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Balrampur News: दरोगा पवन कनौजिया के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

Thu, 06 Nov 2025 10:44 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 06 Nov 2025 10:44 PM IST
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Chargesheet filed against Inspector Pawan Kanaujia
पवन कुमार कनौजिया
बलरामपुर। गैड़ास बुजुर्ग थाने के सामने एससी युवक राम बुझारत के आत्मदाह का मामला अहम मोड़ पर आ गया है। आरोपी तत्कालीन थानाध्यक्ष पवन कुमार कनौजिया के खिलाफ विवेचना पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। शासन से मुकदमा चलाने की स्वीकृति मिलने के बाद कार्रवाई के रूप में यह बड़ी प्रगति है।
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प्रकरण की विवेचना अपर पुलिस अधीक्षक गोंडा राधेश्याम राय के नेतृत्व में चल रही थी। उन्होंने सभी साक्ष्यों व बयानों का संकलन कर दरोगा के विरुद्ध अपराध सिद्ध होने के पर्याप्त आधार मिलने पर चार्जशीट दाखिल की है। राम बुझारत की पत्नी कुसुमा देवी की याचिका पर हाईकोर्ट ने शासन को जांच और अभियोजन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का निर्देश दिया था।
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शासन ने 24 अक्तूबर को मुकदमा चलाने की स्वीकृति दी थी। तीन नवंबर की सुनवाई में न्यायालय ने चार्जशीट दाखिल करने की समय सीमा तय की थी। सूत्रों के अनुसार अब आरोपी दरोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। फिलहाल अभी दरोगा पर बड़े पुलिस अधिकारियों का हाथ है।
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यह है मामला
23 अक्तूबर 2023 को जमीन पर पुलिस कब्जे से आहत राम बुझारत ने थाने के सामने ही आत्मदाह कर लिया था। उन्हें गंभीर अवस्था में लखनऊ रेफर किया गया, जहां 27 अक्तूबर को मौत हो गई। तत्कालीन जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने मजिस्ट्रेटी जांच कराई, जिसमें दरोगा पवन कनौजिया को दोषी पाया गया। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी की जांच में भी यह साबित हुआ कि दरोगा ने विवादित भूमि पर अवैध कब्जा दिलाने में भूमिका निभाई, जिसके कारण राम बुझारत ने यह कदम उठाया।
दरोगा पर अब चलेगा मुकदमा
चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही अब दरोगा पवन कनौजिया पर मुकदमे की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। पुलिस सूत्रों के अनुसार जल्द ही न्यायालय में अभियोजन साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे। वहीं, पुलिस विभाग ने शासन को चार्जशीट की प्रति भेज दी है। दलित संगठनों ने इसे न्याय की दिशा में अहम कदम बताया है। पत्नी कुसुमा देवी ने कहा कि हमने लंबे समय तक न्याय के लिए लड़ाई लड़ी। अब उम्मीद है कि पति की मौत के जिम्मेदार लोगों को सजा मिलेगी।
दरोगा के बचाव में होती रही विभागीय कवायद
घटना के बाद पुलिस विभाग ने तो शुरू में दरोगा को बचाने का भरसक प्रयास किया। तत्कालीन सीओ उतरौला की रिपोर्ट में मृतक की पत्नी पर ही आरोप लगा दिया गया, लेकिन जिलाधिकारी की जांच में रिपोर्ट गलत साबित हुई। इसके बाद शासन ने दोनों अधिकारियों का तबादला कर दिया था और एसआईटी गठित कर जांच कराई। इसके साथ ही दरोगा पवन कुमार को अपर पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट पर निलंबित किया गया। बाद में प्रतिकूल प्रविष्टि जैसी मामूली कार्रवाई कर उसे बहाल कर दिया गया।

प्रतिकूल प्रविष्टि समाप्त कर पीआरओ बना लिया
दरोगा की अपील पर बाद में देवीपाटन मंडल के डीआईजी ने प्रतिकूल प्रविष्टि की कार्रवाई भी समाप्त कर दी। इस समय उसकी तैनाती आईजी देवीपाटन मंडल कार्यालय में है और पीआरओ जैसी अहम जिम्मेदारी भी निभा रहा है। दरोगा मूल रूप से बाराबंकी का रहने वाला है।
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