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स्वास्थ्य व शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत
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बलरामपुर। स्वास्थ्य व्यवस्था में चिकित्सकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। पीड़ित का दर्द दूर करने व मरीज को स्वस्थ बनाने वाले डॉक्टरों को सरकार की ओर से वह सुविधाएं नहीं मिल पा रही है, जिनका वह हकदार हैं। निजी चिकित्सकों को सरकार की ओर से सुविधाएं मिलनी चाहिए। बुधवार को नगर के जेडएस आर्थोपैडिक, मैटरनिटी हॉस्पिटल एवं ट्रॉमा सेंटर में अमर उजाला की ओर से वोटर अड्डा कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में अभिषेक, मनोज बत्रा, रामजीत व अनुपम तिवारी ने चिकित्सा कर्मियों ने जनप्रतिनिधि व सरकार को लेकर अपनी बात रखी। चिकित्सकों ने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध होने चाहिए। जीवन यापन के लिए चिकित्सकों को पेंशन मिलना चाहिए। इस दौरान चिकित्सकों ने लोकतंत्र की मजबूती के लिए लोगों को मतदान करने के लिए प्रेरित भी किया।
आर्थोपैडिक सर्जन डॉ. आसिफ हुसैन ने कहा कि मतदाताओं को लोकप्रिय सरकार चुनने के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग जरूर करना चाहिए। सरकार ऐसी हो जो जनता को सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं मुहैय्या कराए। चुनाव के समय किये गए वादों को सरकार की तरफ से पूरी ईमानदारी से पूरा किया जाना चाहिए।
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सर्जन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अलमाश ने कहा कि लोकतंत्र में मतदान का विशेष महत्व है। मतदान के जरिए ही नेता व सरकार का चयन किया जाना है। वर्तमान समय में राजनीति के मायने बदल चुके हैं। आज राजनीति को जनसेवा के बजाए सत्ता हासिल करने का माध्यम माना जाता है जो पूरी तरह गलत है। जाति-धर्म के नाम नहीं बल्कि प्रत्याशी के गुणों के आधार पर मतदान करेंगे।
सर्जन डॉ. अख्तर खान ने कहा कि अस्पतालों में गंभीर मरीजों के परिजन आए दिन डाक्टरों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। डॉक्टरों से मारपीट व दुर्व्यवहार न हो, इसके लिए सुरक्षा के विशेष इंतजाम होने चाहिए। हम लोग ऐसी सरकार चुनेंगे जो स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने व चिकित्सकों की समस्याओं का निराकरण करने का भरोसा दिलाए।
सामाजिक कार्यकर्ता आरिफ हुसैन ने कहा कि मतदाताओं को प्रलोभन के बजाए गुणवत्ता के आधार पर वोट करना चाहिए। शिक्षित, ईमानदार एवं कर्मठ व्यक्ति को जनप्रतिनिधि चुनेंगे तो वह जनता के हित के लिए सरकार के समक्ष आवाज बुलंद करेगा। अपराधी छवि के लोगों को राजनीति से दूर रखना चाहिए।
योग चिकित्सक डॉ. अमर जीत ने कहा कि सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक लगनी चाहिए। कोविडकाल में अपने दायित्वों का पूरी ईमानदारी के साथ निर्वहन करने वाले डॉक्टर, अधिकारी व कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। सरकारी संस्थाओं में काम करने वाले संविदा कर्मियों को नियमित किया जाना चाहिए।
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कार्यक्रम में अभिषेक, मनोज बत्रा, रामजीत व अनुपम तिवारी ने चिकित्सा कर्मियों ने जनप्रतिनिधि व सरकार को लेकर अपनी बात रखी। चिकित्सकों ने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध होने चाहिए। जीवन यापन के लिए चिकित्सकों को पेंशन मिलना चाहिए। इस दौरान चिकित्सकों ने लोकतंत्र की मजबूती के लिए लोगों को मतदान करने के लिए प्रेरित भी किया।
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आर्थोपैडिक सर्जन डॉ. आसिफ हुसैन ने कहा कि मतदाताओं को लोकप्रिय सरकार चुनने के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग जरूर करना चाहिए। सरकार ऐसी हो जो जनता को सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं मुहैय्या कराए। चुनाव के समय किये गए वादों को सरकार की तरफ से पूरी ईमानदारी से पूरा किया जाना चाहिए।
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सर्जन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अलमाश ने कहा कि लोकतंत्र में मतदान का विशेष महत्व है। मतदान के जरिए ही नेता व सरकार का चयन किया जाना है। वर्तमान समय में राजनीति के मायने बदल चुके हैं। आज राजनीति को जनसेवा के बजाए सत्ता हासिल करने का माध्यम माना जाता है जो पूरी तरह गलत है। जाति-धर्म के नाम नहीं बल्कि प्रत्याशी के गुणों के आधार पर मतदान करेंगे।
सर्जन डॉ. अख्तर खान ने कहा कि अस्पतालों में गंभीर मरीजों के परिजन आए दिन डाक्टरों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। डॉक्टरों से मारपीट व दुर्व्यवहार न हो, इसके लिए सुरक्षा के विशेष इंतजाम होने चाहिए। हम लोग ऐसी सरकार चुनेंगे जो स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने व चिकित्सकों की समस्याओं का निराकरण करने का भरोसा दिलाए।
सामाजिक कार्यकर्ता आरिफ हुसैन ने कहा कि मतदाताओं को प्रलोभन के बजाए गुणवत्ता के आधार पर वोट करना चाहिए। शिक्षित, ईमानदार एवं कर्मठ व्यक्ति को जनप्रतिनिधि चुनेंगे तो वह जनता के हित के लिए सरकार के समक्ष आवाज बुलंद करेगा। अपराधी छवि के लोगों को राजनीति से दूर रखना चाहिए।
योग चिकित्सक डॉ. अमर जीत ने कहा कि सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक लगनी चाहिए। कोविडकाल में अपने दायित्वों का पूरी ईमानदारी के साथ निर्वहन करने वाले डॉक्टर, अधिकारी व कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। सरकारी संस्थाओं में काम करने वाले संविदा कर्मियों को नियमित किया जाना चाहिए।