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Balrampur News: कागज पर कारोबार मैदान को दिखाया गोदाम, दिखाकर 39 लाख का टैक्स हड़पा

Sat, 06 Dec 2025 10:46 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 06 Dec 2025 10:46 PM IST
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A warehouse was shown as a business field on paper, and by showing it, 3.9 million in tax was seized
बलरामपुर के सिविल लाइन ​स्थित उप निबंधक कार्यालय। संवाद - फोटो : खैराबाद-मछरेहटा चौराहा के पास पलटा पड़ा ट्रक।
बलरामपुर।
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नेपाल के सीमावर्ती संवेदनशील तुलसीपुर क्षेत्र में कागज पर ही दो करोड़ का कारोबार दिखा कर टैक्स के रूप में 39 लाख रुपये हड़प लिए गए। जरवा रोड पर जहां स्क्रैप का गोदाम दिखाया गया है, वहां खाली मैदान मिला है। राज्य कर अधिकारी नकछेद प्रसाद ने तुलसीपुर इंफ्राटेक सॉल्यूशन के संचालक सलीम खान के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई है। मामले की जांच प्रभारी निरीक्षक राजकुमार सिंह को सौंपी गई है।
राज्य कर विभाग के अनुसार फर्म कागजों पर ही करोड़ों का माल बेच और खरीद रही थी। वर्ष 2025-26 में फर्म ने 2.2 करोड़ का कारोबार किया। उसी आधार पर करीब 39 लाख रुपये के आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) रिटर्न हासिल कर लिया। फर्म संचालक सलीम का पूरा खेल सिर्फ फर्जी इनवाइस (बिल) और आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) फ्रॉड पर आधारित था। उसने बस कागजों पर ही खरीद दिखाकर इनपुट क्रेडिट लेने की योजना बना रखी थी।
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राज्य कर अधिकारी नकछेद प्रसाद ने जांच की तो पता चला कि फर्म ने पहले भी कई बड़े बिल तैयार किए, जिनमें 32,25,456 व 39,01,221 के साथ एक अन्य फर्म को मिलाकर कुल खरीद 1,61,08,349 रुपये दिखाया।
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अपलोड किए बिल में माल की खरीद का दावा तो किया गया, लेकिन माल ट्रांसपोर्ट का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। लोडिंग-अनलोडिंग का प्रमाण भी नहीं लगाया। जांच में यह भी सामने आया कि एए इंटरप्राइजेज के साथ फर्जी लेन-देन दिखाया गया। कई और फर्में भी आईटीसी पास कराने के लिए इसका इस्तेमाल कर रही थीं, यानी फर्म फर्जी बिलिंग नेटवर्क का हिस्सा थी। जरवा रोड पर गोदाम दिखाया।
जांच टीम मौके पर पहुंची तो न दुकान मिली, न गोदाम, न माल ढुलाई का कोई निशान। गली इतनी संकरी कि भारी वाहन का आना जाना संभव ही नहीं। जांच रिपोर्ट के अनुसार फर्म केवल जीएसटी पोर्टल पर बनाई गई, जमीन पर उसका अस्तित्व नहीं था। फर्म ने अपने दस्तावेज में सीमेंट और पुराना आयरन स्क्रैप खरीदने का दावा किया। मौके पर कुछ नहीं मिला।

इनपुट टैक्स क्रेडिट घपले की जांच शुरू
फर्जी बिल के आधार पर जीएसटी भुगतान किए बिना ही करोड़ों का इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने की कोशिश फर्म ने कई बार की। इसके लिए कंप्यूटर जनरेटेड फर्जी बिल लगाए गए। जांच अधिकारी के अनुसार फर्जीवाड़े की रकम और बढ़ सकती है। अब 2019 से 2025 तक के सभी रजिस्टर खंगाले जा रहे हैं।

सितंबर में 23.11 करोड़ का घपला हो चुका है उजागर
राज्य कर विभाग ने सितंबर माह में 23.11 करोड़ से अधिक के आईटीसी (इनपुट कर लाभ) घोटाले का भंडाफोड़ किया था। कोतवाली देहात में रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी।
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