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बाढ़ की अधूरी तैयारियों पर होगी कार्रवाई

Tue, 19 Apr 2022 11:10 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 19 Apr 2022 11:10 PM IST
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Action will be taken on incomplete preparations for flood
बलरामपुर। बाढ़ से निपटने की अधूरी तैयारियों पर संबंधित जिम्मेदारों को बख्शा नहीं जाएगा। बरसात शुरू होने से पहले बाढ़ व कटान प्रभावित क्षेत्रों में सभी कार्य चाक-चौबंद करा लें। ये बातें एडीएम राम अभिलाष ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में संभावित बाढ़ की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक में संबंधित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहीं।
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राप्ती नदी व पहाड़ी नालों की बाढ़ से जिले की तीनों तहसीलों के करीब 350 गांवों में तबाही मचती है। राप्ती की कटान की विभीषिका करीब 36 गांवों में कहर बनकर टूटती है। बैठक में बाढ़ खंड के सहायक अभियंता प्रीतमलाल ने एडीएम से बताया कि जिले में कुल 17 तटबंधों पर 32 संवेदनशील स्थान चिह्नित किए गये हैं। एडीएम ने निर्देश दिया कि सभी बंधों का 30 अप्रैल से पहले निरीक्षण करके रेनकट व रैट होल वाले स्थान चिह्नित करके बरसात शुरू होने से पहले मरम्मत कराई जाए। कोड़री घाट पुल के एप्रोच पर खतरा अधिक है।
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कोड़री घाट पर कार्य अभी से ही प्रारंभ कर दें। एप्रोच मार्ग को सुरक्षित करने के लिए नदी की धारा को डायवर्ट करने का प्रयास किया जाए। संवेदन व अतिसंवेदनशील तटबंधों को चिह्नित करके उन्हें दुरुस्त कराया जाए। बाढ़ बचाव के लिए बोल्डर, बालू भरी बोरियां, जीओ बैग्स सहित अन्य सामग्री स्टाफ व मजदूरों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए।
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एडीएम ने कहा कि अतिसंवेदनशील तटबंधों पर किए गये कार्यों का सत्यापन और निरीक्षण का कार्य भी समय से पूरा करा लिया जाए। बरसात के दौरान बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सभी अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहें। तटबंधों व बंधों की कटान और दरार दुरुस्त करा ली जाएं। डीपीआरओ नीलेश प्रताप सिंह को जिम्मेदारी दी गई कि बाढ़ प्रभावित ग्राम पंचायतों में नावों की मरम्मत का कार्य पूरा कराएं। तीनों तहसीलों के एसडीएम, तहसीलदार व पशु चिकित्साधिकारी समन्वय स्थापित कर गोशाला व भूसा भंडारण के लिए स्थान चिह्नित कर लें।
एसडीएम व तहसीलदार कंट्रोल रूम की स्थापना करके शिफ्टवार ड्यूटी लगा दें। दूरभाष नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार कराएं। बाढ़ प्रभावित गांव के लोगों की डायरेक्ट्री बनाई जाए, जिसमें उनके मोबाइल नंबर आदि का ब्योरा जुटाया जाए। आपदा मित्रों का कार्य क्षेत्र व मोबाइल नंबर आदि विवरण अपडेट कर लें। जिला स्तरीय अधिकारियों, कर्मचारियों व नाविकों के मोबाइल नंबर और पते की पूरी व्यवस्था चाक चौबंद रखे।
बाढ़ग्रस्त गांवों की सूची तैयार करें, जिसमें बीमार व अशक्त लोगों की छंटनी कर लें। कटान प्रभावित गांवों का नक्शा पहले व बाद में प्रभावित होने वाले परिवारों की सूची तैयार करें, जिससे बाढ़ के दौरान सहायता देने में सुविधा हो। आईएमए व एनजीओ का सहयोग बाढ़ के दौरान लिया जाएगा। बाढ़ के दौरान अफसरों व कर्मियों की छुट्टी निरस्त रहेगी। शरणालयों में जनरेटर का इंतजाम किया जाएगा।

एडीएम ने कहा कि पीडब्ल्यूडी प्रांतीय व निर्माण खंड के इंजीनियर पिछले साल आई बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत 30 अप्रैल तक हर हाल में करा लें। आपदा राहत मद से कोई धन प्राप्त नहीं हुआ है। पशुओं का वैक्सीनेशन पूरा कर लें। बाढ़ राहत केंद्रों पर साफ-सफाई व पेयजल का इंतजाम कराया जाएगा। नगर क्षेत्र में ईओ हैंडपंपों की मरम्मत कराने के साथ उच्चीकृत करा लें। एएसपी नम्रिता श्रीवास्तव को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पीएसी की तैनाती, गोताखोरों की व्यवस्था व वायरलेस सेट उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई। सीएमओ डॉ. सुशील कुमा को संक्रामक बीमारियों से निपटने का जिम्मा दिया गया। इस अवसर पर अपर एसडीएम ज्योति गौतम सहित सभी विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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