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Balrampur News: दो माह की मशक्कत के बाद पकड़ आया खूंखार तेंदुआ
Wed, 03 Jan 2024 11:42 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 03 Jan 2024 11:42 PM IST
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बलरामपुर/हरैय्या सतघरवा। सोहेलवा क्षेत्र में आतंक का पर्याय बना आदमखोर तेंदुआ दो माह बाद वन विभाग की पकड़ में आ सका। बुधवार की सुबह छह बजे निगरानी में जुटी विशेषज्ञों की टीम को थर्मल ड्रोन कैमरे से तेंदुए की लोकेशन बेलवा गांव के पास ट्रेस हुई। इसके बाद गांव में मचान से निगरानी कर रही टीम सजग हो गई। तेंदुआ खुले में चारे के बतौर बंधी एक बकरी को खा रहा था। टीम में शामिल विशेषज्ञों ने बिना देरी किए तेंदुए को टैंकुलाइजर गन से बेहोश कर पिंजड़े में कैद किया।
बीते दो माह से इलाके के करीब एक दर्जन गांवों में आतंक का पर्याय बना यह तेंदुआ अब तक छह बच्चों को मार चुका था। इस तेंदुए को पकड़ने में कोलकाता व दिल्ली के साथ ही आस पास के जिलों से आई वन विभाग के विशेषज्ञों की टीम बीते दो माह से जुटी हुई थी। बीते कई दिनों से तेंदुए की लोकेशन बेलवा गांव के आस पास ही मिल रही थी। दो दिन पहले तेंदुए की मौजूदगी कौव्वापुर व हरैय्या सतघरवा के पास भी देखी गई थी। डीएफओ डा. एम. सेम्मारन ने बताया कि बुधवार की भोर में ही तेंदुए के बेलवा गांव के आसपास होने की जानकारी थर्मल ड्रोन कैमरे से मिली। इसके बाद तेंदुए को पकड़ने के लिए टीम ने एक बकरी गांव के बाहर गन्ने के खेत के पास बांध दी। टीम के बिछाए जाल में तेंदुआ फंस गया। इसके पकड़ने के बाद पिंजड़े में रखकर जनकपुर रेंज दफ्तर लाया गया। जहां उसे गोरखपुर चिड़िया घर भेजने की कार्रवाई की जा रही है। तेंदुआ को पकड़ने के अभियान में वन विभाग की टीम के साथ ही बेलवा गांव के अन्नू तिवारी, ड्राइवर राहुल व सुरेंद्र ने भी काफी अहम योगदान किया। तब जाकर तेंदुआ पकड़ में आया।
तेंदुए ने बीते साल चार नवंबर को लालनगर सिपहिया में पांच वर्षीय वंदनी को मां की गोद से छीन कर अपना पहला शिकार बनाया था। इसके बाद तीसरे दिन फिर तेंदुए ने हमला कर गांव की एक बच्ची को मार दिया। वंदनी का शव जंगल में मिला। इससे पूरे इलाके में तेंदुए की दहशत बढ़ गई।
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इसके बाद उसने लालनगर सिपहिया में ही तेंदुए ने 11 नवंबर को छह वर्षीय अरुण वर्मा का शिकार कर वन विभाग के समक्ष कड़ी चुनौती पेश कर दी थी। इसके बाद वन विभाग के सातों रेंज की टीमों के साथ ही सिद्धार्थनगर व बाराबंकी के डीएफओ की अगुवाई में टीमों ने तेंदुए को पकड़ने के लिए इलाके में डेरा डाल दिया।
इसके बाद भी तेंदुआ टीम के हाथ नहीं लगा। उसने 16 नवंबर को फिर बेलवा गांव में 10 वर्षीय विकास व 24 नवंबर को बनकटवा गांव में पांच साल के रितेश के बाद तीन दिसंबर को भगवानपुर की अनुष्का और फिर धर्मपुर के समीर अंसारी को भी मार डाला।
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तेंदुए को पकड़ने के लिए कार्रवाई में जुटी टीमों ने इलाके में 15 पिंजड़े और 16 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की। इसके बाद लखनऊ चिडियाघर से मादा तेंदुए का मूत्र मंगाकर, इसका छिड़काव भी कराया। फिर भी चालाक तेंदुआ हाथ नहीं लगा तो दिल्ली की वाइल्ड लाइफ ऑफ इंडिया की टीम के साथ कलकत्ता से थर्मल ड्रोन कैमरा युक्त हाईटेक टीम को बुलाया। गया। वन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि पकड़ा गया तेंदुआ ही छह बच्चों की मौत का जिम्मेदार है।
पांच साल का है पकड़ा गया तेंदुआ
जरवा (बलरामपुर)। तेंदुए को वन विभाग के साथ ही दुधवा नेशनल पार्क और जौनपुर की टीम ने पकड़ा है। डीएफओ डॉ. एम. सेम्मारन ने बताया कि पकड़े गए तेंदुए की उम्र लगभग पांच वर्ष है जो पूरी तरह वयस्क अवस्था में है।
