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Balrampur News: प्रभु कर कृपा पांवरी दीन्हि, सादर भरत शीश धरि लीन्ही...
Sun, 22 Oct 2023 11:29 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 22 Oct 2023 11:29 PM IST
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बलरामपुर के सिटी पैलेस पर रामलीला का मंचन करते कलाकार।
बलरामपुर। नगर के सिटी पैलेस रोड पर चल रहे रामलीला में शनिवार की रात श्रीराम-भरत मिलाप, पंचवटी में शूपर्णनखा की नाक काटने, खर-दूषण वध और सीता हरण का मंचन किया गया। भगवान राम की लीलाओं का मंचन देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
भरत का किरदार निभा रहे ओमप्रकाश ने भगवान श्रीराम से अयोध्या वापस लौटने की विनती की। श्रीराम पिता के वचनों का मान रखते हुए अयोध्या लौटने इन्कार कर देते हैं और अपने खड़ाऊ भरत को दे देते हैं। भरत खड़ाऊ शीश पर उठा राेते-बिलखते अयोध्या को निकलते हैं। भरत कहते हैं कि प्रभु कर कृपा पांवरी दीन्हि, सादर भरत शीश धरि लीन्ही। यह दृश्य देख दर्शकों की आंखें भर आईं।
इसके बाद पंचवटी में शूपर्णनखा की नाक काटने के प्रसंग का मंचन हुआ। शूपर्णनखा रावण के दरबार में गुहार लगाती है कि अयोध्या से आए दो राजकुमार राम और लक्ष्मण ने उनकी नाक काटी है। यह सुनकर रावण को क्रोध आ जाता है। कहता है कि किसने बहन की नाक उड़ाई, बहना जो काटे नाक तेरी और जिंदा रहे जमाने में, तो टूटे यह दोनों भुजा मेरी, लानत है शस्त्र उठाने में। इसके बाद रावण द्वारा मामा मारीच की मदद से स्वर्ण मृग का जाल रचने और पंचवटी से सीता हरण के प्रसंग का मंचन हुआ। भगवान श्रीराम की भूमिका में कुंवर आनंद पांडेय, लक्ष्मण के रूप में वेद प्रकाश व शूपर्णनखा बने नवीन ने अभिनय से मंचन को जीवंत कर दिया। रावण के किरदार में रमेश पाठक ने छाप छोड़ी।
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भरत का किरदार निभा रहे ओमप्रकाश ने भगवान श्रीराम से अयोध्या वापस लौटने की विनती की। श्रीराम पिता के वचनों का मान रखते हुए अयोध्या लौटने इन्कार कर देते हैं और अपने खड़ाऊ भरत को दे देते हैं। भरत खड़ाऊ शीश पर उठा राेते-बिलखते अयोध्या को निकलते हैं। भरत कहते हैं कि प्रभु कर कृपा पांवरी दीन्हि, सादर भरत शीश धरि लीन्ही। यह दृश्य देख दर्शकों की आंखें भर आईं।
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इसके बाद पंचवटी में शूपर्णनखा की नाक काटने के प्रसंग का मंचन हुआ। शूपर्णनखा रावण के दरबार में गुहार लगाती है कि अयोध्या से आए दो राजकुमार राम और लक्ष्मण ने उनकी नाक काटी है। यह सुनकर रावण को क्रोध आ जाता है। कहता है कि किसने बहन की नाक उड़ाई, बहना जो काटे नाक तेरी और जिंदा रहे जमाने में, तो टूटे यह दोनों भुजा मेरी, लानत है शस्त्र उठाने में। इसके बाद रावण द्वारा मामा मारीच की मदद से स्वर्ण मृग का जाल रचने और पंचवटी से सीता हरण के प्रसंग का मंचन हुआ। भगवान श्रीराम की भूमिका में कुंवर आनंद पांडेय, लक्ष्मण के रूप में वेद प्रकाश व शूपर्णनखा बने नवीन ने अभिनय से मंचन को जीवंत कर दिया। रावण के किरदार में रमेश पाठक ने छाप छोड़ी।
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