से होते हुए ट्रेलर उत्तर प्रदेश पहुंचा। 14 अक्तूबर को यह सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज क्षेत्र में पहुंच गया था। अब इसे बलरामपुर के रास्ते लखीमपुर खीरी के कुंभी स्थित चीनी मिल तक पहुंचाया जाना है। इसे 25 अक्तूबर से पहले गंतव्य तक पहुंचाने की योजना है। मिल के अधिकारी डीके सिंह ने बताया कि मशीन को पारादीप से झारखंड, बिहार के औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर होते हुए उत्तर प्रदेश लाया गया। इसके बाद चंदौली, वाराणसी, गाजीपुर, मऊ, गोरखपुर, संतकबीरनगर और बस्ती से होते हुए ट्रेलर सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज पहुंचा। अब इसे बलरामपुर के रास्ते कुंभी ले जाया जाएगा।
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ट्रेलर को रास्ता देने के लिए शुक्रवार सुबह छह बजे से कस्बे की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। शाम पांच बजे आपूर्ति बहाल होने पर लोगों ने राहत की सांस ली। करीब 11 घंटे बिजली गुल रहने से रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित हुए। कस्बे के नसीम ने बताया कि बिजली कटौती से दैनिक कामकाज में परेशानी हुई। शिक्षक राजेंद्र ने कहा कि सुबह पानी की काफी दिक्कत हुई। वहीं, व्यापारी अवधेश ने बताया कि बिजली न होने के कारण जनरेटर चलाना पड़ा। इसके अलावा भी लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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बिजली विभाग के जेई रविंद्र कुमार ने बताया कि जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सतर्कता बरती गई। सीओ डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि ट्रेलर को पूरी सुरक्षा के साथ चौराहे से पार करा दिया गया।
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बेल्जियम से समुद्री मार्ग के जरिए पहुंचा पारादीप
विशाल हाइड्रॉलिक मल्टी-एक्सल ट्रेलर को देखने के लिए सड़क किनारे लोगों की भीड़ जुटी रही। ट्रेलर बेल्जियम से रवाना हुआ था। समुद्री मार्ग से इसे ओडिशा के एक बंदरगाह तक लाया गया। इसके बाद सड़क मार्ग से झारखंड और बिहार होते हुए यह उतरौला पहुंचा।
ट्रेलर के साथ चल रहे आरके सिंह ने बताया कि विशाल आकार और भारी वजन के कारण इसकी रफ्तार काफी कम रहती है। इसे एक दिन में महज 10 से 20 किलोमीटर तक ही आगे बढ़ाया जा सकता है। सुरक्षा और संचालन संबंधी कारणों से रात में इसे रोक दिया जाता है। ट्रेलर में 400 लीटर क्षमता का डीजल टैंक भी लगा है। इतने बड़े वाहन को सड़क से गुजारने के दौरान रास्ते की चौड़ाई, बिजली के तारों और पेड़ों जैसी बाधाओं का विशेष ध्यान रखना पड़ता है।
इनसेट
लखीमपुर की कुंभी चीनी मिल में बायोपॉलिमर प्लांट में लगेगा विशाल रिएक्टर
बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड की लखीमपुर खीरी स्थित कुंभी इकाई में स्थापित हो रहे बायोपॉलिमर (बायोप्लास्टिक) प्लांट के लिए बेल्जियम से 200 टन वजनी विशाल औद्योगिक रिएक्टर (बेसल) लाया गया है। समुद्री मार्ग से ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचने के बाद इस उपकरण को विशेष हाइड्रोलिक मल्टी-एक्सल ट्रेलर पर लादकर सड़क मार्ग से कुंभी लाया जा रहा है।
इस प्लांट की उत्पादन क्षमता सालाना 80 हजार टन होगी। करीब 3,080 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रही यह परियोजना चीनी उद्योग में बड़े बदलाव की शुरुआत मानी जा रही है। अभी तक चीनी मिलों में गन्ने से चीनी, शीरा और एथनॉल जैसे उत्पाद तैयार किए जाते रहे हैं। कुंभी में नई इकाई स्थापित होने के बाद गन्ने से प्राप्त कच्चे माल का इस्तेमाल पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) बनाने में भी किया जाएगा। पीएलए एक जैव-आधारित पदार्थ है, जिसका उपयोग पारंपरिक प्लास्टिक के विकल्प के रूप में किया जा सकता है। इससे कप, प्लेट, बोतल, कटलरी, थैले और पैकेजिंग सामग्री जैसे उत्पाद बनाए जा सकते हैं। यह पदार्थ उपयुक्त परिस्थितियों में जैविक रूप से विघटित हो सकता है। मिल के मानव संसाधन प्रबंधक डीके सिंह ने बताया कि कुंभी में बलरामपुर चीनी मिल की पुरानी इकाई पहले से संचालित है, लेकिन बायोपॉलिमर प्लांट एक नई परियोजना है। कंपनी इसे मौजूदा चीनी मिल के बगल में अलग औद्योगिक इकाई के रूप में विकसित कर रही है।
280 करोड़ के बेसल को कुंभी पहुंचाने में खर्च होंगे 25 करोड़ रुपये
बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड की लखीमपुर खीरी स्थित कुंभी इकाई में स्थापित हो रहे बायोपॉलिमर प्लांट के लिए 280 करोड़ रुपये की बेसल मशीन को पहुंचाने में करीब 25 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें से अब तक 11 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। मशीन को ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से 15 मई को विशेष हाइड्रोलिक मल्टी-एक्सल ट्रेलर पर लादकर कुंभी के लिए रवाना किया गया था। झारखंड और बिहार से होते हुए ट्रेलर उत्तर प्रदेश पहुंचा। 14 अक्तूबर को यह सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज क्षेत्र में पहुंच गया था। अब इसे बलरामपुर के रास्ते लखीमपुर खीरी के कुंभी स्थित चीनी मिल तक पहुंचाया जाना है। इसे 25 अक्तूबर से पहले गंतव्य तक पहुंचाने की योजना है। मिल के अधिकारी डीके सिंह ने बताया कि मशीन को पारादीप से झारखंड, बिहार के औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर होते हुए उत्तर प्रदेश लाया गया। इसके बाद चंदौली, वाराणसी, गाजीपुर, मऊ, गोरखपुर, संतकबीरनगर और बस्ती से होते हुए ट्रेलर सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज पहुंचा। अब इसे बलरामपुर के रास्ते कुंभी ले जाया जाएगा।