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सेहत व समृद्धि के लिए आर्गेनिक खेती अपनाने का आह्वान
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बलरामपुर के एमएलके पीजी कालेज में नौनिहाल को अन्न प्रासन कराती राज्यपाल आनंदीबेन पटेल।-संवाद
- फोटो : BALRAMPUR
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बलरामपुर। आर्गेनिक खेती कर किसान अच्छी आमदनी के साथ ही सेहत को भी बेहतर बना सकते हैं। खेती किसानी के इस तरीके को अपनाने से खेती के साथ ही किसान पशुपालन के क्षेत्र में भी बेहतर कार्य कर सकते हैं। इससे दैवी आपदा के समय खेती में होने वाले नुकसान की भरपाई भी की जा सकती है। यह आह्वान प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया। वह शुक्रवार को बलरामपुर के भगवती गंज स्थित मंडी समिति में खुली प्रदेश की पहली सावित्री देवी बॉयो एनर्जी फार्मर प्रोडक्ट कंपनी की बिक्री इकाई का उद्घाटन कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि बलरामपुर प्रदेश का पहला जिला है जहां बॉयो एनर्जी फार्मर प्रोडक्ट से उत्पादों की पहली बिक्री इकाई शुरू हुई है। यहां से किसान आर्गेनिक खेती से संबंधित बीज व अन्य सामग्री प्राप्त करने के साथ ही अपना तैयार उत्पाद भी बेंचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। राज्यपाल ने विशेषतौर पर महिलाओं को सशक्त बनाने की जरूरत जताते हुए कहा कि महिलाओं को भी खेती, पशुपालन व स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे आना चाहिए। केंद्र व प्रदेश की सरकार इस दिशा में उन्हें हर संभव मदद का प्रयास भी कर रही है।
इस दौरान उन्होंने ड्रोन कैमरे से खेतों में किए जाने वाले छिड़काव से होने वाली बचत के बारे में भी विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने स्वयं बॉयो एनर्जी की दुकान के साथ ही खेती व पशुपालन करके ही राज्यपाल बनने तक का सफर तय किया है। कार्यक्रम के दौरान समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण, पूर्व सांसद दद्दन मिश्र, सदर विधायक पल्टूराम, तुलसीपुर विधायक कैलाश नाथ शुक्ला व जिला पंचायत अध्यक्ष आरती तिवारी, कंपनी मालिक रामप्रकाश पांडेय व अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
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हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान की जरूरत
मंडी समिति के बाद एमएलके पीजी कालेज पहुंचीं राज्यपाल ने यहां विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी के स्टालों का निरीक्षण किया। इस दौरान विशेषतौर पर थारू जनजाति की हस्तशिल्प प्रदर्शनी का बारीकी से निरीक्षण कर उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों की प्रशंसा की। थारू जनजाति के लोगों को उन्होंने वनाधिकार पत्र सौंपते हुए कहा कि थारू जनजाति से जुड़ी महिलाओं की हस्त शिल्प कला को वैश्विक पहचान दिलाए जाने की जरूरत है। इस मौके पर थारू जनजाति तथा कालेज की छात्राओं ने राज्यपाल के समक्ष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया।
टीबी मुक्त बनाने के लिए एकजुट प्रयास जरूरी
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के संकल्प को साकार बनाने के लिए गंभीर चिंतन के साथ एकजुट प्रयास किए जाने की जरूरत जताई। कहा कि जब तक समाज के सभी लोग एक जुटता नहीं दिखाएंगे इस बीमारी को समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि तमाम जागरूकता के बाद भी सिर्फ 24 प्रतिशत प्रसूताएं ही जन्म से एक घंटे के भीतर बच्चों को स्तनपान कराती है।
