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Balrampur News: बाढ़ के बाद संक्रामक बीमारियों ने पसारे पांव
Sat, 19 Aug 2023 04:51 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 19 Aug 2023 04:51 PM IST
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फोटो-2
ग्रामीण अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़, डॉक्टर जांच व दवा के साथ सतर्क रहने की दे रहे सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
ललिया (बलरामपुर)। बाढ़ प्रभावित गांवों में पानी निकलने के बाद कीचड़, सड़न और दुर्गंध से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। अभी कई गांवों में जलभराव की स्थिति है। इससे संक्रामक रोगों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। लोग वायरल फीवर, उल्टी-दस्त व पेट दर्द आदि रोगों की चपेट में आ रहे हैं। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों या निजी अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
बीते दिनों राप्ती नदी व पहाड़ी नालों की बाढ़ के कारण करीब 50 गांवों के लोग प्रभावित हुए थे। बाढ़ का पानी अब तो खत्म हो गया है, लेकिन सड़क, खेत व गलियों में अभी भी पानी भरा हुआ है। कैली, भगवानपुर, जमुनी, महराजगंज, प्रानपुर, कुकुरभुकवा, मथुरा, मथुरा खुर्द, बनकसिया व चैसार आदि गांवों में वायरल फीवर, उल्टी-दस्त व पेट दर्द आदि बीमारियाें से लोग पीड़ित हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मथुरा में पहले जहां 40 से 50 मरीज आते थे वहीं अब प्रतिदिन 110 से 150 मरीज पहुंच रहे हैं।
पीएचसी मथुरा के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रजत शुक्ला ने बताया कि बरसात के मौसम में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा अधिक रहता है। बाढ़ के कारण हुए जलभराव में मच्छर पनपते हैं। ग्रामीणों को अपने घर के आस पास साफ सफाई रखनी चाहिए। घर की छत, आंगन अथवा कूलर आदि में पानी इकठ्ठा नहीं होने देना चाहिए। पानी को उबाल कर पीना चाहिए। बासी भोजन कदापि नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि अस्पताल में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से गांवों में क्लोरीन की गोली व ओआरएस का पैकेट वितरित कराया जा रहा है।
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ग्रामीण अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़, डॉक्टर जांच व दवा के साथ सतर्क रहने की दे रहे सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
ललिया (बलरामपुर)। बाढ़ प्रभावित गांवों में पानी निकलने के बाद कीचड़, सड़न और दुर्गंध से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। अभी कई गांवों में जलभराव की स्थिति है। इससे संक्रामक रोगों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। लोग वायरल फीवर, उल्टी-दस्त व पेट दर्द आदि रोगों की चपेट में आ रहे हैं। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों या निजी अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
बीते दिनों राप्ती नदी व पहाड़ी नालों की बाढ़ के कारण करीब 50 गांवों के लोग प्रभावित हुए थे। बाढ़ का पानी अब तो खत्म हो गया है, लेकिन सड़क, खेत व गलियों में अभी भी पानी भरा हुआ है। कैली, भगवानपुर, जमुनी, महराजगंज, प्रानपुर, कुकुरभुकवा, मथुरा, मथुरा खुर्द, बनकसिया व चैसार आदि गांवों में वायरल फीवर, उल्टी-दस्त व पेट दर्द आदि बीमारियाें से लोग पीड़ित हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मथुरा में पहले जहां 40 से 50 मरीज आते थे वहीं अब प्रतिदिन 110 से 150 मरीज पहुंच रहे हैं।
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पीएचसी मथुरा के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रजत शुक्ला ने बताया कि बरसात के मौसम में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा अधिक रहता है। बाढ़ के कारण हुए जलभराव में मच्छर पनपते हैं। ग्रामीणों को अपने घर के आस पास साफ सफाई रखनी चाहिए। घर की छत, आंगन अथवा कूलर आदि में पानी इकठ्ठा नहीं होने देना चाहिए। पानी को उबाल कर पीना चाहिए। बासी भोजन कदापि नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि अस्पताल में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से गांवों में क्लोरीन की गोली व ओआरएस का पैकेट वितरित कराया जा रहा है।
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