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56 और गांवों में पहुंचा बाढ़ का पानी

Wed, 12 Oct 2022 10:42 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 12 Oct 2022 10:42 PM IST
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Flood water reached 56 more villages
बलरामपुर। राप्ती नदी का जलस्तर तो घट रहा है लेकिन बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां बढ़ती ही जा रहीं हैं। अभी भी 381 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। इनमें से 214 गांव टापू बने हुए हैं। बुधवार को बाढ़ ने सदर तहसील के 56 नए गांवों को भी चपेट में ले लिया। तीन लाख से अधिक आबादी अभी भी बाढ़ की चपेट में है। डेढ़ लाख हेक्टेअर फसल बाढ़ में डूबी है। वहीं, राप्ती नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से 115 सेंटीमीटर ऊपर है, जिसमें धीरे-धीरे कमी हो रही है।
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राप्ती नदी की बाढ़ में बुधवार को सदर तहसील के कलवारी, विशुनापुर, विशुनीपुर, खमौवा, सेखुईकला, पीलीभीत, गोंदीपुर, मझौवा, रानीजोत, कटराशंकर नगर, दीपवा बाग, गदुरहवा, सराय फाटक, निबकौनी, गेल्हापुर समेत 56 नए गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है। बलरामपुर चीनी मिल कॉलोनी में भी बाढ़ का पानी भर गया है।
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चंदापुर में बलरामपुर-भड़रिया बांध कटने से बजाज चीनी मिल सहित उसके आसपास के गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। लोग सड़कों व घर की छतों पर शरण लिए हुए हैं। बाढ़ पीड़ित राम जियावन, इशहाक, सफातुल्लाह, विनय, मनोज, शिवराम आदि ने बताया कि हम लोग दो दिन से घर की छतों पर शरण लिए हैं। बिजली न होने से मोबाइल भी बंद हो गए हैं। प्रशासन से अब तक किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली है।
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प्रशासन ने राहत व बचाव कार्यों के लिए एनडीआरएफ की दो, एसडीआरएफ की चार व जल पीएसी की सात टीमें लगाईं हैं। बाढ़ से घिरे लोगों को सुरक्षित निकालने तथा उन तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 68 मोटरबोट व 214 नावें लगाई गईं हैं।
तुलसीपुर में एनएच 730 पर बड़े वाहनों का आवागमन तो शुरू कर दिया गया लेकिन छोटे वाहनों का आवागमन अभी भी ठप है। ट्रेन व छोटे वाहनों का आवागमन न होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिक राजकुमार गुप्ता, विवेक मोदनवाल, शांति प्रसाद, राहुल चौरसिया ने बताया कि वह तीन दिन से बलरामपुर फंसे हैं। ये लोग लखनऊ से अपने वाहन से तुलसीपुर जाने के लिए आए थे। बलरामपुर-गोंडा रोड पर शक्ति स्मारक संस्थान दुल्हिनपुर के पास भी बुधवार को बाढ़ का पानी आ गया। हालांकि यहां वाहनों का आवागमन बंद नहीं है।
बाढ़ के चलते शहर सहित करीब 500 गांवों की बिजली आपूर्ति ठप है। बुधवार को लगातार सातवें दिन भी बिजली नहीं आने से लोगों की दुश्वारियां बढ़ती जा रही हैं। न तो पेयजल मिल पा रहा है और न ही मोबाइल चार्ज हो रहा है। लोग मोबाइल से किसी से संपर्क भी नहीं कर पा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के प्रति लोगों का आक्रोश भी बढ़ रहा है। बाढ़ पीड़ित संतोष, विवेक, राहुल, शकील, इरफान आदि का कहना है कि बिजली आने पर कम से कम मोबाइल तो चार्ज हो जाएगा जिससे वह अधिकारियों या किसी परिचित से मदद तो मांग सकते हैं।

प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित 381 गांवों में राहत व बचाव कार्य तेज करने के लिए पांच-पांच ग्राम पंचायतों का कलस्टर बनाया है। प्रत्येक कलस्टर में नोडल अधिकारी की तैनाती की गई है। नावों के संचालन के लिए रेस्क्यू तथा रिलीफ ऑपरेशन प्वाइंट बनाए गए हैं। बाढ़ प्रभावितों को तिरपाल, राशन किट व पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी कराई जा रही है। संक्रामक रोगों से बचाव के लिए मेडिकल किट बांटी जा रही है। पशुओं के बचाव के लिए टीकाकरण कराया जा रहा है। जिले में 32 बाढ़ चौकियां और 19 राहत केंद्र बनाए गए हैं।
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