तेंदुआ को पकड़ने में वन विभाग की टीम का सहयोग करने वाले अन्नू तिवारी, सुरेंद्र पांडे व राहुल को 26 जनवरी को सोहलवा वन्य जीव मित्र का प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। अभियान में एसडीओ उप प्रभागीय वन अधिकारी एमबी सिंह, मनोज कुमार, तुलसीपुर रेंजर अमरजीत प्रसाद, वन दरोगा शशिकांत शुक्ला, तुलसीपुर पुलिस क्षेत्राधिकार राघवेंद्र सिंह, उप जिलाधिकारी अभय कुमार सिंह, जौनपुर के डॉक्टर आरके सिंह की टीम, दुधवा नेशनल पार्क के डॉक्टर दयाशंकर की टीम के साथ ही मुख्य वन संरक्षक एपी सिन्हा वन्य जीव पूर्वी गोंडा भी मौजूद रहे।
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बीते दो माह से इलाके के करीब एक दर्जन गांवों में आतंक का पर्याय बना यह तेंदुआ अब तक छह बच्चों को मार चुका था। इस तेंदुए को पकड़ने में कोलकाता व दिल्ली के साथ ही आस पास के जिलों से आई वन विभाग के विशेषज्ञों की टीम बीते दो माह से जुटी हुई थी। बीते कई दिनों से तेंदुए की लोकेशन बेलवा गांव के आस पास ही मिल रही थी। दो दिन पहले तेंदुए की मौजूदगी कौव्वापुर व हरैय्या सतघरवा के पास भी देखी गई थी। डीएफओ डा. एम. सेम्मारन ने बताया कि बुधवार की भोर में ही तेंदुए के बेलवा गांव के आसपास होने की जानकारी थर्मल ड्रोन कैमरे से मिली। इसके बाद तेंदुए को पकड़ने के लिए टीम ने एक बकरी गांव के बाहर गन्ने के खेत के पास बांध दी। टीम के बिछाए जाल में तेंदुआ फंस गया। इसके पकड़ने के बाद पिंजड़े में रखकर जनकपुर रेंज दफ्तर लाया गया। जहां उसे गोरखपुर चिड़िया घर भेजने की कार्रवाई की जा रही है। तेंदुआ को पकड़ने के अभियान में वन विभाग की टीम के साथ ही बेलवा गांव के अन्नू तिवारी, ड्राइवर राहुल व सुरेंद्र ने भी काफी अहम योगदान किया। तब जाकर तेंदुआ पकड़ में आया।
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तेंदुए ने बीते साल चार नवंबर को लालनगर सिपहिया में पांच वर्षीय वंदनी को मां की गोद से छीन कर अपना पहला शिकार बनाया था। इसके बाद तीसरे दिन फिर तेंदुए ने हमला कर गांव की एक बच्ची को मार दिया। वंदनी का शव जंगल में मिला। इससे पूरे इलाके में तेंदुए की दहशत बढ़ गई।
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इसके बाद उसने लालनगर सिपहिया में ही तेंदुए ने 11 नवंबर को छह वर्षीय अरुण वर्मा का शिकार कर वन विभाग के समक्ष कड़ी चुनौती पेश कर दी थी। इसके बाद वन विभाग के सातों रेंज की टीमों के साथ ही सिद्धार्थनगर व बाराबंकी के डीएफओ की अगुवाई में टीमों ने तेंदुए को पकड़ने के लिए इलाके में डेरा डाल दिया।
इसके बाद भी तेंदुआ टीम के हाथ नहीं लगा। उसने 16 नवंबर को फिर बेलवा गांव में 10 वर्षीय विकास व 24 नवंबर को बनकटवा गांव में पांच साल के रितेश के बाद तीन दिसंबर को भगवानपुर की अनुष्का और फिर धर्मपुर के समीर अंसारी को भी मार डाला।
तेंदुए को पकड़ने के लिए कार्रवाई में जुटी टीमों ने इलाके में 15 पिंजड़े और 16 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की। इसके बाद लखनऊ चिडियाघर से मादा तेंदुए का मूत्र मंगाकर, इसका छिड़काव भी कराया। फिर भी चालाक तेंदुआ हाथ नहीं लगा तो दिल्ली की वाइल्ड लाइफ ऑफ इंडिया की टीम के साथ कलकत्ता से थर्मल ड्रोन कैमरा युक्त हाईटेक टीम को बुलाया। गया। वन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि पकड़ा गया तेंदुआ ही छह बच्चों की मौत का जिम्मेदार है।
पांच साल का है पकड़ा गया तेंदुआ
जरवा (बलरामपुर)। तेंदुए को वन विभाग के साथ ही दुधवा नेशनल पार्क और जौनपुर की टीम ने पकड़ा है। डीएफओ डॉ. एम. सेम्मारन ने बताया कि पकड़े गए तेंदुए की उम्र लगभग पांच वर्ष है जो पूरी तरह वयस्क अवस्था में है।
तेंदुआ को पकड़ने में वन विभाग की टीम का सहयोग करने वाले अन्नू तिवारी, सुरेंद्र पांडे व राहुल को 26 जनवरी को सोहलवा वन्य जीव मित्र का प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। अभियान में एसडीओ उप प्रभागीय वन अधिकारी एमबी सिंह, मनोज कुमार, तुलसीपुर रेंजर अमरजीत प्रसाद, वन दरोगा शशिकांत शुक्ला, तुलसीपुर पुलिस क्षेत्राधिकार राघवेंद्र सिंह, उप जिलाधिकारी अभय कुमार सिंह, जौनपुर के डॉक्टर आरके सिंह की टीम, दुधवा नेशनल पार्क के डॉक्टर दयाशंकर की टीम के साथ ही मुख्य वन संरक्षक एपी सिन्हा वन्य जीव पूर्वी गोंडा भी मौजूद रहे।