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भीषण गर्मी, लू, ड्यूटी का फर्ज और संतान के भविष्य का ताना बाना
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बलरामपुर। कहते हैं कि इस दुनिया में मां के लिए उसकी संतान अनमोल होती है। संतान के लिए मां किसी भी मुश्किल से लड़ सकती है। मां हमेशा अपने संतान के सुनहरे भविष्य का ताना बाना बुनती रहती है। मदर्स डे पर यह नजारा लोकसभा चुनाव मतदान के लिए ड्यूटी का फर्ज निभाने आई माताओं में साफ दिख रहा था। भीषण गर्मी व लू के थपेड़ों में ड्यूटी पर जा रही मां अपने मासूम को आंचल में छिपाए हुए थी। खुद से ज्यादा उसे अपने संतान की चिंता थी। बातचीत के दौरान इन माताओं ने अपनी कहानी कुछ इस तरह से बयां की।
बेटी की मुस्कान से दूर हो जाती थकान
जिले के परिषदीय विद्यालय में नौकरी कर रही तरुन मलिक कहती हैं कि परिवार में अकेली कमाने वाली वह खुद है। मतदान ड्यूटी पर जा रही वह गोद में अपनी मासूम बेटी सात्विका को लिए हुए थी। उनका कहना था कि परिवार व नौकरी के लिए फर्ज के साथ-साथ उन्हें अपनी मासूम बेटी के भविष्य की भी चिंता है। बेटी अभी उनका आंचल नहीं छोड़ना चाहती वह हमेशा मुझसे लिपटी रहती है। उन्होंने बताया कि मेरे लिए बेटी सबसे अनमोल है। इसकी एक मुस्कान से मेरी सारी थकान दूर हो जाती है।
सर्वोपरि है बेटे का भविष्य
मतदान ड्यूटी पर बेटे को गोद में लिए बैठी शिक्षिका अंशू गौतम का कहना था कि उनके बेटे वीर का भविष्य उनके लिए सर्वोपरि है। परिवार में अकेले कमाने वाली अंशू का हौसला देखने लायक था। उनका कहना था कि वह अपने बेटे को एक कामयाब इंसान बनाना चाहती है। पति, परिवार व नौकरी के बीच वह बेटे के भविष्य को संवारने की चिंता करती रहती हैं। उनका कहना था कि यदि संतान कामयाब होती है तो मां को अपार खुशी का अनुभव होता है। मेरी कामयाबी पर मेरी मां के आदर्श कर्त्तव्यों को निभाने का प्रयास निरंतर करती रहूंगी।
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बेटी की मुस्कान से दूर हो जाती थकान
जिले के परिषदीय विद्यालय में नौकरी कर रही तरुन मलिक कहती हैं कि परिवार में अकेली कमाने वाली वह खुद है। मतदान ड्यूटी पर जा रही वह गोद में अपनी मासूम बेटी सात्विका को लिए हुए थी। उनका कहना था कि परिवार व नौकरी के लिए फर्ज के साथ-साथ उन्हें अपनी मासूम बेटी के भविष्य की भी चिंता है। बेटी अभी उनका आंचल नहीं छोड़ना चाहती वह हमेशा मुझसे लिपटी रहती है। उन्होंने बताया कि मेरे लिए बेटी सबसे अनमोल है। इसकी एक मुस्कान से मेरी सारी थकान दूर हो जाती है।
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सर्वोपरि है बेटे का भविष्य
मतदान ड्यूटी पर बेटे को गोद में लिए बैठी शिक्षिका अंशू गौतम का कहना था कि उनके बेटे वीर का भविष्य उनके लिए सर्वोपरि है। परिवार में अकेले कमाने वाली अंशू का हौसला देखने लायक था। उनका कहना था कि वह अपने बेटे को एक कामयाब इंसान बनाना चाहती है। पति, परिवार व नौकरी के बीच वह बेटे के भविष्य को संवारने की चिंता करती रहती हैं। उनका कहना था कि यदि संतान कामयाब होती है तो मां को अपार खुशी का अनुभव होता है। मेरी कामयाबी पर मेरी मां के आदर्श कर्त्तव्यों को निभाने का प्रयास निरंतर करती रहूंगी।
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