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चीनी मिल कर्मियों ने किया प्रदर्शन, कल कानपुर में करेंगे चक्का जाम
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बलरामपुर। सातवां वेतनमान व अन्य मांगों को लेकर चीनी मिल कर्मियों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सोमवार को बलरामपुर चीनी मिल गेट पर जमकर प्रदर्शन किया। चेतावनी दी कि यदि 22 नवंबर तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे कानपुर जाकर चक्का जाम करेंगे।
बलरामपुर चीनी मिल गेट पर प्रदर्शन के दौरान बलरामपुर चीनी मिल संघर्ष समिति के अध्यक्ष जय प्रकाश सिंह, संरक्षक सुधांशु प्रताप सिंह, महामंत्री मंगल प्रसाद, उपाध्यक्ष संजय तिवारी, जयप्रकाश सिंह, अजय श्रीवास्तव, संगठन मंत्री अजय भारती, राजेश्वर प्रसाद व सदस्य हरिशंकर पटेल आदि ने कहा कि वर्तमान सरकार पूरी तरह श्रमिकों की विरोधी है।
श्रमिकों के हितों को नजरअंदाज करती जा रही है। संगठित श्रमिक असंगठित क्षेत्र में आता जा रहा है। कर्मचारियों की सेवा शर्तें दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही हैं।
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इन लोगों ने कहा कि वर्ष 2018 से सरकार चीनी मिल मजदूरों के वेतन पुनरीक्षण व अन्य मांगों को नजरअंदाज कर रही है। सरकार ने श्रम आयुक्त के कार्यकाल को 30 दिसंबर तक बढ़ाकर निस्तारण कराने का जिम्मा सौंपा है लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई प्रयास शुरू नहीं किया गया। यदि 22 दिसंबर तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो ये लोग श्रम आयुक्त कार्यालय कानपुर के सामने चक्का जाम कर प्रदर्शन करेंगे।
वहीं दूसरी तरफ बलरामपुर चीनी मिल्स कर्मचारी संघर्ष समिति के मंत्री आलोक कुमार, चीनी मिल कर्मचारी संघ के महामंत्री अनूप, बलरामपुर शुगर वर्क्स यूनियन के कमलेश कुमार शुक्ल, बैरिस्टर सिंह, लाल साहब सिंह, अरुण कुमार सिंह, एके श्रीवास्तव व सुभाष पांडेय आदि ने सोमवार को इन्हीं मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
इन लोगों ने अपना मांग पत्र डीएम को सौंपकर समस्याओं के निराकरण की मांग की और चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो चीनी मिल कर्मी सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।
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बलरामपुर चीनी मिल गेट पर प्रदर्शन के दौरान बलरामपुर चीनी मिल संघर्ष समिति के अध्यक्ष जय प्रकाश सिंह, संरक्षक सुधांशु प्रताप सिंह, महामंत्री मंगल प्रसाद, उपाध्यक्ष संजय तिवारी, जयप्रकाश सिंह, अजय श्रीवास्तव, संगठन मंत्री अजय भारती, राजेश्वर प्रसाद व सदस्य हरिशंकर पटेल आदि ने कहा कि वर्तमान सरकार पूरी तरह श्रमिकों की विरोधी है।
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श्रमिकों के हितों को नजरअंदाज करती जा रही है। संगठित श्रमिक असंगठित क्षेत्र में आता जा रहा है। कर्मचारियों की सेवा शर्तें दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही हैं।
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इन लोगों ने कहा कि वर्ष 2018 से सरकार चीनी मिल मजदूरों के वेतन पुनरीक्षण व अन्य मांगों को नजरअंदाज कर रही है। सरकार ने श्रम आयुक्त के कार्यकाल को 30 दिसंबर तक बढ़ाकर निस्तारण कराने का जिम्मा सौंपा है लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई प्रयास शुरू नहीं किया गया। यदि 22 दिसंबर तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो ये लोग श्रम आयुक्त कार्यालय कानपुर के सामने चक्का जाम कर प्रदर्शन करेंगे।
वहीं दूसरी तरफ बलरामपुर चीनी मिल्स कर्मचारी संघर्ष समिति के मंत्री आलोक कुमार, चीनी मिल कर्मचारी संघ के महामंत्री अनूप, बलरामपुर शुगर वर्क्स यूनियन के कमलेश कुमार शुक्ल, बैरिस्टर सिंह, लाल साहब सिंह, अरुण कुमार सिंह, एके श्रीवास्तव व सुभाष पांडेय आदि ने सोमवार को इन्हीं मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
इन लोगों ने अपना मांग पत्र डीएम को सौंपकर समस्याओं के निराकरण की मांग की और चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो चीनी मिल कर्मी सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।