अभी तक नहीं उतरा अंग्रेजी का भूत
राज्यपाल ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को एबीसीडी पढ़ाए जाने पर सख्त एतराज जताते हुए कहा कि आज जापान व चीन के लोग यहां आकर भी अपनी ही भाषा में बातचीत करते हैं। लेकिन आजादी के इतने लंबे समय बाद भी हम लोगों के सिर से अभी तक अंग्रेजी का भूत नहीं उतरा है। इसी लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में भी अंग्रेजी पढ़ाई जा रही है। उन्होंने बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान देने के लिए जिला कारागार व चीनी मिल जैसी संस्थानों का भ्रमण कराए जाने की जरूरत भी जताई। इस अवसर पर
गर्भवती की गोद भराई, नौनिहालों का अन्नप्रासन
एमएलके पीजी कालेज परिसर में राज्यपाल ने पांच गर्भवती महिलाओं की गोद भराई कर उनके बेहतर प्रसवकाल की कामना की। कहा कि आप सभी पौष्टिक आहार तथा समय समय पर जांच व दवा लेकर सुरक्षित व संस्थागत प्रसव कराएं। इसी दौरान उन्होंने पांच नौनिहालों का अन्न प्रासन भी कराते हुए आंगनबाड़ी केंद्रों के 25 बच्चों को प्री-स्कूल किट भी प्रदान की।
महिला बंदियों को बांटीं साड़ी
एमएलके पीजी कालेज से निकलकर राज्यपाल अपने काफिले के साथ जिला कारागार पहुंचीं। वहां पर उन्होंने महिला बंदियों को साड़ी वितरित करने के साथ ही जेल में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में भी जानकारी ली। राज्यपाल के साथ विभिन्न स्कूलों से जेल भ्रमण पर पहुंचे 15 विद्यार्थियों ने बंदियों के साथ सीधा संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। बंदियों ने बच्चों को नसीहत दी कि वह लोग स्कूल से बेहतर शिक्षा प्राप्त कर एक सुयोग्य नागरिक बनें और अपने जीवन में अपराध की कभी कोई छाप न पड़ने दे।
आंगनबाड़ी केंद्र का भी निरीक्षण
राज्यपाल कलवारी गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचीं। वहां पर उन्होंने बच्चों तथा उनके परिजनों से बातचीत कर केंद्र पर मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा बच्चों के अभिभावकों से नौनिहालों की सेहत का विशेष ख्याल रखने की अपील करते हुए इन्हें प्री स्कूल शिक्षा अपनी मातृ भाषा में देने की अपील भी की।
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उन्होंने कहा कि बलरामपुर प्रदेश का पहला जिला है जहां बॉयो एनर्जी फार्मर प्रोडक्ट से उत्पादों की पहली बिक्री इकाई शुरू हुई है। यहां से किसान आर्गेनिक खेती से संबंधित बीज व अन्य सामग्री प्राप्त करने के साथ ही अपना तैयार उत्पाद भी बेंचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। राज्यपाल ने विशेषतौर पर महिलाओं को सशक्त बनाने की जरूरत जताते हुए कहा कि महिलाओं को भी खेती, पशुपालन व स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे आना चाहिए। केंद्र व प्रदेश की सरकार इस दिशा में उन्हें हर संभव मदद का प्रयास भी कर रही है।
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इस दौरान उन्होंने ड्रोन कैमरे से खेतों में किए जाने वाले छिड़काव से होने वाली बचत के बारे में भी विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने स्वयं बॉयो एनर्जी की दुकान के साथ ही खेती व पशुपालन करके ही राज्यपाल बनने तक का सफर तय किया है। कार्यक्रम के दौरान समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण, पूर्व सांसद दद्दन मिश्र, सदर विधायक पल्टूराम, तुलसीपुर विधायक कैलाश नाथ शुक्ला व जिला पंचायत अध्यक्ष आरती तिवारी, कंपनी मालिक रामप्रकाश पांडेय व अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
