{"_id":"63de9b9c4cbba65cc85f569d","slug":"na-balrampur-news-c-13-1-76003-2023-02-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: दवा के नाम पर रोज दो करोड़ की मुनाफाखोरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: दवा के नाम पर रोज दो करोड़ की मुनाफाखोरी
Sat, 04 Feb 2023 11:23 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 04 Feb 2023 11:23 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोंडा। मरीजों को राहत देने के लिए सरकार ने सौ से अधिक जीवनरक्षक दवाओं के दाम घटाने का दावा किया है। मगर मरीजों को कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। उन्हें अब भी प्रिंट रेट पर महंगी दवाएं लेनी पड़ रही हैं। जिले में प्रतिदिन पैरासिटामॉल की लगभग दो लाख गोलियों की खपत है। सिर्फ पैरासिटामाल खरीदने में ही हर रोज मरीजों को दो लाख रुपये अधिक चुकाने पड़ते हैं। पूरे जिले की बात करें तो दवा दुकानदार मरीजों से करीब दो करोड़ रुपये प्रतिदिन अधिक वसूल रहे हैं।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने सौ से अधिक जीवनरक्षक दवाओं का अधिकतम खुदरा मूल्य निर्धारित कर दिया है। हर घर में दर्द की दवा के रूप में उपयोग होने वाली पैरासिटामाल (650 एमजी) की एक टैबलेट की कीमत अधिकतम 1.80 रुपये निर्धारित है। मगर मेडिकल स्टोरों पर 34 रुपये प्रति पत्ता (15 टैबलेट) यानी 2.66 रुपये प्रति टैबलेट बेची जा रही है। जिले में हर रोज तकरीबन दो लाख टैबलेट पैरासिटामाल की खपत है। जिससे मरीजों को करीब दो लाख रुपये अधिक चुकाने पड़ रहे हैं।
इसी तरह संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबायोटिक एमॉक्सिसिलिन और पोटैशियम वाली दवाएं अधिकतम 16.80 रुपये में बेची जानी हैं। जो मेडिकल स्टोरों पर 233 रुपये प्रति दस टैबलेट बेची जा रही है। एंटीबायोटिक दवा माक्सीफ्लोक्सासिन (400 एमजी) की अधिकतम कीमत 22.80 निर्धारित है। जो बाजार में 31.80 रुपये में बिक रही है। इसी तरह कैंसर, शुगर, एंटीबायोटिक, दमा सहित अन्य बीमारियों में उपयोग होने वाली दवाओं की कीमत निर्धारित की गई है। मगर मेडिकल स्टोर संचालक मनमाने रेट पर ये दवाएं बेच रहे हैं।
विज्ञापन
दवाओं की कीमत निर्धारित न होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को जिला अस्पताल के सामने एक मेडिकल स्टोर पर दवा लेने पहुंचे इटियाथोक के शैलेंद्र ने बताया कि एक ही दवा की कीमत अलग-अलग मेडिकल स्टोर पर अलग-अलग वसूल की जाती है। मंगलवार को महिला अस्पताल के सामने एक पत्ता पैरासिटामाल 30 रुपये में मिली थी। आज वही 35 रुपये में खरीदी है। कर्मडीह कला से आए मरीज बब्बन ने कहा सेट्रिजिन टैबलेट की किसी मेडिकल स्टोर पर एक रुपये तो कहीं दो रुपये में मिलती है।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राकेश सिंह का कहना है कि दवा कंपनियां मनमाने ढंग से दवाओं के दाम बढ़ा रही हैं। एक ही प्रकार की दवा की कीमत अलग-अलग प्रिंट होती है। दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर भी रोक है। सरकार के आदेश पर दवा कंपनियों को मूल्य घटाने चाहिए। जिससे मरीजों की जेब न कटे।
औषधि निरीक्षक रजिया बानो का कहना है कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की ओर से फुटकर दवाओं के मूल्य निर्धारित किये गये हैं। मेडिकल स्टोर पर दवाओं के निर्धारित मूल्य से अधिक नहीं वसूला जा सकता है। शिकायत मिलने पर संबधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने सौ से अधिक जीवनरक्षक दवाओं का अधिकतम खुदरा मूल्य निर्धारित कर दिया है। हर घर में दर्द की दवा के रूप में उपयोग होने वाली पैरासिटामाल (650 एमजी) की एक टैबलेट की कीमत अधिकतम 1.80 रुपये निर्धारित है। मगर मेडिकल स्टोरों पर 34 रुपये प्रति पत्ता (15 टैबलेट) यानी 2.66 रुपये प्रति टैबलेट बेची जा रही है। जिले में हर रोज तकरीबन दो लाख टैबलेट पैरासिटामाल की खपत है। जिससे मरीजों को करीब दो लाख रुपये अधिक चुकाने पड़ रहे हैं।
विज्ञापन
इसी तरह संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबायोटिक एमॉक्सिसिलिन और पोटैशियम वाली दवाएं अधिकतम 16.80 रुपये में बेची जानी हैं। जो मेडिकल स्टोरों पर 233 रुपये प्रति दस टैबलेट बेची जा रही है। एंटीबायोटिक दवा माक्सीफ्लोक्सासिन (400 एमजी) की अधिकतम कीमत 22.80 निर्धारित है। जो बाजार में 31.80 रुपये में बिक रही है। इसी तरह कैंसर, शुगर, एंटीबायोटिक, दमा सहित अन्य बीमारियों में उपयोग होने वाली दवाओं की कीमत निर्धारित की गई है। मगर मेडिकल स्टोर संचालक मनमाने रेट पर ये दवाएं बेच रहे हैं।
विज्ञापन
दवाओं की कीमत निर्धारित न होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को जिला अस्पताल के सामने एक मेडिकल स्टोर पर दवा लेने पहुंचे इटियाथोक के शैलेंद्र ने बताया कि एक ही दवा की कीमत अलग-अलग मेडिकल स्टोर पर अलग-अलग वसूल की जाती है। मंगलवार को महिला अस्पताल के सामने एक पत्ता पैरासिटामाल 30 रुपये में मिली थी। आज वही 35 रुपये में खरीदी है। कर्मडीह कला से आए मरीज बब्बन ने कहा सेट्रिजिन टैबलेट की किसी मेडिकल स्टोर पर एक रुपये तो कहीं दो रुपये में मिलती है।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राकेश सिंह का कहना है कि दवा कंपनियां मनमाने ढंग से दवाओं के दाम बढ़ा रही हैं। एक ही प्रकार की दवा की कीमत अलग-अलग प्रिंट होती है। दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर भी रोक है। सरकार के आदेश पर दवा कंपनियों को मूल्य घटाने चाहिए। जिससे मरीजों की जेब न कटे।
औषधि निरीक्षक रजिया बानो का कहना है कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की ओर से फुटकर दवाओं के मूल्य निर्धारित किये गये हैं। मेडिकल स्टोर पर दवाओं के निर्धारित मूल्य से अधिक नहीं वसूला जा सकता है। शिकायत मिलने पर संबधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।