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Balrampur News: बाल विवाह की कुरीति पर बच्चों ने नाटक के जरिए किया प्रहार
Mon, 26 Oct 2026 11:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Mon, 26 Oct 2026 11:47 PM IST
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फोटो-27-बलरामपुर के कंपोजिट विद्यालय बिराहिमपुर में नाटक प्रस्तुत करते विद्यार्थी ।-स्रोत : विभ
बलरामपुर। कंपोजिट विद्यालय बिराहिमपुर में अरमान मॉड्यूल के तहत बच्चों ने सामाजिक जागरूकता पर आधारित नाटक प्रस्तुत कर बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर प्रहार किया। ‘हमारा परिवार और लिंगभेद’ विषय के तहत आयोजित गतिविधि में बच्चों ने ‘बेटी की शादी’ शीर्षक से लघु नाटक का मंचन किया। इसके माध्यम से बाल विवाह के दुष्परिणामों को उजागर करते हुए लोगों को जागरूक किया गया।
नाटक में बच्चों ने अपने अभिनय के माध्यम से दिखाया कि कम उम्र में शादी होने से लड़कियों की पढ़ाई बाधित होती है। इसका उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। बाल विवाह के कारण बेटियों के सपने अधूरे रह जाते हैं और भविष्य में आगे बढ़ने के उनके अवसर सीमित हो जाते हैं। बच्चों ने संदेश दिया कि बेटियों को बोझ समझने के बजाय उन्हें शिक्षा और विकास के समान अवसर उपलब्ध कराने चाहिए। नाटक के माध्यम से यह भी बताया गया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है।
कार्यक्रम का संचालन सुगमकर्ता डॉ. श्वेता सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि अरमान मॉड्यूल का उद्देश्य बच्चों में लैंगिक समानता, पारिवारिक संबंधों की समझ और सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूकता विकसित करना है। उन्होंने कहा कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि परिवार की शक्ति हैं। उन्हें पढ़ने, अपने सपने पूरे करने और जीवन में आगे बढ़ने के पूरे अवसर मिलने चाहिए।
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नाटक में बच्चों ने अपने अभिनय के माध्यम से दिखाया कि कम उम्र में शादी होने से लड़कियों की पढ़ाई बाधित होती है। इसका उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। बाल विवाह के कारण बेटियों के सपने अधूरे रह जाते हैं और भविष्य में आगे बढ़ने के उनके अवसर सीमित हो जाते हैं। बच्चों ने संदेश दिया कि बेटियों को बोझ समझने के बजाय उन्हें शिक्षा और विकास के समान अवसर उपलब्ध कराने चाहिए। नाटक के माध्यम से यह भी बताया गया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है।
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कार्यक्रम का संचालन सुगमकर्ता डॉ. श्वेता सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि अरमान मॉड्यूल का उद्देश्य बच्चों में लैंगिक समानता, पारिवारिक संबंधों की समझ और सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूकता विकसित करना है। उन्होंने कहा कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि परिवार की शक्ति हैं। उन्हें पढ़ने, अपने सपने पूरे करने और जीवन में आगे बढ़ने के पूरे अवसर मिलने चाहिए।
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