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हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान की जरूरत
मंडी समिति के बाद एमएलके पीजी कालेज पहुंचीं राज्यपाल ने यहां विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी के स्टालों का निरीक्षण किया। इस दौरान विशेषतौर पर थारू जनजाति की हस्तशिल्प प्रदर्शनी का बारीकी से निरीक्षण कर उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों की प्रशंसा की। थारू जनजाति के लोगों को उन्होंने वनाधिकार पत्र सौंपते हुए कहा कि थारू जनजाति से जुड़ी महिलाओं की हस्त शिल्प कला को वैश्विक पहचान दिलाए जाने की जरूरत है। इस मौके पर थारू जनजाति तथा कालेज की छात्राओं ने राज्यपाल के समक्ष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया।
टीबी मुक्त बनाने के लिए एकजुट प्रयास जरूरी
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के संकल्प को साकार बनाने के लिए गंभीर चिंतन के साथ एकजुट प्रयास किए जाने की जरूरत जताई। कहा कि जब तक समाज के सभी लोग एक जुटता नहीं दिखाएंगे इस बीमारी को समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि तमाम जागरूकता के बाद भी सिर्फ 24 प्रतिशत प्रसूताएं ही जन्म से एक घंटे के भीतर बच्चों को स्तनपान कराती है।
अभी तक नहीं उतरा अंग्रेजी का भूत
राज्यपाल ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को एबीसीडी पढ़ाए जाने पर सख्त एतराज जताते हुए कहा कि आज जापान व चीन के लोग यहां आकर भी अपनी ही भाषा में बातचीत करते हैं। लेकिन आजादी के इतने लंबे समय बाद भी हम लोगों के सिर से अभी तक अंग्रेजी का भूत नहीं उतरा है। इसी लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में भी अंग्रेजी पढ़ाई जा रही है। उन्होंने बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान देने के लिए जिला कारागार व चीनी मिल जैसी संस्थानों का भ्रमण कराए जाने की जरूरत भी जताई। इस अवसर पर
गर्भवती की गोद भराई, नौनिहालों का अन्नप्रासन
एमएलके पीजी कालेज परिसर में राज्यपाल ने पांच गर्भवती महिलाओं की गोद भराई कर उनके बेहतर प्रसवकाल की कामना की। कहा कि आप सभी पौष्टिक आहार तथा समय समय पर जांच व दवा लेकर सुरक्षित व संस्थागत प्रसव कराएं। इसी दौरान उन्होंने पांच नौनिहालों का अन्न प्रासन भी कराते हुए आंगनबाड़ी केंद्रों के 25 बच्चों को प्री-स्कूल किट भी प्रदान की।
महिला बंदियों को बांटीं साड़ी
एमएलके पीजी कालेज से निकलकर राज्यपाल अपने काफिले के साथ जिला कारागार पहुंचीं। वहां पर उन्होंने महिला बंदियों को साड़ी वितरित करने के साथ ही जेल में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में भी जानकारी ली। राज्यपाल के साथ विभिन्न स्कूलों से जेल भ्रमण पर पहुंचे 15 विद्यार्थियों ने बंदियों के साथ सीधा संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। बंदियों ने बच्चों को नसीहत दी कि वह लोग स्कूल से बेहतर शिक्षा प्राप्त कर एक सुयोग्य नागरिक बनें और अपने जीवन में अपराध की कभी कोई छाप न पड़ने दे।
आंगनबाड़ी केंद्र का भी निरीक्षण
राज्यपाल कलवारी गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचीं। वहां पर उन्होंने बच्चों तथा उनके परिजनों से बातचीत कर केंद्र पर मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा बच्चों के अभिभावकों से नौनिहालों की सेहत का विशेष ख्याल रखने की अपील करते हुए इन्हें प्री स्कूल शिक्षा अपनी मातृ भाषा में देने की अपील भी की।

फोटो-16-बलरामपुर के एमएलके पीजी कालेज में प्राथमिक विद्यालय द्वारा लगाए गए स्टाल का निरीक्षण करती- फोटो : BALRAMPUR