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समय पर जांच व संतुलित खानपान से जच्चा-बच्चा रहेंगे सुरक्षित
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बलरामपुर। गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच व संतुलित खानपान से महिलाओं को बीमारियों से बचाया जा सकता है। सही देखभाल व अस्पताल में प्रसव कराने से जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित रहेंगे। ये बातें सीएमओ डॉ. सुशील कुमार ने शनिवार को सुरक्षित मातृत्व अभियान की जानकारी देते हुए कहीं।
सीएमओ ने कहा कि नेपाल सीमा से सटे इस जिले में मातृ एवं शिशु मृत्युदर अधिक है। इसे नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग निरंतर प्रयासरत है। गर्भवती का सुरक्षित प्रसव कराने के लिए प्रत्येक माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान चलाया जाता है। जिसके तहत अस्पतालों में शिविर लगाकर गर्भवती का पंजीकरण, जांच व उपचार होता है।
महिला अस्पताल में शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे एनएचएम के जिला कार्यक्रम प्रबंधक शिवेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि शिविर में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) वाली गर्भवती को चिह्नित कर चिकित्सक उन्हें बेहतर इलाज के लिए फस्ट रेफरल यूनिट भेजते हैं। प्रत्येक माह की 24 तारीख को पुन: तहसील स्तर पर बने अस्पताल (एफआरयू) में ऐसी गर्भवती का इलाज होता है। शनिवार को संयुक्त जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुलसीपुर, उतरौला व पचपेड़वा सीएचसी में भी शिविर लगाया गया।
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जहां स्त्रीरोग विशेष व अन्य डॉक्टरों ने गर्भवती का इलाज किया। अपर सीएमओ डॉ. बीपी सिंह ने सीएचसी उतरौला, विनोद त्रिपाठी ने तुलसीपुर, डॉ. अनामिका सिंह ने पचपेड़वा व शिखा श्रीवास्तव ने संयुक्त जिला अस्पताल में लगे शिविर की हकीकत परखी। पांच जगह आयोजित शिविर में 352 गर्भवती पहुंचीं। इनमें से उच्च जोखिम युक्त 45 महिलाओं को चिकित्सक ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
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सीएमओ ने कहा कि नेपाल सीमा से सटे इस जिले में मातृ एवं शिशु मृत्युदर अधिक है। इसे नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग निरंतर प्रयासरत है। गर्भवती का सुरक्षित प्रसव कराने के लिए प्रत्येक माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान चलाया जाता है। जिसके तहत अस्पतालों में शिविर लगाकर गर्भवती का पंजीकरण, जांच व उपचार होता है।
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महिला अस्पताल में शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे एनएचएम के जिला कार्यक्रम प्रबंधक शिवेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि शिविर में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) वाली गर्भवती को चिह्नित कर चिकित्सक उन्हें बेहतर इलाज के लिए फस्ट रेफरल यूनिट भेजते हैं। प्रत्येक माह की 24 तारीख को पुन: तहसील स्तर पर बने अस्पताल (एफआरयू) में ऐसी गर्भवती का इलाज होता है। शनिवार को संयुक्त जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुलसीपुर, उतरौला व पचपेड़वा सीएचसी में भी शिविर लगाया गया।
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जहां स्त्रीरोग विशेष व अन्य डॉक्टरों ने गर्भवती का इलाज किया। अपर सीएमओ डॉ. बीपी सिंह ने सीएचसी उतरौला, विनोद त्रिपाठी ने तुलसीपुर, डॉ. अनामिका सिंह ने पचपेड़वा व शिखा श्रीवास्तव ने संयुक्त जिला अस्पताल में लगे शिविर की हकीकत परखी। पांच जगह आयोजित शिविर में 352 गर्भवती पहुंचीं। इनमें से उच्च जोखिम युक्त 45 महिलाओं को चिकित्सक ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया।