छांगुर: हिंदुओं के धर्मांतरण का निकला मास्टरमाइंड, जांच में हुई देरी से तमाम सुबूत किए नष्ट; भेजा गया जेल
Changur sent to jail: बुधवार को छांगुर और नीतू को पुलिस कस्टडी रिमांड समाप्त होने पर वापस जेल भेज दिया गया। हालांकि एटीएस उसे फिर से रिमांड पर ले सकती है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नेपाल सीमा समेत देश भर के कई शहरों में हिंदुओं के अवैध धर्मांतरण के सिंडीकेट का मास्टरमाइंड जमालुद्दीन उर्फ छांगुर ही है। बीते सात दिन के दौरान उससे यूपी एटीएस द्वारा की गई पूछताछ में इसके पुख्ता सुराग हाथ लगे हैं। वहीं दूसरी ओर बुधवार को छांगुर और नीतू को पुलिस कस्टडी रिमांड समाप्त होने पर वापस जेल भेज दिया गया। सूत्रों की मानें तो एटीएस छांगुर को दोबारा रिमांड पर ले सकती है।
सूत्रों की मानें तो रिमांड के दौरान छांगुर लगातार खुद को निर्दोष बताता रहा। उसने कहा कि उसके पास लोग अपनी मर्जी से धर्मांतरण कराने आते थे। उसने विदेशी फंडिंग मिलने से भी साफ इंकार करते हुए कहा कि नवीन रोहरा का दुबई में कारोबार होने की वजह यह खाते उसके हैं, जिससे उसका कोई वास्ता नहीं है। एटीएस की जांच में सामने आया है कि नवीन रोहरा और उसकी पत्नी नीतू रोहरा केवल मोहरा थे।
छांगुर ने पहले उनका धर्मांतरण कराया, जिसके बाद दुबई के उनके संपर्कों का बखूबी इस्तेमाल किया। दोनों छांगुर की बातों से इतना प्रभावित थे कि उन्होंने उसके इशारे पर महाराष्ट्र और बलरामपुर में करोड़ों रुपये की संपत्तियों को खरीदना शुरू कर दिया। एटीएस को शक है कि नवीन से मिलने के बाद छांगुर खाड़ी देशों की कुछ इस्लामिक संस्थाओं के संपर्क में आया, जिसके बाद उसने हिंदुओं के धर्मांतरण के नाम पर उनसे रकम मंगानी शुरू कर दी। अब एटीएस धर्मांतरण का शिकार बने लोगों के बयान दर्ज करेगी, जिसके बाद छांगुर और उसके करीबियों के खिलाफ शिकंजा कसा जाएगा।
जांच में देरी से सुबूत हुए नष्ट
बता दें कि एटीएस ने इस प्रकरण की जांच में देरी कर दी, जिससे तमाम सुबूत नष्ट हो गए। इसे लेकर उच्चाधिकारियों ने नाराजगी भी जताई है। दरअसल, इस प्रकरण की जांच एसटीएफ ने बीते वर्ष फरवरी माह में शुरू की थी, जिसके बाद नवंबर में अपनी रिपोर्ट देने के साथ एटीएस थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें नामजद छांगुर के बेटे महबूब और नवीन रोहरा को एटीएस अप्रैल माह में गिरफ्तार कर सकी। इससे छांगुर सतर्क हो गया और उसने सुबूतों को नष्ट करना शुरू कर दिया। यही वजह है कि एटीएस को रिमांड के दौरान छांगुर के खिलाफ ठोस सुबूत मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।