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Balrampur News: अदालत में जाने से पहले संवाद से समाधान का संदेश
Thu, 01 Oct 2026 11:35 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Thu, 01 Oct 2026 11:35 PM IST
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बलरामपुर। अदालतों में लंबित मामलों के शीघ्र और सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए बृहस्पतिवार से ‘राष्ट्र के नाम मध्यस्थता अभियान 3.0’ शुरू हो गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से अभियान के तहत आमजन को मध्यस्थता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। लोगों को विवाद बढ़ाने के बजाय संवाद के जरिए समाधान तलाशने का संदेश दिया जा रहा है।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण यशपाल वर्मा ने कहा कि मध्यस्थता में विवाद से जुड़े पक्षकार आपसी बातचीत और सहमति से समाधान तलाशते हैं। इससे समय और खर्च की बचत होने के साथ पारिवारिक, व्यावसायिक और सामाजिक संबंधों में अनावश्यक कटुता कम करने का अवसर मिलता है। अभियान के दौरान न्यायालयों से मध्यस्थता के लिए भेजे गए मामलों के पक्षकारों को इसकी प्रक्रिया और लाभों की जानकारी दी जा रही है।
बताया कि अभियान के दौरान अधिवक्ताओं, न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों और आम नागरिकों के बीच भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, पोस्टर-बैनर, पंपलेट और हैंडबिल के माध्यम से मध्यस्थता का संदेश लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। हर विवाद का समाधान अदालत के फैसले से ही हो, यह आवश्यक नहीं है। कई विवाद संवाद, समझ और आपसी सहमति से सहजता से सुलझाए जा सकते हैं। मध्यस्थता पक्षकारों को अपने विवाद का समाधान स्वयं तलाशने का अवसर देती है।
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सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण यशपाल वर्मा ने कहा कि मध्यस्थता में विवाद से जुड़े पक्षकार आपसी बातचीत और सहमति से समाधान तलाशते हैं। इससे समय और खर्च की बचत होने के साथ पारिवारिक, व्यावसायिक और सामाजिक संबंधों में अनावश्यक कटुता कम करने का अवसर मिलता है। अभियान के दौरान न्यायालयों से मध्यस्थता के लिए भेजे गए मामलों के पक्षकारों को इसकी प्रक्रिया और लाभों की जानकारी दी जा रही है।
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बताया कि अभियान के दौरान अधिवक्ताओं, न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों और आम नागरिकों के बीच भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, पोस्टर-बैनर, पंपलेट और हैंडबिल के माध्यम से मध्यस्थता का संदेश लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। हर विवाद का समाधान अदालत के फैसले से ही हो, यह आवश्यक नहीं है। कई विवाद संवाद, समझ और आपसी सहमति से सहजता से सुलझाए जा सकते हैं। मध्यस्थता पक्षकारों को अपने विवाद का समाधान स्वयं तलाशने का अवसर देती है।
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