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छांगुर बाबा पर बड़ा खुलासा: पूर्व आईपीएस अधिकारी को चुनाव लड़वाने की तैयारी में था, लाल डायरी से खुलेंगे राज!

Thu, 17 Jul 2025 02:30 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर Published by: विजय पुंडीर Updated Thu, 17 Jul 2025 02:30 AM IST
सार

छांगुर के करीबी रहे बब्बू खान ने बताया कि एक पूर्व आईपीएस अधिकारी से छांगुर के करीबी रिश्ते रहे हैं। अवैध धर्मांतरण के खेल में उसे पुलिस अधिकारी से भी पूरा संरक्षण मिलता रहा है। अपनी पहुंच से वह छांगुर को समय-समय पर कार्रवाई से बचा रहा था। 

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Changur Baba was preparing to field a former IPS officer in the UP assembly elections
छांगुर बाबा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदू परिवारों का धर्मांतरण कराकर जनसांख्यिकीय बदलाव में जुटे छांगुर पीर की राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी प्रबल थी। वह खुद को राजनीति में स्थापित कर सत्ता तक पहुंच बनाने के प्रयास में था। इसके लिए उतरौला निवासी एक पूर्व पुलिस अधिकारी को विधानसभा चुनाव में उतारने की तैयारी में था। वहीं, नीतू उर्फ नसरीन के कमरे से बरामद लाल डायरी में ऐसे कई राजनेताओं के नाम मिले हैं, जिन्हें छांगुर ने विधानसभा चुनाव के दौरान लिए मोटी रकम दी थी।

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पैरवी के लिए समय-समय पर लखनऊ भी जाता रहा। प्रचार के लिए पानी की तरह पैसे भी बहा रहा था। गिरफ्तारी से पहले भी जगह-जगह जलसों में वह पुलिस अधिकारी को मुख्य अतिथि के तौर पर प्रस्तुत कर रहा था। पूर्व सांसद दद्दन मिश्रा बताते हैं कि छांगुर अब चुनाव को भी प्रभावित करने लगा था। उसकी अपील का असर मतदान पर पड़ता था।

छांगुर के करीबी रहे बब्बू खान ने बताया कि एक पूर्व आईपीएस अधिकारी से छांगुर के करीबी रिश्ते रहे हैं। अवैध धर्मांतरण के खेल में उसे पुलिस अधिकारी से भी पूरा संरक्षण मिलता रहा है। अपनी पहुंच से वह छांगुर को समय-समय पर कार्रवाई से बचा रहा था। उसी की पहल पर छांगुर अपनी सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन के साथ दो महीने तक पुलिस और एटीएस को चकमा देकर लखनऊ में डटा रहा। लखनऊ में छांगुर के लिए वही अधिकारी वकीलों की टीम भी उपलब्ध करा रहा था।

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नेपाल से सटे संवेदनशील बलरामपुर जिले की राजनीति को देखें तो बीते दस वर्षों से सभी विधानसभा क्षेत्रों में छांगुर की पैठ बढ़ी थी। बात चाहे लोकसभा चुनाव की हो या फिर विधानसभा की, छांगुर पीर सभी में सक्रिय रहता था। प्रत्याशियों को फंडिंग करता था। अपने अनुयायियों से उनके पक्ष में मतदान की अपील भी करता था। तहसील क्षेत्र में तो त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को सीधे प्रभावित कर रहा था।

लाल डायरी में कई राजनेताओं के भी नाम मिले
सूत्रों के अनुसार एटीएस की जांच में नीतू उर्फ नसरीन के कमरे से बरामद लाल डायरी में ऐसे राजनेताओं के भी नाम मिले हैं, जिन्हें 2022 के विधानसभा चुनाव में छांगुर ने मोटी रकम दी गई है। चर्चा है कि उतरौला से एक पूर्व प्रत्याशी को छांगुर ने 90 लाख रुपये दिए थे, लेकिन वह चुनाव नहीं जीत सके। ऐसे में इस बार एक राष्ट्रीय दल से जुड़े पूर्व आईपीएस अधिकारी को 2027 के विधानसभा चुनाव में उतरौला से चुनाव मैदान में उतारने के लिए जमीन तैयार कर रहा था।

