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Balrampur News: रेल लाइनों की निगरानी के लिए बनाए गए 22 ट्रैक मित्र
Sat, 21 Sep 2024 11:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 21 Sep 2024 11:46 PM IST
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बलरामपुर स्थित झारखंडी रेलवे स्टेशन। संवाद
रेलवे लाइन किनारे बसे गांवों के प्रधानों व अन्य जागरूक लोगाें से संवाद में जुटी आरपीएफ, बनी रणनीति
नंदलाल तिवारी
बलरामपुर। कानपुर में कालिंदी एक्सप्रेस को पलटाने की साजिश हो या फिर रामपुर में ट्रैक पर खंभा रखने की घटना। इन घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा बल गंभीर हो गया है। ट्रैक की सुरक्षा को लेकर एक नया एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इसमें रेलवे लाइन से सटे गांवों के प्रधानों व अन्य जागरूक लोगों से रेलवे सुरक्षा बल की टीम संवाद करने में जुटी हुई है। इन्हें ट्रैक मित्र बनाकर ट्रैक की माॅनीटरिंग बढ़ाई जाएगी। वैसे अब तक पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ डिवीजन में 170 ट्रैक मित्र बनाए जा चुके हैं। वहीं, जिले में अब तक 22 ट्रैक मित्र बनाए जा चुके हैं।
बलरामपुर जिला नेपाल से सटा हुआ है। जिले से होकर बढ़नी होते हुए इंटरसिटी सहित करीब एक दर्जन ट्रेनों के माध्यम से हजारों यात्रियों का प्रतिदिन आवागमन होता है। हालांकि रेलवे सुरक्षा बल की टीम स्टेशनों पर तैनात है। हाल की घटनाओं को देखते हुए ट्रैक की निगरानी बढ़ाई गई है। रेलवे सुरक्षा बल के कर्मियों को ट्रैक पर गश्त करने को कहा गया है ताकि इस तरह के हादसों पर रोक लगाई जा सके।
ट्रैक मित्र का यह होगा काम
रेलवे लाइनों से सटे गांवों के प्रधानों व संभ्रांत लोगों के बारे में आरपीएफ जानकारी जुटा रही है। इनका नाम व मोबाइल नंबर एकत्र किया जा रहा है। आरपीएफ इन्हें ट्रैक मित्र बना रही है। इसके पीछे की मंशा यह है कि रेलवे लाइन के किनारे रहने के कारण वह ट्रैक पर नजर रख सकेंगे। अगर कोई ऐसी बात उन्हें नजर आएगी, जो असामान्य हो तो उस पर तत्काल जानकारी मिल सकेगी। ऐसे में उस पर कार्रवाई की जा सकेगी।
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वरिष्ठ अधिकारी करेंगे संवाद
ट्रैक मित्र से आरपीएफ के अधिकारी सीधा संवाद करेंगे। उनसे संपर्क करके ट्रैक के बारे में जानकारी के साथ ही रेल अपराध के बारे में भी नजर रखेंगे। बलरामपुर आरपीएफ टीम के राजेश कुमार सिंह ने गांवों में भ्रमण करके अब तक 22 लोगों को ट्रैक मित्र बनाया है। इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई है।
लखनऊ मंडल के आरपीएफ के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त चंद्र मोहन मिश्र का कहना है कि कुछ जिलों में हुई घटनाओं को देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है। ट्रैक पर आरपीएफ की टीम नजर रख रही है। गश्त बढ़ाई गई है। साथ ही रेलवे लाइनों से सटे गांवों के लोगों से संवाद करके उन्हें ट्रैक मित्र बनाया जा रहा है। अब तक 170 ट्रैक मित्र बनाए गए हैं।
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नंदलाल तिवारी
बलरामपुर। कानपुर में कालिंदी एक्सप्रेस को पलटाने की साजिश हो या फिर रामपुर में ट्रैक पर खंभा रखने की घटना। इन घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा बल गंभीर हो गया है। ट्रैक की सुरक्षा को लेकर एक नया एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इसमें रेलवे लाइन से सटे गांवों के प्रधानों व अन्य जागरूक लोगों से रेलवे सुरक्षा बल की टीम संवाद करने में जुटी हुई है। इन्हें ट्रैक मित्र बनाकर ट्रैक की माॅनीटरिंग बढ़ाई जाएगी। वैसे अब तक पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ डिवीजन में 170 ट्रैक मित्र बनाए जा चुके हैं। वहीं, जिले में अब तक 22 ट्रैक मित्र बनाए जा चुके हैं।
बलरामपुर जिला नेपाल से सटा हुआ है। जिले से होकर बढ़नी होते हुए इंटरसिटी सहित करीब एक दर्जन ट्रेनों के माध्यम से हजारों यात्रियों का प्रतिदिन आवागमन होता है। हालांकि रेलवे सुरक्षा बल की टीम स्टेशनों पर तैनात है। हाल की घटनाओं को देखते हुए ट्रैक की निगरानी बढ़ाई गई है। रेलवे सुरक्षा बल के कर्मियों को ट्रैक पर गश्त करने को कहा गया है ताकि इस तरह के हादसों पर रोक लगाई जा सके।
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ट्रैक मित्र का यह होगा काम
रेलवे लाइनों से सटे गांवों के प्रधानों व संभ्रांत लोगों के बारे में आरपीएफ जानकारी जुटा रही है। इनका नाम व मोबाइल नंबर एकत्र किया जा रहा है। आरपीएफ इन्हें ट्रैक मित्र बना रही है। इसके पीछे की मंशा यह है कि रेलवे लाइन के किनारे रहने के कारण वह ट्रैक पर नजर रख सकेंगे। अगर कोई ऐसी बात उन्हें नजर आएगी, जो असामान्य हो तो उस पर तत्काल जानकारी मिल सकेगी। ऐसे में उस पर कार्रवाई की जा सकेगी।
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वरिष्ठ अधिकारी करेंगे संवाद
ट्रैक मित्र से आरपीएफ के अधिकारी सीधा संवाद करेंगे। उनसे संपर्क करके ट्रैक के बारे में जानकारी के साथ ही रेल अपराध के बारे में भी नजर रखेंगे। बलरामपुर आरपीएफ टीम के राजेश कुमार सिंह ने गांवों में भ्रमण करके अब तक 22 लोगों को ट्रैक मित्र बनाया है। इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई है।
लखनऊ मंडल के आरपीएफ के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त चंद्र मोहन मिश्र का कहना है कि कुछ जिलों में हुई घटनाओं को देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है। ट्रैक पर आरपीएफ की टीम नजर रख रही है। गश्त बढ़ाई गई है। साथ ही रेलवे लाइनों से सटे गांवों के लोगों से संवाद करके उन्हें ट्रैक मित्र बनाया जा रहा है। अब तक 170 ट्रैक मित्र बनाए गए हैं।