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नदी व सरोवरों में डुबकी लगाने उमड़े श्रद्धालु
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बलरामपुर। कार्तिक पूर्णिमा पर्व जिलेभर में हर्षोल्लास से मनाया गया। शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर स्थित सूर्य कुंड सहित नदियों व पवित्र सरोवरों में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर दान-पुण्य किया। श्रद्धालुओं ने घरों में अन्न दान कर भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। कार्तिक पूूर्णिमा पर जगह-जगह मेले का आयोजन भी हुआ। इसमें लोगों ने मनपसंद सामानों की खरीदारी के साथ मनोरंजन भी किया।
कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को कार्तिक पूर्णिमा पर्व मनाया जाता है। इसे गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। इसी दिन भगवान भोलेनाथ त्रिपुरासुर नामक असुर का संहार कर त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी व भगवान विष्णु की विधिविधान से पूजा करने पर व्यक्ति को कभी आर्थिक तंगी नहीं झेलनी पड़ती है और घर में खुशहाली आती है। इसी मान्यता के अनुरूप मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा जिलेभर में हर्षोल्लास से मनाई गई।
शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर के सूर्य कुंड में भोर से ही स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई। श्रद्धालुओं ने सूर्य कुंड में डुबकी लगाकर मां पाटेश्वरी की पूजा-अर्चना के बाद दान-पुण्य किया। मंदिर में बच्चों के मुंडन, कर्ण छेदन आदि संस्कार के लिए भी पूरे दिन लोगों का तांता लगा रहा। मंदिर में मेले का आयोजन भी हुआ जिसमें लोगों ने खूब आनंद उठाया।
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इसी तरह राप्ती नदी के सिसई घाट पर भी भोर से लेकर दोपहर तक स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। श्रद्धालुओं ने राप्ती में डुबकी लगाकर गो दान व अन्न दान किया। यहां भी मेला देखने के लिए आसपास के गांवों से लोग उमड़ पड़े। पचपेड़वा क्षेत्र के चित्तौड़गढ़ बांध पर भी कार्तिक पूर्णिमा पर मेले का आयोजन किया गया। मेले में सजी दुकानों पर सामान खरीदने के लिए थारु बाहुल्य गांव के लोगों की भीड़ रही।
ग्राम प्रधान बांगड़ पिपरी कृष्णकुमार यादव ने बताया कि यहां कई दशक से कार्तिक पूर्णिमा मेला लगता है। मेले में थारु बाहुल्य क्षेत्र के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इसी तरह उतरौला, श्रीदत्तगंज, पेहर बाजार, गैड़ास बुजुर्ग, सादुल्लाहनगर, मथुरा, शिवपुरा, ललिया, महराजगंज तराई, हरैया, गौरा चौराहा, गैसड़ी आदि क्षेत्रों में भी कार्तिक पूर्णिमा पर्व धूमधाम से मनाया गया।
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कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को कार्तिक पूर्णिमा पर्व मनाया जाता है। इसे गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। इसी दिन भगवान भोलेनाथ त्रिपुरासुर नामक असुर का संहार कर त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी व भगवान विष्णु की विधिविधान से पूजा करने पर व्यक्ति को कभी आर्थिक तंगी नहीं झेलनी पड़ती है और घर में खुशहाली आती है। इसी मान्यता के अनुरूप मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा जिलेभर में हर्षोल्लास से मनाई गई।
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शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर के सूर्य कुंड में भोर से ही स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई। श्रद्धालुओं ने सूर्य कुंड में डुबकी लगाकर मां पाटेश्वरी की पूजा-अर्चना के बाद दान-पुण्य किया। मंदिर में बच्चों के मुंडन, कर्ण छेदन आदि संस्कार के लिए भी पूरे दिन लोगों का तांता लगा रहा। मंदिर में मेले का आयोजन भी हुआ जिसमें लोगों ने खूब आनंद उठाया।
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इसी तरह राप्ती नदी के सिसई घाट पर भी भोर से लेकर दोपहर तक स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। श्रद्धालुओं ने राप्ती में डुबकी लगाकर गो दान व अन्न दान किया। यहां भी मेला देखने के लिए आसपास के गांवों से लोग उमड़ पड़े। पचपेड़वा क्षेत्र के चित्तौड़गढ़ बांध पर भी कार्तिक पूर्णिमा पर मेले का आयोजन किया गया। मेले में सजी दुकानों पर सामान खरीदने के लिए थारु बाहुल्य गांव के लोगों की भीड़ रही।
ग्राम प्रधान बांगड़ पिपरी कृष्णकुमार यादव ने बताया कि यहां कई दशक से कार्तिक पूर्णिमा मेला लगता है। मेले में थारु बाहुल्य क्षेत्र के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इसी तरह उतरौला, श्रीदत्तगंज, पेहर बाजार, गैड़ास बुजुर्ग, सादुल्लाहनगर, मथुरा, शिवपुरा, ललिया, महराजगंज तराई, हरैया, गौरा चौराहा, गैसड़ी आदि क्षेत्रों में भी कार्तिक पूर्णिमा पर्व धूमधाम से मनाया गया।