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हत्यारे पति को हुआ आजीवन कारावास
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बलरामपुर। एफटीसी प्रथम ने हत्या के दोषी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने आरोपी को 10 हजार रुपये अर्थदंड भी अदा करने का आदेश दिया है।
सरकारी अधिवक्ता नवीन तिवारी ने बताया कि वादी मुकदमा मालिकराम ने थाना गौरा चौराहा में प्रार्थना पत्र दिया था कि उसकी लड़की प्रभा की गला काटकर हत्या उसके पति प्रभुनाथ ने कर दी है।
घटना को प्रभा के दोनों बच्चों ने भी देखा है। विवेचक ने हत्या का दोषी मानते हुए प्रभुनाथ के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने वादी मुकदमा व मृतका की बेटी गुड़िया सहित 9 गवाहों को न्यायालय पर प्रस्तुत किया।
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पत्रावली का अवलोकन करने व गवाहों के बयान के आधार पर एफटीसी प्रथम विनोद कुमार पंचम ने प्रभुनाथ को प्रभा की हत्या का दोषी माना। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने सजा पर अपना पक्ष रखते हुए दलील दिया कि प्रभुनाथ के सात बच्चे हैं तथा बच्चों की परवरिश करके कमाने वाला प्रभुनाथ ही एक सदस्य है।
इसलिए कम से कम सजा दी जाए। सरकारी अधिवक्ता ने पत्नी की निर्मम हत्या का दोषी बताते हुए आजीवन कारावास या फांसी की सजा देने की अपील की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश विनोद कुमार पंचम ने प्रभुनाथ को प्रभा की हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर प्रभुनाथ को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
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सरकारी अधिवक्ता नवीन तिवारी ने बताया कि वादी मुकदमा मालिकराम ने थाना गौरा चौराहा में प्रार्थना पत्र दिया था कि उसकी लड़की प्रभा की गला काटकर हत्या उसके पति प्रभुनाथ ने कर दी है।
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घटना को प्रभा के दोनों बच्चों ने भी देखा है। विवेचक ने हत्या का दोषी मानते हुए प्रभुनाथ के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने वादी मुकदमा व मृतका की बेटी गुड़िया सहित 9 गवाहों को न्यायालय पर प्रस्तुत किया।
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पत्रावली का अवलोकन करने व गवाहों के बयान के आधार पर एफटीसी प्रथम विनोद कुमार पंचम ने प्रभुनाथ को प्रभा की हत्या का दोषी माना। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने सजा पर अपना पक्ष रखते हुए दलील दिया कि प्रभुनाथ के सात बच्चे हैं तथा बच्चों की परवरिश करके कमाने वाला प्रभुनाथ ही एक सदस्य है।
इसलिए कम से कम सजा दी जाए। सरकारी अधिवक्ता ने पत्नी की निर्मम हत्या का दोषी बताते हुए आजीवन कारावास या फांसी की सजा देने की अपील की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश विनोद कुमार पंचम ने प्रभुनाथ को प्रभा की हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर प्रभुनाथ को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।