फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Balrampur News ›   CAG report was suppressed, it will be the witness of health scam

Balrampur News: दबा दी गई थी कैग की रिपोर्ट, वही बनेगी स्वास्थ्य घोटाले की गवाह

Sun, 05 Jul 2026 10:42 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Sun, 05 Jul 2026 10:42 PM IST
विज्ञापन
CAG report was suppressed, it will be the witness of health scam
बलरामपुर। स्वास्थ्य विभाग के बहुचर्चित अनुरक्षण घोटाले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। वर्षों पहले नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ऑडिट में जिन वित्तीय अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया था, वही रिपोर्ट अब विजिलेंस जांच का महत्वपूर्ण आधार बन गई है। विजिलेंस ने वर्ष 2015-16, 2016-17 और 2017-18 की कैग ऑडिट रिपोर्ट हासिल कर ली है। अब इन्हीं ऑडिट आपत्तियों के आधार पर पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है।
विज्ञापन


सूत्रों के अनुसार, कैग ने संयुक्त जिला चिकित्सालय के साथ-साथ जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में अनुरक्षण कार्यों, खरीद प्रक्रिया, भुगतान और अभिलेखों का ऑडिट किया था। इस दौरान कई गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आई थीं। ऑडिट रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था। शासन स्तर से कार्रवाई के निर्देश जारी हुए, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका।
विज्ञापन


जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उस समय स्वास्थ्य विभाग में प्रभाव रखने वाले तत्कालीन पयागपुर के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव के रसूख के चलते ऑडिट आपत्तियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। न तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ ठोस कदम उठाए गए और न ही करोड़ों रुपये के भुगतान की विस्तृत जांच कराई गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


अब विजिलेंस यह पता लगा रही है कि जिन बिंदुओं पर कैग ने आपत्ति दर्ज की थी, उनका निस्तारण किस आधार पर किया गया और क्या वास्तव में कोई सुधारात्मक कार्रवाई हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, विजिलेंस कैग रिपोर्ट का मिलान टेंडर फाइलों, कार्यपूर्ति प्रमाणपत्रों, ऑडिट आपत्तियों, भुगतान रजिस्टर, माप पुस्तिका (एमबी) तथा संबंधित अधिकारियों के स्पष्टीकरण से कर रही है। यदि ऑडिट में दर्ज आपत्तियां सही पाई जाती हैं और बाद में बिना समुचित जांच के उनका निस्तारण दिखाया गया है, तो उस समय के जिम्मेदार अधिकारियों और सत्यापन करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

पूर्व अधिकारियों के रिकॉर्ड भी खंगाल रही विजिलेंस

सूत्रों के अनुसार, पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), तीन जिला अस्पतालों के तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों (सीएमएस), नौ सीएचसी और 24 पीएचसी के चिकित्सा प्रभारियों से जुड़े अभिलेखों की भी जांच की जा रही है। विजिलेंस यह भी पड़ताल कर रही है कि पुराने टेंडरों के आधार पर वर्षों तक भुगतान कैसे होता रहा और अनुरक्षण कार्यों का भौतिक सत्यापन किन अधिकारियों ने किया। जांच में सत्यापन अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में मानी जा रही है।

ऑडिट आपत्तियां दबाने की प्रशासनिक श्रृंखला की भी होगी जांच

सेवानिवृत्त वित्त एवं लेखाधिकारी आर.के. चौबे का कहना है कि कैग की रिपोर्ट एक संवैधानिक ऑडिट दस्तावेज होती है। यदि रिपोर्ट में दर्ज अनियमितताओं के बावजूद भुगतान जारी रहे या कार्रवाई रोक दी गई हो, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, विजिलेंस अब केवल कथित घोटाले की राशि की ही जांच नहीं कर रही, बल्कि ऑडिट आपत्तियों को दबाने अथवा उनके निस्तारण की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया और उसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed