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Balrampur News: आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़े सीमावर्ती युवाओं के कदम
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बलरामपुर के जरवा में युवाओं को दिया गया डीएल प्रमाण पत्र ।-संवाद
पिपरहवा चौराहा। भारत-नेपाल सीमा से सटे गांवों के युवाओं को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में प्रयास शुरू हो गए हैं। नवीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) द्वारा नागरिक कल्याण कार्यक्रम के तहत ग्राम नंदमहरी स्थित आदि शक्ति मां पाटेश्वरी विद्यालय में 15 दिवसीय मोटर ड्राइविंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का संचालन प्रेरणा फाउंडेशन, श्रावस्ती के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम में सीमावर्ती गांवों के 15 युवाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। शुक्रवार को प्रशिक्षण के समापन अवसर पर एसएसबी कमांडेंट मनोरंजन कुमार पांडे ने प्रशिक्षित युवाओं को प्रमाणपत्र वितरित किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि सशस्त्र सीमा बल केवल सीमाओं की सुरक्षा में ही नहीं बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि आज के युवा डिजिटल साक्षरता, तकनीकी शिक्षा और ड्राइविंग जैसे कौशल सीखकर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों का द्वार खोल रहे हैं।
उन्होंने युवाओं से कहा कि वे इस प्रशिक्षण को रोजगार का जरिया बनाकर समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभाएं। प्रेरणा फाउंडेशन, श्रावस्ती के संयोजक संजय श्रीवास्तव ने बताया कि संगठन सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों में तकनीकी शिक्षा के प्रसार के लिए कार्य कर रहा है, ताकि इन क्षेत्रों के युवाओं को बेहतर जीवन और आत्मनिर्भरता के अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण युवाओं को न केवल वाहन संचालन की तकनीकी जानकारी देता है, बल्कि उन्हें अनुशासन, जिम्मेदारी और सुरक्षा के प्रति जागरूक भी बनाता है। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को सड़क सुरक्षा नियमों, ट्रैफिक संकेतों, वाहन रखरखाव और आपात स्थिति में वाहन नियंत्रण जैसे विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई।
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कार्यक्रम में उपस्थित डिप्टी कमांडेंट नैंसी सिंगला, मुख्य आरक्षी सतनारायण शांतनु सतपति, पुष्पेंद्र, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रोजन अली, करुणासिंधु तिवारी और अशोक चौहान आदि रहे।
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कार्यक्रम में सीमावर्ती गांवों के 15 युवाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। शुक्रवार को प्रशिक्षण के समापन अवसर पर एसएसबी कमांडेंट मनोरंजन कुमार पांडे ने प्रशिक्षित युवाओं को प्रमाणपत्र वितरित किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि सशस्त्र सीमा बल केवल सीमाओं की सुरक्षा में ही नहीं बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि आज के युवा डिजिटल साक्षरता, तकनीकी शिक्षा और ड्राइविंग जैसे कौशल सीखकर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों का द्वार खोल रहे हैं।
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उन्होंने युवाओं से कहा कि वे इस प्रशिक्षण को रोजगार का जरिया बनाकर समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभाएं। प्रेरणा फाउंडेशन, श्रावस्ती के संयोजक संजय श्रीवास्तव ने बताया कि संगठन सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों में तकनीकी शिक्षा के प्रसार के लिए कार्य कर रहा है, ताकि इन क्षेत्रों के युवाओं को बेहतर जीवन और आत्मनिर्भरता के अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण युवाओं को न केवल वाहन संचालन की तकनीकी जानकारी देता है, बल्कि उन्हें अनुशासन, जिम्मेदारी और सुरक्षा के प्रति जागरूक भी बनाता है। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को सड़क सुरक्षा नियमों, ट्रैफिक संकेतों, वाहन रखरखाव और आपात स्थिति में वाहन नियंत्रण जैसे विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई।
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कार्यक्रम में उपस्थित डिप्टी कमांडेंट नैंसी सिंगला, मुख्य आरक्षी सतनारायण शांतनु सतपति, पुष्पेंद्र, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रोजन अली, करुणासिंधु तिवारी और अशोक चौहान आदि रहे।