{"_id":"5f3aaaf68ebc3e6206471da9","slug":"dam-of-lalnagar-virdha-contained-in-the-stream-of-rapti-river-balrampur-news-lko5353962161","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामभरोसे लालनगर विरदा के कटान पीड़ित, नदी की धारा में समहित हो रहा बांध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामभरोसे लालनगर विरदा के कटान पीड़ित, नदी की धारा में समहित हो रहा बांध
विज्ञापन
उतरौला (बलरामपुर)। क्षेत्र के लालनगर विरदा गांव के पास तिल-तिल कट रहे बांध को देखकर ग्रामीण भयभीत हैं। कटान के कारण सैकड़ों बीघा खेत व जमीन नदी की धारा में समाहित हो चुकी हैं। नदी में आई बाढ़ आधा बांध भी निगल चुकी है। अफसर व कर्मी भी बांध रोकने के लिए किए जा रहे उपाय को बीच मझधार में छोड़कर फरार हो गए हैं।
15 दिनों से कटान स्थल पर कुछ सीमेंट की बोरियां व बंबू क्रेट पड़े हैं। प्रशासन न तो कटान रोकने का कोई उपाय कर रहा है और न ही ग्रामीणों का दर्द सुन रहा है। यदि बांध कटा तो राप्ती नदी की बाढ़ में लालनगर विरदा समेत दर्जनों गांवों तबाह हो जाएंगे।
उतरौला तहसील क्षेत्र के लालनगर विरदा गांव राप्ती नदी की कटान का मुख्य केंद्र बना हुआ है। कटान के चलते क्षेत्र के हजारों बीघे खेत, जमीन व मकान नदी की धारा में समाहित हो चुके हैं। गांव के पास बना बांध भी आधे से ज्यादा कट चुका है। क्षेत्र में कटान रोकने के लिए प्रशासन ऐड़ी से चोटी का जोर लगाए हुए था लेकिन करीब 15 दिन से प्रशासन ने भी शायद अपने हाथ खड़े कर लिए हैं।
विज्ञापन
कटान पीड़ित निसार अहमद, वारिस अली, राजकरन यादव, अवधराम यादव, शादाब अहमद, बजरंगी, सीताराम, अजमत अली, रफीक अंसारी, अंसार अहमद व अशफाक अहमद आदि ने बताया कि करीब 15 दिन पहले गांव के पास खेत व बांध को बचाने के लिए किए जा रहे कार्य बंद कर दिए गए। कटान स्थल पर कुछ बोरियां व बंबूक्रेट पड़े हुए हैं। किसानों के खेत दिन प्रतिदिन नदी की धारा में समाहित हो रहे हैं। सैकड़ों बीघा खेत, जमीन व घर नदी में विलीन हो गए हैं। कई लोग तो कटान के डर से अपने आशियाने खुद अपनी हाथों से उजाड़ रहे हैं। बांध भी आधा कट चुका है। यदि बांध कटा तो लालनगर विरदा समेत दर्जनों गांव तबाह हो जाएंगे।
विभागीय अधिकारियों से ली जा रही जानकारी
कटान स्थल पर बचाव कार्य क्यों रोक दिया गया है इसकी जानकारी बाढ़ खंड के अधिकारियों से ली जा रही है। कटान रोकने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। लापरवाही करने वाले अफसरों व कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- एके गौड़, एसडीएम उतरौला
विज्ञापन
15 दिनों से कटान स्थल पर कुछ सीमेंट की बोरियां व बंबू क्रेट पड़े हैं। प्रशासन न तो कटान रोकने का कोई उपाय कर रहा है और न ही ग्रामीणों का दर्द सुन रहा है। यदि बांध कटा तो राप्ती नदी की बाढ़ में लालनगर विरदा समेत दर्जनों गांवों तबाह हो जाएंगे।
विज्ञापन
उतरौला तहसील क्षेत्र के लालनगर विरदा गांव राप्ती नदी की कटान का मुख्य केंद्र बना हुआ है। कटान के चलते क्षेत्र के हजारों बीघे खेत, जमीन व मकान नदी की धारा में समाहित हो चुके हैं। गांव के पास बना बांध भी आधे से ज्यादा कट चुका है। क्षेत्र में कटान रोकने के लिए प्रशासन ऐड़ी से चोटी का जोर लगाए हुए था लेकिन करीब 15 दिन से प्रशासन ने भी शायद अपने हाथ खड़े कर लिए हैं।
विज्ञापन
कटान पीड़ित निसार अहमद, वारिस अली, राजकरन यादव, अवधराम यादव, शादाब अहमद, बजरंगी, सीताराम, अजमत अली, रफीक अंसारी, अंसार अहमद व अशफाक अहमद आदि ने बताया कि करीब 15 दिन पहले गांव के पास खेत व बांध को बचाने के लिए किए जा रहे कार्य बंद कर दिए गए। कटान स्थल पर कुछ बोरियां व बंबूक्रेट पड़े हुए हैं। किसानों के खेत दिन प्रतिदिन नदी की धारा में समाहित हो रहे हैं। सैकड़ों बीघा खेत, जमीन व घर नदी में विलीन हो गए हैं। कई लोग तो कटान के डर से अपने आशियाने खुद अपनी हाथों से उजाड़ रहे हैं। बांध भी आधा कट चुका है। यदि बांध कटा तो लालनगर विरदा समेत दर्जनों गांव तबाह हो जाएंगे।
विभागीय अधिकारियों से ली जा रही जानकारी
कटान स्थल पर बचाव कार्य क्यों रोक दिया गया है इसकी जानकारी बाढ़ खंड के अधिकारियों से ली जा रही है। कटान रोकने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। लापरवाही करने वाले अफसरों व कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- एके गौड़, एसडीएम उतरौला