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पुत्र की लंबी आयु के लिए आज व्रत रखेंगी माताएं
Updated Sat, 12 Aug 2017 11:15 PM IST
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पुत्र की लंबी आयु के लिए आज व्रत रखेंगी माताएं
- कुश में गांठ लगाकर छट्ठी माई की करेंगी पूजा-अर्चना
बलरामपुर। पुत्र की लंबी आयु व उनकी खुशहाली के लिए माताएं 13 अगस्त को हलछट्ठी का व्रत रखेंगी। कुश में गांठ लगाकर माताएं छट्ठी माता की पूजा-अर्चना करेंगी और उनसे पुत्र की लंबी आयु के लिए प्रार्थना भी करेंगी।
धर्माचार्य पंडित बजरंगी प्रसाद शास्त्री ने बताया कि भादौ माह कृष्ण पक्ष की छट्ठी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। भगवान बलराम का मुख्य शस्त्र हल होने के कारण इस व्रत को हलछट्ठी के नाम से जाना जाता है। एक प्राचीन कथा के अनुसार ललिता नाम की एक ग्वालिन दूध-दही बेचने गई थी इसी बीच रास्ते में ही उसने बच्चे को जन्म दे दिया। बच्चे को एक झाड़ी में छिपाकर दूध बेंचने निकल पड़ी। जल्दी दूध बेचने के लिए उसने लोगों से झूठ बोला। झूठ बोलकर दूध बेंचने के कारण ग्वालिन का पुत्र मर गया। ग्वालिन ने अपने पाप का प्रायश्चित करने के लिए छठी माता का व्रत रखा। ग्वालिन की पूजा-अर्चना से खुश होकर छट्ठी माता ने उसके पुत्र को जीवनदान देने के साथ-साथ वरदान दिया कि आज के दिन जो पुत्रवती महिलाएं व्रत रखकर हमारी पूजा-अर्चना करेंगी उनके बच्चे भी दीर्घायु व खुशहाल होंगे। इसी मान्यता के चलते महिलाएं छठी माता का व्रत पूरे विधि-विधान के साथ रखती है। इस दिन हल से जोते-बोए गए किसी भी तरह का अन्न ग्रहण नहीं करती है।
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- कुश में गांठ लगाकर छट्ठी माई की करेंगी पूजा-अर्चना
बलरामपुर। पुत्र की लंबी आयु व उनकी खुशहाली के लिए माताएं 13 अगस्त को हलछट्ठी का व्रत रखेंगी। कुश में गांठ लगाकर माताएं छट्ठी माता की पूजा-अर्चना करेंगी और उनसे पुत्र की लंबी आयु के लिए प्रार्थना भी करेंगी।
धर्माचार्य पंडित बजरंगी प्रसाद शास्त्री ने बताया कि भादौ माह कृष्ण पक्ष की छट्ठी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। भगवान बलराम का मुख्य शस्त्र हल होने के कारण इस व्रत को हलछट्ठी के नाम से जाना जाता है। एक प्राचीन कथा के अनुसार ललिता नाम की एक ग्वालिन दूध-दही बेचने गई थी इसी बीच रास्ते में ही उसने बच्चे को जन्म दे दिया। बच्चे को एक झाड़ी में छिपाकर दूध बेंचने निकल पड़ी। जल्दी दूध बेचने के लिए उसने लोगों से झूठ बोला। झूठ बोलकर दूध बेंचने के कारण ग्वालिन का पुत्र मर गया। ग्वालिन ने अपने पाप का प्रायश्चित करने के लिए छठी माता का व्रत रखा। ग्वालिन की पूजा-अर्चना से खुश होकर छट्ठी माता ने उसके पुत्र को जीवनदान देने के साथ-साथ वरदान दिया कि आज के दिन जो पुत्रवती महिलाएं व्रत रखकर हमारी पूजा-अर्चना करेंगी उनके बच्चे भी दीर्घायु व खुशहाल होंगे। इसी मान्यता के चलते महिलाएं छठी माता का व्रत पूरे विधि-विधान के साथ रखती है। इस दिन हल से जोते-बोए गए किसी भी तरह का अन्न ग्रहण नहीं करती है।
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