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विधानसभा चुनाव में गुम हुआ बाढ़ की तबाही का मुद्दा
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फोटो-1-बलरामपुर देहात क्षेत्र के गांव में घुसा बाढ़ का पानी।-फाइल फोटो
- फोटो : BALRAMPUR
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बलरामपुर। विधानसभा चुनाव में बाढ़ की तबाही का मुद्दा गुम हो गया है। जिले के तीनों तहसीलों के 335 गांवों में राप्ती नदी समेत कई छोटी नदियों व 17 पहाड़ी नालों के बाढ़ से हर साल भारी तबाही होती है। तीन लाख लोगों पर बाढ़ का मंजर कहर बनकर टूटता है। जिले के 36 गांवों के आसपास राप्ती नदी कटान कर भारी तबाही मचाती है। लेकिन इस बार जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से नाराज बाढ़ व कटान प्रभावित लोगों ने विधानसभा चुनाव में मुद्दा न बनाए जाने पर असंतोष जताया है।
बारिश के दिनों सदर, तुलसीपुर व उतरौला तहसील के 335 गांवों में बाढ़ के तबाही का मंजर लोगों पर कहर बनकर हर साल टूटता है। राप्ती नदी के साथ जिले में अन्य कई छोटी नदियां बहती हैं। तुलसीपुर तहसील में 17 पहाड़ी नाले भी बरसात के दिनों में बाढ़ की तबाही मचाते हैं। बाढ़ के साथ सदर व उतरौला तहसील के 36 से अधिक गांवों पर राप्ती नदी के कटान का भी कहर लोगों को झेलना पड़ता है। बरसात के दिनों में बाढ़ व कटान का कहर जिले के तीन लाख लोगों को हर साल झेलना पड़ता है। राप्ती नदी के कटान को रोकने के लिए जिले में 10 करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च की जा चुकी है। प्रशासन ने कटान रोकने के उपाय तो तमाम किए लेकिन कटान के कहर को रोकने में अभी पूरी सफलता नहीं मिली है। राप्ती नदी के तटवर्ती इलाकों में बसे किसान शिव प्रसाद यादव, बलदेव, शिव कुमार, राहुल, सोनू, मोनू व सहदेव आदि ने आक्रोश जताते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव में बाढ़ व कटान का मुद्दा किसी भी राजनीतिक दलों ने बनाया है।
बाढ़ में हर साल करोड़ों रुपये की फसलें तबाह हो जाती हैं। बाढ़ से हर साल जानमाल का नुकसान होता है। कटान प्रभावित क्षेत्र में लोग हर साल बेघर हो जाते हैं। बाढ़ व कटान पीड़ित लोगों का दर्द दूर कराने का कोई ठोस उपाय नहीं किया जा रहा है।
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एक्सईएन बाढ़ खंड जेके लाल ने बताया कि राप्ती नदी के कटान व पहाड़ी नालों के बाढ़ को रोकने के लिए तटबंधों के साथ कटानरोधी कार्य कराए जा रहे हैं। कटानरोधी कार्य होने से कई गांव के लोगों को राहत मिली है।
बाढ़ व कटान रोकने का उपाय किया जा रहा
बरसात के दिनों में राप्ती व अन्य छोटी नदियों के साथ पहाड़ी नालों में बाढ़ व कटान को रोकने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। बाढ़ खंड की तरफ से कटानरोधी कार्य कराकर गांवों को राप्ती नदी के कटान से रोकने का प्रयास सार्थक साबित हो रहा है। राप्ती नदी व पहाड़ी नालों के कटान प्रभावित इलाकों में कटानरोधी कार्यों पर पैसा खर्च करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट मिलने के बाद बाढ़ खंड की तरफ से कटान प्रभावित क्षेत्रों में कटानरोधी कार्य कराए जाएंगे।
श्रुति, डीएम
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बारिश के दिनों सदर, तुलसीपुर व उतरौला तहसील के 335 गांवों में बाढ़ के तबाही का मंजर लोगों पर कहर बनकर हर साल टूटता है। राप्ती नदी के साथ जिले में अन्य कई छोटी नदियां बहती हैं। तुलसीपुर तहसील में 17 पहाड़ी नाले भी बरसात के दिनों में बाढ़ की तबाही मचाते हैं। बाढ़ के साथ सदर व उतरौला तहसील के 36 से अधिक गांवों पर राप्ती नदी के कटान का भी कहर लोगों को झेलना पड़ता है। बरसात के दिनों में बाढ़ व कटान का कहर जिले के तीन लाख लोगों को हर साल झेलना पड़ता है। राप्ती नदी के कटान को रोकने के लिए जिले में 10 करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च की जा चुकी है। प्रशासन ने कटान रोकने के उपाय तो तमाम किए लेकिन कटान के कहर को रोकने में अभी पूरी सफलता नहीं मिली है। राप्ती नदी के तटवर्ती इलाकों में बसे किसान शिव प्रसाद यादव, बलदेव, शिव कुमार, राहुल, सोनू, मोनू व सहदेव आदि ने आक्रोश जताते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव में बाढ़ व कटान का मुद्दा किसी भी राजनीतिक दलों ने बनाया है।
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बाढ़ में हर साल करोड़ों रुपये की फसलें तबाह हो जाती हैं। बाढ़ से हर साल जानमाल का नुकसान होता है। कटान प्रभावित क्षेत्र में लोग हर साल बेघर हो जाते हैं। बाढ़ व कटान पीड़ित लोगों का दर्द दूर कराने का कोई ठोस उपाय नहीं किया जा रहा है।
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एक्सईएन बाढ़ खंड जेके लाल ने बताया कि राप्ती नदी के कटान व पहाड़ी नालों के बाढ़ को रोकने के लिए तटबंधों के साथ कटानरोधी कार्य कराए जा रहे हैं। कटानरोधी कार्य होने से कई गांव के लोगों को राहत मिली है।
बाढ़ व कटान रोकने का उपाय किया जा रहा
बरसात के दिनों में राप्ती व अन्य छोटी नदियों के साथ पहाड़ी नालों में बाढ़ व कटान को रोकने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। बाढ़ खंड की तरफ से कटानरोधी कार्य कराकर गांवों को राप्ती नदी के कटान से रोकने का प्रयास सार्थक साबित हो रहा है। राप्ती नदी व पहाड़ी नालों के कटान प्रभावित इलाकों में कटानरोधी कार्यों पर पैसा खर्च करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट मिलने के बाद बाढ़ खंड की तरफ से कटान प्रभावित क्षेत्रों में कटानरोधी कार्य कराए जाएंगे।
श्रुति, डीएम