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Balrampur News: नेपाल सीमा पर पकड़ी गई 19 किलो अफीम दवा बनाने के लिए भेजी जाएगी गाजीपुर
Tue, 27 Oct 2026 12:02 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Tue, 27 Oct 2026 12:02 AM IST
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फोटो-13-बलरामपुर के जरवा में स्थित चेक पोस्ट।-संवाद
जरवा। भारत-नेपाल सीमा पर 21 जुलाई को बरामद संदिग्ध पदार्थ की पहचान 97 दिन बाद अफीम के रूप में हुई है। केंद्रीय राजस्व नियंत्रण प्रयोगशाला, नई दिल्ली से सोमवार को ईमेल के जरिए मिली जांच रिपोर्ट में 19 किलो 315 ग्राम अफीम होने की पुष्टि हुई है। कस्टम विभाग अब न्यायालय से अनुमति लेकर इसे गाजीपुर स्थित अफीम फैक्ट्री भेजने की तैयारी कर रहा है। वहां इसका उपयोग दवाओं के निर्माण में किया जाएगा। हालांकि, सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद इतनी बड़ी खेप के सीमा चौकी से करीब पांच किलोमीटर अंदर तक पहुंचने का सवाल अब भी बना हुआ है।
कस्टम विभाग के अनुसार, 21 जुलाई की सुबह करीब 11 बजे जरवा स्थित सीमा शुल्क चौकी पर नेपाल की ओर से आ रहे एक नेपाली युवक को जांच के लिए रोका गया था। उसके पास मौजूद पिट्ठू बैग की जांच के दौरान युवक करीब 500 मीटर दूर रामपुर रेंज के जंगल की ओर भाग गया। बैग की तलाशी लेने पर उसमें करीब 22 किलोग्राम वजन की संदिग्ध सामग्री मिली थी। बैग में चार्जर, कपड़े और अन्य सामान भी रखा हुआ था।
कस्टम अधीक्षक प्रशांत कुमार ने सोमवार को बताया कि सहायक आयुक्त केएन सिंह के निर्देशन में कस्टम निरीक्षक राहुल यादव ने बरामद सामग्री को सील करने, न्यायालय में आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने और नमूना केंद्रीय राजस्व नियंत्रण प्रयोगशाला, नई दिल्ली भेजने समेत अन्य औपचारिकताएं पूरी कीं। सोमवार को ईमेल से प्राप्त रिपोर्ट में उच्च गुणवत्ता वाली अफीम होने की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट में अफीम का वजन 19 किलो 315 ग्राम दर्ज किया गया है। विभाग के अनुसार, इस खेप की अनुमानित कीमत पांच लाख रुपये है।
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शुरुआती वजन और अफीम की मात्रा में अंतर
बरामदगी के समय पिट्ठू बैग समेत संदिग्ध सामग्री का कुल वजन करीब 22 किलोग्राम बताया गया था। वहीं, प्रयोगशाला की रिपोर्ट में अफीम की मात्रा 19 किलो 315 ग्राम दर्ज की गई है। ऐसे में दोनों आंकड़ों में अंतर सामने आया है। शुरुआती वजन में बैग, कपड़े, चार्जर और अन्य सामान भी शामिल होने की बात कही गई है। हालांकि, कुल वजन और शुद्ध अफीम की मात्रा का स्पष्ट विवरण सामने आने पर ही इस अंतर की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। कस्टम विभाग के मुताबिक, न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद अफीम को गाजीपुर स्थित अफीम फैक्ट्री भेजा जाएगा। वहां इसका उपयोग दवाओं के निर्माण में किया जाएगा।
सीमा सुरक्षा पर उठे सवाल, सतर्कता पर जोर
इस बरामदगी ने सीमा पर निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। जरवा क्षेत्र भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ा है। यहां सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी), स्थानीय पुलिस और कस्टम विभाग की निगरानी व्यवस्था के बावजूद संदिग्ध सामग्री के साथ युवक का चौकी से भाग जाना और खेप का सीमा के भीतर करीब पांच किलोमीटर तक पहुंचना जांच का विषय है।
पुलिस अधीक्षक मार्तंड प्रकाश सिंह ने बताया कि सीमा पर निगरानी की जा रही है। पुलिस और एसएसबी की टीमें नियमित रूप से छानबीन कर रही हैं। इसके साथ ही गांवों में आम लोगों से भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
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कस्टम विभाग के अनुसार, 21 जुलाई की सुबह करीब 11 बजे जरवा स्थित सीमा शुल्क चौकी पर नेपाल की ओर से आ रहे एक नेपाली युवक को जांच के लिए रोका गया था। उसके पास मौजूद पिट्ठू बैग की जांच के दौरान युवक करीब 500 मीटर दूर रामपुर रेंज के जंगल की ओर भाग गया। बैग की तलाशी लेने पर उसमें करीब 22 किलोग्राम वजन की संदिग्ध सामग्री मिली थी। बैग में चार्जर, कपड़े और अन्य सामान भी रखा हुआ था।
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कस्टम अधीक्षक प्रशांत कुमार ने सोमवार को बताया कि सहायक आयुक्त केएन सिंह के निर्देशन में कस्टम निरीक्षक राहुल यादव ने बरामद सामग्री को सील करने, न्यायालय में आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने और नमूना केंद्रीय राजस्व नियंत्रण प्रयोगशाला, नई दिल्ली भेजने समेत अन्य औपचारिकताएं पूरी कीं। सोमवार को ईमेल से प्राप्त रिपोर्ट में उच्च गुणवत्ता वाली अफीम होने की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट में अफीम का वजन 19 किलो 315 ग्राम दर्ज किया गया है। विभाग के अनुसार, इस खेप की अनुमानित कीमत पांच लाख रुपये है।
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शुरुआती वजन और अफीम की मात्रा में अंतर
बरामदगी के समय पिट्ठू बैग समेत संदिग्ध सामग्री का कुल वजन करीब 22 किलोग्राम बताया गया था। वहीं, प्रयोगशाला की रिपोर्ट में अफीम की मात्रा 19 किलो 315 ग्राम दर्ज की गई है। ऐसे में दोनों आंकड़ों में अंतर सामने आया है। शुरुआती वजन में बैग, कपड़े, चार्जर और अन्य सामान भी शामिल होने की बात कही गई है। हालांकि, कुल वजन और शुद्ध अफीम की मात्रा का स्पष्ट विवरण सामने आने पर ही इस अंतर की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। कस्टम विभाग के मुताबिक, न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद अफीम को गाजीपुर स्थित अफीम फैक्ट्री भेजा जाएगा। वहां इसका उपयोग दवाओं के निर्माण में किया जाएगा।
सीमा सुरक्षा पर उठे सवाल, सतर्कता पर जोर
इस बरामदगी ने सीमा पर निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। जरवा क्षेत्र भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ा है। यहां सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी), स्थानीय पुलिस और कस्टम विभाग की निगरानी व्यवस्था के बावजूद संदिग्ध सामग्री के साथ युवक का चौकी से भाग जाना और खेप का सीमा के भीतर करीब पांच किलोमीटर तक पहुंचना जांच का विषय है।
पुलिस अधीक्षक मार्तंड प्रकाश सिंह ने बताया कि सीमा पर निगरानी की जा रही है। पुलिस और एसएसबी की टीमें नियमित रूप से छानबीन कर रही हैं। इसके साथ ही गांवों में आम लोगों से भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है।