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हर्षवर्धन ने अपंगता को दी मात, जीता रजत पदक
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हर्षवर्द्धन ने दिव्यांगता को दी मात, जीता रजत पदक
बलरामपुर। पहलवारा निवासी हर्षवर्द्धन दीक्षित ने ये साबित कर दिया है कि यदि कुछ करने का जज्बा हो तो शारीरिक दिव्यांगता भी आपका रास्ता नहीं रोक सकती।
हर्षवर्द्धन ने बीते दिनों प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी जालंधर पंजाब में आयोजित विस्तार-5 इंटरनेशनल गेम्स में हिस्सा लिया और व्हीलचेयर मैराथन व क्लब थ्रो गेम्स में रजत पदक जीतकर जिले का मान बढ़ाया है।
विदित हो कि वर्ष 2009 में हर्षवर्द्धन जिम्नास्टिक करते समय गर्दन के बल गिर गए थे। इससे उनके रीढ़ की हड्डी टूट गई और वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गए।
इसके बाद भी हर्षवर्द्धन ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने पिछले 10 वर्षों में अपनी पहचान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बना ली है। हर्षवर्द्धन अब तक पैरा गेम्स में मैराथन, टेबल टेनिस, पैरा बुस्या, क्लब थ्रो, डिस्कस थ्रो आदि में कुल आठ मेडल जीत चुके हैं।
हर्षवर्द्धन का चयन इंडियन नेशनल पैरा रग्बी में हुआ है। इसके अलावा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स गेम्स में भारतीय खिलाड़ी के रूप में भी इनका चयन हुआ है। हर्षवर्द्धन की सफलता में उनके पिता हिमांशु दीक्षित का विशेष सहयोग रहता है।
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बलरामपुर। पहलवारा निवासी हर्षवर्द्धन दीक्षित ने ये साबित कर दिया है कि यदि कुछ करने का जज्बा हो तो शारीरिक दिव्यांगता भी आपका रास्ता नहीं रोक सकती।
हर्षवर्द्धन ने बीते दिनों प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी जालंधर पंजाब में आयोजित विस्तार-5 इंटरनेशनल गेम्स में हिस्सा लिया और व्हीलचेयर मैराथन व क्लब थ्रो गेम्स में रजत पदक जीतकर जिले का मान बढ़ाया है।
विदित हो कि वर्ष 2009 में हर्षवर्द्धन जिम्नास्टिक करते समय गर्दन के बल गिर गए थे। इससे उनके रीढ़ की हड्डी टूट गई और वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गए।
इसके बाद भी हर्षवर्द्धन ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने पिछले 10 वर्षों में अपनी पहचान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बना ली है। हर्षवर्द्धन अब तक पैरा गेम्स में मैराथन, टेबल टेनिस, पैरा बुस्या, क्लब थ्रो, डिस्कस थ्रो आदि में कुल आठ मेडल जीत चुके हैं।
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हर्षवर्द्धन का चयन इंडियन नेशनल पैरा रग्बी में हुआ है। इसके अलावा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स गेम्स में भारतीय खिलाड़ी के रूप में भी इनका चयन हुआ है। हर्षवर्द्धन की सफलता में उनके पिता हिमांशु दीक्षित का विशेष सहयोग रहता है।
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