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राप्ती नदी का थमा उफान तो कई गांव में बढ़ गई कटान

Fri, 06 Jul 2018 09:16 PM IST
Updated Fri, 06 Jul 2018 09:16 PM IST
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राप्ती नदी का थमा उफान तो कई गांव में बढ़ गई कटान

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राप्ती में उफान थमी तो कटान तेज

बलरामपुर। बीते दिनों नेपाली पानी छोड़े जाने के कारण राप्ती नदी में आई उफान तो अब थम गई है लेकिन कई गांवों के निकट कटान का कहर शुरू हो गया है। कटान के डर से लोग अपने हाथों से ही अपना आशियाना उजाड़ रहे हैं।

कई बीघे कृषि योग्य जमीन नदी की धारा में समा चुकी है। कटान से हो रही बभनपुरवा गांव में तबाही का जायजा शुक्रवार को डीएम ने भी लिया। उन्होंने मातहतों को कटान रोकने के उपाय में तेजी लाने का निर्देश दिए है।
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राप्ती नदी की कटान के चलते टेंगनहिया मानकोट, जबदहा, जबदही, सेमरहना, ढोढरी, कटरा शंकरनगर, नरायनपुर मझारी, रामपुर, चंदापुर, लखमा, पचौथा, बाघाजोत व बभनपुरवा आदि गांवों में हड़कंप मचा हुआ है। नदी गांव के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है।
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लोगों की बेशकीमती खेती की जमीन भी नदी की धारा में विलीन हो रही हैं। पीड़ित अपनी तबाही का मंजर देख रहे है। नदी की कटान के चलते लोग अपने हाथों से ही अपना आशियाना उजाड़ कर सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए विवश हैं।

कटान पीड़ितों का कहना है कि कटान रोकने का प्रयास तो दूर अधिकारियों ने गांव तक आना भी मुनासिब नहीं समझा है। कटान रोकने का प्रयास न किए जाने से टेंगनहिया मानकोट के लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

शुक्रवार को डीएम कृष्णा करुणेश उतरौला तहसील के कटान पीड़ित गांव बभनपुरवा पहुंचे। डीएम ने मातहतों को गांव के किनारे हो रही कटान को रोकने के प्रयास में तेजी लाने का निर्देश दिया।

गांव को बचाने के लिए मनरेगा योजना के तहत हर संभव आर्थिक मदद देने की बात भी डीएम ने कही। ग्रामीण उत्तम, भोंदू, विजय पाल, जगदीश व मदन ने बताया कि कटान रोकने के लिए बोरियों में भरे जाने वाले मिट्टी हमारे खेतों से ली जा रही है।

अधिकारियों को बताया जा रहा है कि मिट्टी 10 किलोमीटर दूर से लाई जा रही है। कटान रोकने का कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है। इन लोगों ने बताया कि अधिकारियों ने ग्रामीणों को डीएम से मिलने भी नहीं दिया।


ग्रामीण प्रशासनिक उपायों में बरती जा रही लापरवाही से आक्रोशित है। डीएम के निरीक्षण के दौरान एडीएम एके शुक्ल तथा एसडीएम उतरौला बीएल सरोज सहित बाढ़ खंड व राजस्व के कई अधिकारी व कर्मचारी भी मौजूद रहे।
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