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Balrampur News: गमजदा माहौल में निकला दुलदुल का जुलूस

Mon, 15 Jul 2024 10:55 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Mon, 15 Jul 2024 10:55 PM IST
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Duldul's procession took place in a sad atmosphere
बलरामपुर। हजरत इमाम हुसैन के प्यारे घोड़े दुलदुल का जुलूस नगर में रविवार की रात बड़े ही गमजदा माहौल में निकाला गया। घर पहुंचने पर दुलदुल को अकीदतमंदों ने तरह-तरह का व्यंजन खिलाए और हजरत इमाम हुसैन के साथ उनके प्यारे घोड़े की शहादत को याद किया।
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मुहर्रम सातवीं तारीख की रात सबसे पहले नगर के बलुहा, झंझरा, गदुरहवा, नईबस्ती व नहरबालागंज मोहल्ले से अकीदतमंद अपने-अपने दुलदुल के साथ गदुरहवा स्थित बाबा हुरमत शाह के आस्ताने पर पहुंचे। यहां पर आस्ताना कमेटी के लोगों ने दुलदुल के साथ चल रहे अकीदतमंदों का स्वागत किया। बाबा हुरमत शाह रहमत उल्लाह अलैह के आस्ताने पर फातिहा पढ़ने के बाद दुलदुल को नगर के बलुहा, झंझरा, मेवालाल तालाब, पुरैनिया तालाब, नगर पालिका, यतीमखाना, सराय फाटक, नौशहरा व अलीजान पुरवा मोहल्ले में ले जाया गया। जुलूस में दुलदुल के प्रतीक के रूप में शामिल घोड़े के साथ चल रहे अकीदतमंद या हुसैन या हुसैन का नारा बुलंद कर रहे थे।
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इन मोहल्लो में लोग पूरी रात जगकर दुलदुल के आने का इंतजार किया। दुलदुल के पहुंचने पर उसकी शहादत को याद करते हुए लोगों ने प्रतीक के रूप में चल रहे घोड़े को चना, जलेबी, दाल व खीर आदि पकवान खिलाया।
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बाबा हुरमत शाह आस्ताना कमेटी के अध्यक्ष डॉक्टर तारिक अफजल सिद्दीकी ने बताया कि सातवीं मुहर्रम की रात नगर के मोहल्लों से निकलने वाले दुलदुल के जुलूस को सबसे पहले आस्ताने पर सलामी पेश की जाती है। परंपरा के अनुसार सबसे पहले दुलदुल को सलामी देने के बाद अकीदतमंदों ने फातिहा पढ़ी। फातिहा के बाद कमेटी के लोगों ने जुलूस के साथ चल रहे अकीदतमंदों और सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मियों को माला व साफा पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर आस्ताना कमेटी के सचिव हकीम निसार वारिस, बाबा रईस शाह, अब्बास सिद्दीकी, मास्टर मोहम्मद हसन कुरेशी, असलम व सबलू सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

मंगलवार की रात मुहर्रम नवीं तारीख को अकीदतमंद फातिहा पढ़ने के बाद अपनी मन्नतों के मुताबिक इमाम चबूतरों पर ताजिया रखेंगे। पूरी रात कर्बला की जंग और हजरत इमाम हुसैन व उनके साथियों की शहादत को याद करते हुए इबादत करेंगे।
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