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पत्नी के हत्यारे को न्यायालय ने सुनाई 10 वर्ष की सजा
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पत्नी के हत्यारे को न्यायालय ने सुनाई 10 वर्ष की सजा
बलरामपुर। एफटीसी प्रथम ने गैर इरादतन हत्या के आरोप में पति को दोषी मानते हुुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। जज ने आरोपी को 10 हजार रुपये अर्थदंड भी अदा करने का आदेश दिया है।
थाना देहात कोतवाली के ग्राम देवरिया मुबारकपुर निवासी राजेंद्र प्रसाद मौर्या ने थाने पर प्रार्थना पत्र दिया था कि उसका पुत्र शानू मौर्या ने अपनी पत्नी नीलम मौर्या को मारापीटा जिससे उसकी 11 फरवरी 2014 को अस्पताल ले जाते समय मृत्यु हो गई।
राजेंद्र ने आरोप लगाया था कि उसके पुत्र शानू ने थाना कोतवाली उतरौला अंतर्गत ग्राम चंदापुर निवासिनी अफसरी बानो से प्रेम विवाह किया था तथा उसका नाम धर्म परिवर्तन के बाद नीलम रखा था।
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दोनों से एक लड़का भी था। शानू अक्सर शराब पीता था। शानू के कार्यों से क्षुब्ध होकर उसे घर से निकाल दिया था। शानू व नीलम के बीच 10 फरवरी 2014 को कहासुनी हुई जिसमें शानू ने नीलम को मारा पीटा था।
पुलिस ने शानू के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया। विवेचक ने मामले में विवेचना के बाद शानू को गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया।
सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी वकील वसीउल हसन ने सात गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम विजय कुमार आजाद ने शानू मौर्या को गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास व 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
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बलरामपुर। एफटीसी प्रथम ने गैर इरादतन हत्या के आरोप में पति को दोषी मानते हुुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। जज ने आरोपी को 10 हजार रुपये अर्थदंड भी अदा करने का आदेश दिया है।
थाना देहात कोतवाली के ग्राम देवरिया मुबारकपुर निवासी राजेंद्र प्रसाद मौर्या ने थाने पर प्रार्थना पत्र दिया था कि उसका पुत्र शानू मौर्या ने अपनी पत्नी नीलम मौर्या को मारापीटा जिससे उसकी 11 फरवरी 2014 को अस्पताल ले जाते समय मृत्यु हो गई।
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राजेंद्र ने आरोप लगाया था कि उसके पुत्र शानू ने थाना कोतवाली उतरौला अंतर्गत ग्राम चंदापुर निवासिनी अफसरी बानो से प्रेम विवाह किया था तथा उसका नाम धर्म परिवर्तन के बाद नीलम रखा था।
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दोनों से एक लड़का भी था। शानू अक्सर शराब पीता था। शानू के कार्यों से क्षुब्ध होकर उसे घर से निकाल दिया था। शानू व नीलम के बीच 10 फरवरी 2014 को कहासुनी हुई जिसमें शानू ने नीलम को मारा पीटा था।
पुलिस ने शानू के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया। विवेचक ने मामले में विवेचना के बाद शानू को गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया।
सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी वकील वसीउल हसन ने सात गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम विजय कुमार आजाद ने शानू मौर्या को गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास व 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।