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Balrampur News: भारत-नेपाल सीमा के 44 गांव बनेंगे विकास और रोजगार के केंद्र

Sun, 05 Jul 2026 10:41 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Sun, 05 Jul 2026 10:41 PM IST
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44 Village Development and Employment Centers on the India-Nepal border
फोटो-6-बलरामपुर के नेपाल सीमा पर बसा गांव इमिलिया कोडर ।-संवाद

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बलरामपुर। भारत-नेपाल सीमा से सटे जिले के 44 गांव अब विकास और रोजगार के नए केंद्र के रूप में विकसित किए जाएंगे। केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 योजना के तहत इन गांवों के समग्र विकास के लिए विभागवार कार्ययोजना तैयार की जाएगी। योजना का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना है। इससे जिले की करीब तीन लाख आबादी को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
कैंप कार्यालय में शनिवार को आयोजित जिला स्तरीय समिति की बैठक में जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने सभी संबंधित विभागों को समयबद्ध और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंच सके।
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जिलाधिकारी ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में टेक्सटाइल उद्योग की अच्छी संभावनाएं हैं। स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल के अनुरूप टेक्सटाइल आधारित इकाइयों की स्थापना के प्रस्ताव तैयार किए जाएं। इसके लिए शासन स्तर से आवश्यक बजट उपलब्ध कराया जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, पलायन कम होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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10 क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस
योजना के तहत 10 प्रमुख क्षेत्रों के लिए विभागवार कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इनमें आजीविका सृजन, सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, ग्राम अवसंरचना, ऊर्जा व्यवस्था, दूरसंचार, डिजिटल कनेक्टिविटी, पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना शामिल है। इसके अलावा वित्तीय समावेशन, शिक्षा, युवा सशक्तीकरण, कौशल विकास, स्वयं सहायता समूहों, सहकारी समितियों तथा किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को भी सशक्त बनाया जाएगा।

दो ब्लॉकों के 44 गांव होंगे शामिल
योजना में पचपेड़वा और गैसड़ी क्षेत्र के 44 सीमावर्ती गांव शामिल किए गए हैं। इनमें इमलिया कोडर, विशुनपुर विश्राम, भुसहर ऊंचवा, रनियापुर भचकाही, बनगाई, सोनगढ़ा, मुतेहरा, सकरा-शकरी, भौरीशाल, नरिहवा भुकुरूवा, परबतिहा, रजेहना, कंचनपुर, मडनी, सडनी और रामवापुर थारू सहित अन्य गांव शामिल हैं। तराई क्षेत्र में स्थित इन गांवों में लंबे समय से सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, संचार और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहा है। बरसात के दौरान कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट जाता है, जिससे ग्रामीणों को अस्पताल, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।


तीन लाख लोगों को मिलेगा लाभ
योजना के तहत इन 44 गांवों में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, डिजिटल कनेक्टिविटी और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इससे क्षेत्र के तीन लाख लोगों को लाभ मिलेगा।। साथ ही टेक्सटाइल उद्योग, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे सीमावर्ती गांवों में आधारभूत सुविधाएं मजबूत होंगी, पलायन में कमी आएगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
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