{"_id":"602fe8b88ebc3ee9644164aa","slug":"children-carved-honey-forest-artifacts-balrampur-news-lko5656875166","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चों ने उकेरीं शहद के जंगल की कलाकृतियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्चों ने उकेरीं शहद के जंगल की कलाकृतियां
विज्ञापन
बलरामपुर। नगर के मॉडर्न इंटर कॉलेज में स्पिक मैके बलरामपुर के तत्वाधान में मधुबनी पेंटिंग की तीन दिवसीय कार्यशाला कराई जा रही है। शुक्रवार को कार्यशाला में शामिल होने वाले बच्चों ने शहद के जंगल की कलाकृतियां उकेरीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कला गुरु सरोज झा व ममता झा ने कहा कि मधुवनी चित्रकला व मिथला पेंटिंग बिहार के दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, मुजफ्फरपुर, मधुबनी व नेपाल के कुछ क्षेत्रों की प्रमुख चित्रकला है। प्रारंभ में रंगोली के रूप में रहने के बाद यह कला धीरे-धीरे आधुनिक रूप में कपड़ों, दीवरों व कागजों पर उकेरी जा रही है।
मिथला की औरतों ने घरेलू चित्रकला में मधुबनी पेंटिंग को अपनाया है। मिथला पेंटिंग के कलाकारों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मधुबनी व मिथला पेंटिंग के सम्मान को बढ़ाया है। करीब 10 हजार वर्ग फीट में मधुबनी रेलवे स्टेशन की दीवारों को कलाकृतियों से सजाया गया है। इन कलाकृतियों को देखने के लिए विदेशी पर्यटक व सैलानियों का रेला लगा रहता है।
विज्ञापन
कार्यशाला के दूसरे दिन प्रतिभागियों ने स्केचिंग के साथ विभिन्न प्रकार की कलाकृतियों को बनाया जिसमें शहद के जंगल की कलाकृति को खूब पसंद किया गया। मुख्य अतिथि आनंद कुमार चौहान व विशिष्ट अतिथि वीरेंद्र मिश्र ने दीप जलाकर कार्यशाला का शुभारंभ कराया। संयोजक डॉ. नीरजा शुक्ला व सह संयोजक डॉ. डीके चौहान ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन सलोनी पांडेय ने किया। कार्यशाला के सफल आयोजन में शिवम चौहान, सत्यवीर सिंह, योगेश तिवारी, महिमा सोनी, अविकल त्रिपाठी व अर्चित आदि का सराहनीय योगदान रहा।
विज्ञापन
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कला गुरु सरोज झा व ममता झा ने कहा कि मधुवनी चित्रकला व मिथला पेंटिंग बिहार के दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, मुजफ्फरपुर, मधुबनी व नेपाल के कुछ क्षेत्रों की प्रमुख चित्रकला है। प्रारंभ में रंगोली के रूप में रहने के बाद यह कला धीरे-धीरे आधुनिक रूप में कपड़ों, दीवरों व कागजों पर उकेरी जा रही है।
विज्ञापन
मिथला की औरतों ने घरेलू चित्रकला में मधुबनी पेंटिंग को अपनाया है। मिथला पेंटिंग के कलाकारों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मधुबनी व मिथला पेंटिंग के सम्मान को बढ़ाया है। करीब 10 हजार वर्ग फीट में मधुबनी रेलवे स्टेशन की दीवारों को कलाकृतियों से सजाया गया है। इन कलाकृतियों को देखने के लिए विदेशी पर्यटक व सैलानियों का रेला लगा रहता है।
विज्ञापन
कार्यशाला के दूसरे दिन प्रतिभागियों ने स्केचिंग के साथ विभिन्न प्रकार की कलाकृतियों को बनाया जिसमें शहद के जंगल की कलाकृति को खूब पसंद किया गया। मुख्य अतिथि आनंद कुमार चौहान व विशिष्ट अतिथि वीरेंद्र मिश्र ने दीप जलाकर कार्यशाला का शुभारंभ कराया। संयोजक डॉ. नीरजा शुक्ला व सह संयोजक डॉ. डीके चौहान ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन सलोनी पांडेय ने किया। कार्यशाला के सफल आयोजन में शिवम चौहान, सत्यवीर सिंह, योगेश तिवारी, महिमा सोनी, अविकल त्रिपाठी व अर्चित आदि का सराहनीय योगदान रहा।