एटीएस के गवाह पर छांगुर के गुर्गों ने किया हमला, बयान न बदलने पर दी हत्या की धमकी
अवैध धर्मांतरण के मामले में बयान न बदलने पर जमालुद्दीन उर्फ छांगुर के गुर्गों ने एटीएस के गवाह हरजीत कश्यप पर हमला कर दिया। उन्हें बुरी तरह से पीटा और हत्या की धमकी दी। पुलिस ने तीन के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ग्राम रसूलाबाद निवासी हरजीत एटीएस के गवाह हैं। उन्होंने छांगुर पर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया है। इसी बात को लेकर हरजीत से छांगुर के गुर्गों रियाज, कमालुद्दीन व नव्वाब ने मारपीट की। हरजीत के अनुसार उन्हें धमकाया गया कि रसूलाबाद गांव पाकिस्तान है। यहां रहकर मुसलमानों से बगावत करते हो। इसका अंजाम तुम सबको भुगतना पड़ेगा। योगी सरकार कब तक रहेगी, जब यह सरकार जाएगी तो तुम्हें सबक सिखाया जाएगा।

हरजीत ने बुधवार को बताया कि तीन जुलाई को लखनऊ में छांगुर पीर के खिलाफ सताए व जबरन धर्म परिवर्तन कराए जाने के मामले में बयान दिया था। पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। हरजीत ने बताया कि वह सात जुलाई को दवा लेने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गैड़ास बुजुर्ग जा रहे थे। उतरौला चौराहा डुमरियागंज रोड पर पहले से खड़े रियाज, कमालुद्दीन व नव्वाब ने रोक लिया और मारने लगे। जान-माल की धमकी दी। कहा कि 24 घंटे के अंदर लखनऊ जाकर बयान बदलो। पिटाई करते हुए कह रहे थे कि छांगुर के खिलाफ आवाज उठाने वालों को मिट्टी में मिला दिया जाएगा। प्रभारी निरीक्षक उतरौला कोतवाली अवधेश राज सिंह ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है। जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

छांगुर के करीबी की तलाश में गोंडा पहुंची एटीएस
छांगुर के करीबी की तलाश में मंगलवार रात एटीएस की टीम धानेपुर के रेतवागाड़ा पहुंची। जांच में रमजान का नाम सामने आया था। वह कव्वाली सहित अन्य कार्यक्रमों में ढोलक बजाता था। कार्यक्रम के सिलसिले में ही उसकी मुलाकात छांगुर से हुई थी। बताया जाता है कि छांगुर ने रमजान को धर्म परिवर्तन के लिए लोगों को तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2024 में उसकी मौत हो गई। एटीएस ने रमजान के नाम वाले एक अन्य व्यक्ति के बारे में भी जानकारी की।

अफसरों की मेहरबानी से छांगुर ने जमाए पांव
नेपाल सीमा से सटे संवेदनशील उतरौला क्षेत्र में अवैध धर्मांतरण और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों का जाल मजबूती से बुना गया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मेहरबानी से छांगुर अपने साम्राज्य का विस्तार करता रहा। तब एक प्रमोटी अधिकारी के बंगले तक छांगुर की सीधी पहुंच रही।

छांगुर के राजदार बब्बू चौधरी ने तत्कालीन एसपी की भी शिकायत शासन से की है। उनका कहना है कि छांगुर को सबसे अधिक महत्व पुलिस महकमे से ही मिला, जिससे वह लगातार राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की ओर कदम बढ़ाता गया। अब उसके तंत्र को खत्म करने में शासन और प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। फिलहाल छांगुर मामले में तहसील के अधिकारियों के साथ ही एक एसपी, एक एएसपी, दो सीओ और दो थानों के पूर्व प्रभारी निरीक्षकों का नाम चर्चा में हैं। यह अलग बात है कि पुलिस का कोई अधिकारी आरोपों को सही नहीं मान रहा है।

उतरौला व गैड़ास बुजुर्ग पुलिस पर डीएम ने भी उठाए थे सवाल
वर्ष 2024 में ही तत्कालीन जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने उतरौला पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। उतरौला में एक मकान पर कब्जा होने के मामले में डीएम ने जांच भी बैठाई थी। इसी तरह गैड़ास बुजुर्ग पुलिस पर तो गरीब परिवार की जमीन कब्जाने के आरोप की जांच शुरू करा दी थी, जिसमें बाद में पुलिस उपमहानिरीक्षक मंजिल सैनी की अध्यक्षता में बनी एसआईटी ने जांच की। इससे जिले के डीएम व एसपी में ही ठन गई और बाद में शासन ने दोनों अधिकारियों को जिले से हटा दिया। अब इन्हीं दोनों क्षेत्रों में छांगुर की पैठ उजागर हो रही है।

यह भी पढ़ें: छांगुर: हिंदुओं के धर्मांतरण का निकला मास्टरमाइंड, जांच में हुई देरी से तमाम सुबूत किए नष्ट; भेजा गया जेल


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