{"_id":"6a8f2c1ee34416f56506d6dd","slug":"nmc-to-inspect-medical-colleges-in-november-accreditation-to-be-determined-balrampur-news-c-99-1-brp1003-153878-2026-08-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: नवंबर में एनएमसी जांचेगा मेडिकल कॉलेज, तय होगी मान्यता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: नवंबर में एनएमसी जांचेगा मेडिकल कॉलेज, तय होगी मान्यता
Wed, 26 Aug 2026 11:40 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 26 Aug 2026 11:40 PM IST
विज्ञापन
फोटो-32-बलरामपुर में स्थित मेडिकल कॉलेज।-संवाद
बलरामपुर। जिले में बनकर तैयार अटल बिहारी वाजपेयी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के संचालन की असली परीक्षा अब नवंबर में होने की उम्मीद है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) की टीम प्रस्तावित निरीक्षण में कॉलेज की सुविधाओं, शैक्षणिक ढांचे, चिकित्सकीय संसाधनों और जरूरी मानकों की पड़ताल करेगी। निरीक्षण में व्यवस्था संतोषजनक मिलने के बाद ही एमबीबीएस संचालन की मान्यता की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। एनएमसी नए मेडिकल कॉलेजों में मानकों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर अनुमति की प्रक्रिया संचालित करता है।
मेडिकल कॉलेज का भवन तैयार होने के बावजूद अब तक एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है। कॉलेज प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ भवन पूरा करने की नहीं, बल्कि एनएमसी के मानकों के अनुरूप पूरी व्यवस्था खड़ी करने की है। इसी को देखते हुए नवंबर में टीम के संभावित दौरे से पहले जरूरी कमियों को चिह्नित कर उन्हें दूर कराने पर जोर दिया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज को पहले केजीएमयू लखनऊ के सेटेलाइट सेंटर के रूप में विकसित किया गया था। बाद में शासन ने इसे स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में परिवर्तित कर दिया। इसके साथ ही 166 बेड वाले संयुक्त जिला चिकित्सालय को भी चिकित्सा शिक्षा विभाग से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अब कॉलेज के सामने अगला पड़ाव मान्यता है। प्रस्तावित निरीक्षण में केवल इमारत नहीं, बल्कि पढ़ाई और इलाज के लिए जरूरी पूरी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति परखी जाएगी। एनएमसी की मौजूदा व्यवस्था में मेडिकल कॉलेजों के लिए सीटों और मान्यता से संबंधित प्रक्रिया निर्धारित मानकों के आधार पर चलती है। आयोग ने 2026-27 के लिए एमबीबीएस सीटों की सीट मैट्रिक्स भी जारी की है।
50 सीटों से खुलेगा डॉक्टर बनने का रास्ता, 255 करोड़ बजट जरूरी
-- मेडिकल कॉलेज में शुरुआती तौर पर 50 एमबीबीएस सीटों पर पढ़ाई शुरू कराने की योजना है। इसके साथ करीब 20 विभाग विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। सभी विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सक, विभागाध्यक्ष और अन्य जरूरी स्टाफ की व्यवस्था की जानी है। कॉलेज के शुरू होने का इंतजार केवल चिकित्सा शिक्षा से जुड़े युवाओं को ही नहीं है। इससे बलरामपुर के मरीजों को भी विशेषज्ञ उपचार की स्थानीय सुविधा मिलने की उम्मीद है। कॉलेज और संबद्ध अस्पताल व्यवस्था विकसित होने पर गंभीर मरीजों को दूसरे बड़े शहरों की ओर भेजने की जरूरत कम हो सकती है। कॉलेज की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रशासनिक, शैक्षणिक और आवासीय भवनों के निर्माण की योजना है। इन सुविधाओं के लिए करीब 255 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। जमीन चिह्नित करने और आगे की निर्माण प्रक्रिया पर भी काम चल रहा है। यही सुविधाएं कॉलेज को पूरी तरह मानकों के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण होंगी।
विज्ञापन
नवंबर में एनएमसी की टीम मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं और मानकों की पड़ताल के लिए आ सकती है। निरीक्षण के बाद मान्यता की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आवश्यक कमियों को दूर कराने का काम किया जा रहा है।
डॉ. प्रो. राजेश कुमार चतुर्वेदी, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज बलरामपुर
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज का भवन तैयार होने के बावजूद अब तक एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है। कॉलेज प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ भवन पूरा करने की नहीं, बल्कि एनएमसी के मानकों के अनुरूप पूरी व्यवस्था खड़ी करने की है। इसी को देखते हुए नवंबर में टीम के संभावित दौरे से पहले जरूरी कमियों को चिह्नित कर उन्हें दूर कराने पर जोर दिया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज को पहले केजीएमयू लखनऊ के सेटेलाइट सेंटर के रूप में विकसित किया गया था। बाद में शासन ने इसे स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में परिवर्तित कर दिया। इसके साथ ही 166 बेड वाले संयुक्त जिला चिकित्सालय को भी चिकित्सा शिक्षा विभाग से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अब कॉलेज के सामने अगला पड़ाव मान्यता है। प्रस्तावित निरीक्षण में केवल इमारत नहीं, बल्कि पढ़ाई और इलाज के लिए जरूरी पूरी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति परखी जाएगी। एनएमसी की मौजूदा व्यवस्था में मेडिकल कॉलेजों के लिए सीटों और मान्यता से संबंधित प्रक्रिया निर्धारित मानकों के आधार पर चलती है। आयोग ने 2026-27 के लिए एमबीबीएस सीटों की सीट मैट्रिक्स भी जारी की है।
विज्ञापन
50 सीटों से खुलेगा डॉक्टर बनने का रास्ता, 255 करोड़ बजट जरूरी
विज्ञापन
नवंबर में एनएमसी की टीम मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं और मानकों की पड़ताल के लिए आ सकती है। निरीक्षण के बाद मान्यता की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आवश्यक कमियों को दूर कराने का काम किया जा रहा है।
डॉ. प्रो. राजेश कुमार चतुर्वेदी, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज बलरामपुर