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सरकारी इलाज चाहिए तो नाव की करें व्यवस्था
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बलरामपुर के उप स्वास्थ्य केन्द्र रामनगर के सामने भरा पानी।
- फोटो : BALRAMPUR
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बलरामपुर। उप स्वास्थ्य केंद्र राम नगर में अगर इलाज कराने जाना है तो पहले नाव की व्यवस्था करें। सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की स्थिति में सुधार नही हो पा रहा है।
बेलहा-गौरा मार्ग पर स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र रामनगर कई महीनों से बंद पड़ा है। बड़ी बड़ी झाड़ियों व पानी से घिरे इस अस्पताल को खुद इलाज की दरकार है। संचालन न होने के कारण यहां बना हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर भी पूरी तरह बदहाल हो चुका है।
केंद्र व प्रदेश सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए जहां जगह-जगह अस्पताल बनवाने में जुटी है वहीं विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते तमाम अस्पताल अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं।
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स्वास्थ्य सेवाएं दिन प्रतिदिन बदहाल होती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए बेलहा-गौरा मार्ग पर रामनगर गांव के पास वर्ष 2004-05 में उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया था। अस्पताल बनने पर आसपास के गांवों से लोग इलाज कराने यहां आते थे।
विभागीय उदासीनता के चलते धीरे-धीरे अस्पताल की व्यवस्था बदहाल होती गई। डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती न होने के कारण पिछले साल से ही अस्पताल का संचालन नही हो रहा है।
अस्पताल बंद होने के कारण आसपास बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई है। अस्पताल के रास्ते पर इतना पानी भरा है जिसे पार करने के लिए नाव की जरुरत है। मरीजों के इलाज के लिए बना यह अस्पताल अब छुट्टा जानवरों का शरणगाह बन गया है। दिन हो या रात यहां छुट्टा जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है। अस्पताल के सामने बना हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर भी पूरी तरह बदहाल हो चुका है।
उप स्वास्थ्य केंद्र तथा हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर बंद होने से गांव के लोगों को इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है। ग्रामवासी विवेकानंद, सेतू प्रकाश, राकेश, सुनील शुक्ला, दयाशंकर, पिंटू व किशोर आदि ने मुुख्य चिकित्साधिकारी से अस्पताल को व्यवस्थित कर पुन: संचालित कराए जाने की मांग की है।
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बेलहा-गौरा मार्ग पर स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र रामनगर कई महीनों से बंद पड़ा है। बड़ी बड़ी झाड़ियों व पानी से घिरे इस अस्पताल को खुद इलाज की दरकार है। संचालन न होने के कारण यहां बना हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर भी पूरी तरह बदहाल हो चुका है।
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केंद्र व प्रदेश सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए जहां जगह-जगह अस्पताल बनवाने में जुटी है वहीं विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते तमाम अस्पताल अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं।
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स्वास्थ्य सेवाएं दिन प्रतिदिन बदहाल होती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए बेलहा-गौरा मार्ग पर रामनगर गांव के पास वर्ष 2004-05 में उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया था। अस्पताल बनने पर आसपास के गांवों से लोग इलाज कराने यहां आते थे।
विभागीय उदासीनता के चलते धीरे-धीरे अस्पताल की व्यवस्था बदहाल होती गई। डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती न होने के कारण पिछले साल से ही अस्पताल का संचालन नही हो रहा है।
अस्पताल बंद होने के कारण आसपास बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई है। अस्पताल के रास्ते पर इतना पानी भरा है जिसे पार करने के लिए नाव की जरुरत है। मरीजों के इलाज के लिए बना यह अस्पताल अब छुट्टा जानवरों का शरणगाह बन गया है। दिन हो या रात यहां छुट्टा जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है। अस्पताल के सामने बना हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर भी पूरी तरह बदहाल हो चुका है।
उप स्वास्थ्य केंद्र तथा हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर बंद होने से गांव के लोगों को इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है। ग्रामवासी विवेकानंद, सेतू प्रकाश, राकेश, सुनील शुक्ला, दयाशंकर, पिंटू व किशोर आदि ने मुुख्य चिकित्साधिकारी से अस्पताल को व्यवस्थित कर पुन: संचालित कराए जाने की मांग की है।