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पहाड़ी नाले के पानी में डूब गई तीन हजार किसानों की फसल
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फोटो-6-बलरामपुर के भोजपुर गांव के पास खेत में भरा बाढ़ का पानी।-संवाद
- फोटो : BALRAMPUR
गौरा चौराहा(बलरामपुर)। क्षेत्र के तीन हजार किसान पिछले करीब एक दशक से पहाड़ी नाले सिरिया व नकटी की बाढ़ से त्रस्त हैं। नालों में उफान आने पर किसानों की करीब 10 हजार बीघे धान व गन्ने की फसल पानी में डूब गई है। बता दें कि बाढ़ का पानी इनके खेतों में जल निकासी न होने के कारण दो महीने तक भरा रहता है। किसानों ने डीएम से सिल्ट सफाई तथा भोजपुर लिफ्ट कैनाल में सायफन बनवाकर जलनिकासी कराए जाने की मांग की है।
ग्राम थरुआ, थरूनिया, गोविंदपुर, टेंगनवार, अमननगर, भोजपुर देवलहा, महरी, गैड़हवा, सदवापुर, फत्तेपुर, भुसैलवा, पकड़ी, पटोहा, जंबूदीप, राजाजोत, खुजरिया, धर्मपुर, दतरंगवा, सिंघवापुर, नेवरी, मथुरा बिलासपुर, परसा, पुरैना, हरहटा, सेवरा व चौखड़ा आदि गांव के किसान भूखन सिंह, ननके, दुलारे, शिवराम, इलियासी, केजी सिंह तथा फारूख आदि ने बताया कि पहले पहाड़ी नाले सिरिया व नकटी की बाढ़ का पानी खेतों में आता था और धीरे-धीरे राप्ती नदी में चला जाता था। नाले में जमा सिल्ट साफ न होने से यह पानी खेतों में भरा रहता है। भोजपुर के पास राप्ती नदी में पंप कैनाल इस पानी को रोकने में बांध का काम कर रही है। नहर तो बनाई गई लेकिन पहाड़ी नालों का पानी निकालने के लिए नहर के नीचे सायफन नहीं बनाया गया।
जलभराव के चलते खेतों में धान, गन्ना व दलहनी फसल नहीं हो पाती है। नवंबर के अंत में यह पानी सूखता है तो खेतों में केवल गेहूं की फसल ही हो पाती है। लोगों ने डीएम से मांग की है कि यदि सदवापुर तथा वीरपुर के पास जलनिकासी के लिए नहर के नीचे सायफन बना दिया जाए तो हमारी समस्या का समाधान हो जाएगा। एडीएम राम अभिलाष ने बताया कि मामले की सूचना मिली है। संबंधित विभाग से समस्या के स्थायी समाधान के लिए योजना बनाकर कार्य कराया जाएगा।
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ग्राम थरुआ, थरूनिया, गोविंदपुर, टेंगनवार, अमननगर, भोजपुर देवलहा, महरी, गैड़हवा, सदवापुर, फत्तेपुर, भुसैलवा, पकड़ी, पटोहा, जंबूदीप, राजाजोत, खुजरिया, धर्मपुर, दतरंगवा, सिंघवापुर, नेवरी, मथुरा बिलासपुर, परसा, पुरैना, हरहटा, सेवरा व चौखड़ा आदि गांव के किसान भूखन सिंह, ननके, दुलारे, शिवराम, इलियासी, केजी सिंह तथा फारूख आदि ने बताया कि पहले पहाड़ी नाले सिरिया व नकटी की बाढ़ का पानी खेतों में आता था और धीरे-धीरे राप्ती नदी में चला जाता था। नाले में जमा सिल्ट साफ न होने से यह पानी खेतों में भरा रहता है। भोजपुर के पास राप्ती नदी में पंप कैनाल इस पानी को रोकने में बांध का काम कर रही है। नहर तो बनाई गई लेकिन पहाड़ी नालों का पानी निकालने के लिए नहर के नीचे सायफन नहीं बनाया गया।
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जलभराव के चलते खेतों में धान, गन्ना व दलहनी फसल नहीं हो पाती है। नवंबर के अंत में यह पानी सूखता है तो खेतों में केवल गेहूं की फसल ही हो पाती है। लोगों ने डीएम से मांग की है कि यदि सदवापुर तथा वीरपुर के पास जलनिकासी के लिए नहर के नीचे सायफन बना दिया जाए तो हमारी समस्या का समाधान हो जाएगा। एडीएम राम अभिलाष ने बताया कि मामले की सूचना मिली है। संबंधित विभाग से समस्या के स्थायी समाधान के लिए योजना बनाकर कार्य कराया जाएगा।
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